आईआईटी दिल्ली से विश्वविद्यालयों और स्थानीय क्षेत्रों तक संस्कृत संभाषण की पहल; व्याकरण-वर्गों, बाल केंद्रों और नियमित अभ्यास के माध्यम से जनजीवन से जुड़ाव बढ़ाने की तैयारी

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।संस्कृत को भारतीय ज्ञान-परंपरा की धरोहर से आगे बढ़ाकर जनसंवाद और दैनिक व्यवहार की भाषा बनाने के उद्देश्य से संस्कृत भारती के बसंत जनपद ने अपनी आगामी गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की है। 8 अक्टूबर 2026 को भारतीय भाषासमिति, आईआईटी परिसर में आयोजित मासिक गोष्ठी में संस्कृत सप्ताह के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ भाषा-प्रचार, संभाषण शिविरों, व्याकरण-अध्ययन और नगरस्तरीय संगठनात्मक विस्तार पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। गोष्ठी में प्रस्तुत विवरण के अनुसार, आईआईटी दिल्ली में छह, श्रीलाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में नौ तथा जनपद के विभिन्न स्थलों पर 15 संस्कृत शिविर आयोजित किए गए। इन गतिविधियों के बाद अब प्राथमिकता संस्कृत-अध्ययन को नियमित अभ्यास और व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने की है।

इसी उद्देश्य से भारतीय ज्ञान परंपरा कार्यालय (आईकेएस), भीकाजी कामा प्लेस के अर्जुन नगर क्षेत्र में 6 से 28 अक्टूबर तक कार्यालय कर्मचारियों के लिए संस्कृत संभाषण शिविर संचालित किया जा रहा है। इसके मार्गदर्शन का दायित्व श्री मनीष शर्मा, शिक्षण का दायित्व विस्तारक श्री धीरज तथा संगठनात्मक संयोजन की जिम्मेदारी श्री अंबिका दुबे को सौंपी गई है। दूसरी ओर, श्रीलाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में प्रत्येक शुक्रवार शाम पांच बजे साप्ताहिक मिलन आयोजित किया जाएगा। इसमें श्री मनीष शर्मा मार्गदर्शन करेंगे, जबकि यश्वी छात्रा-प्रमुख, श्री पीयूष संयोजक और श्री उद्भव सह-संयोजक की भूमिका निभाएँगे। इस नियमित अभ्यास के माध्यम से संस्कृत के अध्ययन को निरंतरता प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।

भाषा के अध्ययन को अधिक व्यवस्थित और व्याकरणसम्मत बनाने के लिए छंद, कारक, समास और संधि जैसे विषयों पर पृथक अध्ययन-वर्ग आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया। इन वर्गों के मार्गदर्शन का दायित्व श्री अमित कुमार मिश्र, संयोजन श्री मनीष शर्मा तथा सह-संयोजन श्री नरेंद्र भागीरथी को सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त, 24 अक्टूबर शाम पांच बजे से 25 अक्टूबर शाम पांच बजे तक विभागीय अभ्यास वर्ग प्रस्तावित है, जिसके आयोजन-स्थल की सूचना बाद में दी जाएगी। आगामी मासिक गोष्ठी चार नवंबर को आयोजित करने की योजना है, जिसके प्रमुख डॉ. मोहनलाल शर्मा तथा सह-प्रमुख श्री देवेश सकलानी होंगे।

संस्कृत अभियान को शिक्षण संस्थानों से आगे बढ़ाकर विभिन्न क्षेत्रों तक पहुँचाने के लिए नगरस्तर पर भी दायित्व निर्धारित किए गए हैं। मुनीरका में डॉ. कपिलदेव, सरोजनी नगर में डॉ. बृजमोहन, अर्जुन नगर में श्री अंबिका दुबे, मोतीबाग में डॉ. विनय गोपाल तथा रामकृष्णपुरम में डॉ. मोहनलाल शर्मा शिविरों के संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी निभाएँगे। इसी क्रम में मुनीरका में बाल केंद्र संचालित करने पर भी चर्चा हुई। इसके मार्गदर्शन का दायित्व डॉ. खेमराज रेग्मी तथा शिक्षण का दायित्व डॉ. स्वाती और यश्वी को सौंपा गया है। बाल्यावस्था से ही संस्कृत के प्रति रुचि विकसित करने की यह पहल भाषा को नई पीढ़ी से जोड़ने में सहायक हो सकती है।
गोष्ठी में विभाग के अवधानकर्ता एवं प्रांत कार्यालय के कोष-प्रमुख डॉ. देवकीनंदन तथा रामकृष्णपुरम विभाग के संयोजक श्री अमित कुमार मिश्र सहित अन्य दायित्ववान कार्यकर्ता उपस्थित रहे। विचार-विमर्श के उपरांत सभी ने परस्पर सहयोग से संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को अधिक नियमित, व्यापक और प्रभावी बनाने का संकल्प लिया। कल्याण-मंत्र के साथ संपन्न गोष्ठी ने आगामी गतिविधियों की दिशा स्पष्ट की; अब इन योजनाओं की सार्थकता इस बात से निर्धारित होगी कि संस्कृत शिविरों और अध्ययन-वर्गों से जुड़ने वाले लोग भाषा को अपने नियमित अभ्यास और दैनिक संवाद का हिस्सा किस सीमा तक बनाते हैं।