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विश्व अस्थमा दिवस पर जागरूकता की हुंकार: “सांस है तो जीवन है” का संदेश लेकर सड़कों पर उतरे विशेषज्ञ

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Dainik India News

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विश्व अस्थमा दिवस पर जागरूकता की हुंकार: “सांस है तो जीवन है” का संदेश लेकर सड़कों पर उतरे विशेषज्ञ
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दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ। विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर मिडलैंड चिकित्सालय एवं अनुसंधान संस्थान और सूर्या फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में, सिप्ला कंपनी की सहभागिता से एक व्यापक जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। इस वर्ष भारत सरकार द्वारा विश्व अस्थमा दिवस की थीम “Asthma Education Empowers” (अस्थमा शिक्षा सशक्त बनाती है) रखी गई है, जिसका मूल उद्देश्य लोगों को इस रोग के प्रति जागरूक कर समय रहते पहचान और उपचार के लिए प्रेरित करना है। यही संदेश लेकर यह रैली शहर की सड़कों पर उतरी और आमजन को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का आह्वान करती रही।

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रैली का शुभारंभ मिडलैंड चिकित्सालय से हुआ, जिसे मुख्य अतिथि जितेंद्र प्रताप सिंह (सम्पर्क प्रमुख, संस्कृतभारती पूर्व उत्तर प्रदेश क्षेत्र) ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली कपूरथला क्रॉसिंग, अलीगंज होते हुए ई-पार्क महानगर विस्तार तक पहुँची, जहां इसका समापन हुआ। पूरे मार्ग में प्रतिभागियों ने अस्थमा के लक्षण, बचाव और समय पर इलाज की आवश्यकता से जुड़े संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। आयोजन के मुख्य संयोजक एवं मिडलैंड चिकित्सालय के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक डॉ. बी.पी. सिंह स्वयं इस अभियान का नेतृत्व करते हुए जनसंपर्क में सक्रिय दिखे।

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समापन स्थल ई-पार्क महानगर विस्तार में सिप्ला के सहयोग से एक निःशुल्क चिकित्सीय शिविर का आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जांच कराई और विशेषज्ञ परामर्श प्राप्त किया। डॉ. बी.पी. सिंह ने इस अवसर पर अस्थमा को लेकर महत्वपूर्ण चिकित्सकीय तथ्य साझा करते हुए कहा कि “अस्थमा केवल सांस की बीमारी नहीं, बल्कि जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों से जुड़ा एक जटिल विकार है, जिसे समय रहते पहचानना और नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है।”

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डॉ. सिंह ने जनसामान्य से अपील करते हुए अस्थमा से बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण सावधानियों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि धूल, धुआं, परागकण और प्रदूषण से यथासंभव दूरी बनाए रखें, घर के अंदर साफ-सफाई और वेंटिलेशन का ध्यान रखें, धूम्रपान से पूरी तरह बचें, नियमित रूप से चिकित्सकीय परामर्श लें तथा इनहेलर का सही और नियमित उपयोग करें। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “स्व-चिकित्सा (self-medication) से बचना और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही उपचार लेना ही अस्थमा नियंत्रण की कुंजी है।”

इस अवसर पर जितेंद्र प्रताप सिंह ने डॉ. बी.पी. सिंह और सिप्ला कंपनी द्वारा किए जा रहे इस जनोपयोगी प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि “स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस प्रकार के जागरूकता अभियान समाज को एक नई दिशा देते हैं।” उन्होंने अस्थमा नियंत्रण के लिए भारत सरकार एवं चिकित्सा समुदाय द्वारा किए जा रहे प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सामूहिक प्रयास ही भविष्य में इस गंभीर बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकता है।

उल्लेखनीय है कि वैश्विक स्तर पर अस्थमा से प्रतिवर्ष लगभग छह लाख लोगों की मृत्यु होती है, जिनमें से करीब ढाई लाख मौतें भारत में होती हैं—जो कि अत्यंत चिंताजनक स्थिति को दर्शाती हैं। ऐसे में इस प्रकार की जागरूकता रैलियां न केवल लोगों को प्रारंभिक लक्षणों की पहचान के लिए प्रेरित करती हैं, बल्कि समय पर जांच और उपचार की दिशा में भी एक सशक्त कदम साबित होती हैं।

यह आयोजन एक संदेश देकर समाप्त हुआ—“सजगता ही सुरक्षा है, और सही जानकारी ही अस्थमा पर विजय का सबसे बड़ा हथियार।”

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