नवरात्र की सप्तमी पर मोहनलालगंज में हजारों छात्र-छात्राओं की सहभागिता से सजी डांडिया नाइट। राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह और मेजर जनरल विक्रम कुमार ने उत्साह, अनुशासन, राष्ट्रभावना तथा लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली। नवरात्र के पावन पर्व पर भक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत समागम उस समय देखने को मिला, जब मोहनलालगंज स्थित वारियर्स डिफेंस कॉलेज में सप्तमी के अवसर पर भव्य गरबा संध्या एवं डांडिया नाइट का आयोजन किया गया। हजारों छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता से सजे इस समारोह में राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह तथा मेजर जनरल विक्रम कुमार की उपस्थिति ने आयोजन को विशिष्ट गरिमा प्रदान की। रंग, संगीत और पारंपरिक नृत्य की लय के बीच विद्यार्थियों ने भारतीय सनातन संस्कृति के प्रति अपनी आस्था और अनुराग व्यक्त किया, वहीं कार्यक्रम ने युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण तथा राष्ट्रनिर्माण के प्रति उत्तरदायित्वबोध का संदेश भी दिया।
समारोह के दौरान मेजर जनरल विक्रम कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए लक्ष्य के प्रति एकाग्रता, दृढ़ संकल्प और निरंतर परिश्रम के महत्त्व पर बल दिया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को सफलता प्राप्त करने के लिए संकल्पित होने की प्रेरणा दी। उनके संबोधन में अनुशासन और लक्ष्यनिष्ठा को जीवन में आगे बढ़ने के महत्त्वपूर्ण आधार के रूप में रेखांकित किया गया। रक्षा क्षेत्र से जुड़े संस्थान में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम ने उत्सवधर्मिता के साथ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में दृढ़ता और कर्तव्यबोध के महत्त्व को भी सामने रखा।
राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह ने भी विद्यार्थियों को पूर्ण ऊर्जा, अनुशासन और समर्पण के साथ अपने निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी। नवरात्र जैसे पर्वों को उन्होंने भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ने का महत्त्वपूर्ण अवसर बताया। गरबा और डांडिया जैसे पारंपरिक आयोजन जहाँ सामूहिक सहभागिता तथा सांस्कृतिक विरासत के प्रति अनुराग को अभिव्यक्त करते हैं, वहीं युवाओं के लिए अपनी जड़ों से जुड़कर भविष्य के निर्माण का संकल्प लेने का अवसर भी प्रदान करते हैं। वारियर्स डिफेंस कॉलेज की यह गरबा संध्या इसी सांस्कृतिक समन्वय, युवा ऊर्जा और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता की जीवंत अभिव्यक्ति बनी।