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अब बुजुर्गों को नहीं करानी पड़ेगी सर्जरी

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Dainik India News

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अब बुजुर्गों को नहीं करानी पड़ेगी सर्जरी

बिना सर्जरी के भी बदल सकते हैं हृदय वाल्व

उदय राज
डी डी इंडिया न्यूज़

लखनऊ :

चिकित्सा विज्ञान के आविष्कार नित नये आयाम स्थापित कर रहे हैं। उसकी वजह से बहुतसे बुजुर्गों के जीवनस्तर को उठाने में बहुत मदद मिल रही है। इसी क्रम में एक नये अविष्कार ने बुजुर्ग मरीजों को सर्जरी से मुक्ति दे दी है।

अब मरीजों के ह्रदय के वाल्व की सिकुड़न यानी कि एरोटा स्टेनोसिस नामक बीमारी के लिए ओपन हार्ट सर्जरी की जरूरत नहीं होगी। एरोटा वाल्व को बिना ऑपरेशन के केवल पैर की नस में छोटा सा चीरा लगाकर बदल सकते है।

सहारा हॉस्पिटल के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर गौतम स्वरूप ने 68 वर्षीय बुजुर्ग शाहवेज अहमद का बिना ऑपरेशन के हृदय का मुख्य वाल्व जिसे एरोटिक वाल्व कहते हैं, बदलकर नया जीवन दिया। इस प्रक्रिया को टावर यानि टावी कहते हैं।

डॉक्टर स्वरूप ने बताया कि शाहवेज अहमद जी को थोड़ा-सा भी चलने पर सांस फूलती थी, थकान हो जाती थी एवं चक्कर भी आ जाते थे। यह समस्या उनको विगत लगभग 3 साल से थी और लगातार बढ़ रही थी। कई चिकित्सकों से संपर्क करने के बाद ही पता चला कि उनके हृदय का मुख्य वाल्व जिसको एरोटिक वॉल्व कहते हैं, सिकुड़ चुका है, जिससे शरीर के सभी हिस्सों में खून का प्रवाह कम होने से यह समस्या उत्पन्न हो रही है।

इसके लिए उन्होंने दिल्ली, मुम्बई व गुजरात के बड़े अस्पतालों से परामर्श लिया तो उन्हें इसके लिए ओपन हार्ट सर्जरी से वाल्व बदलवाने की सलाह दी गयी, परन्तु वह जटिल ऑपरेशन यानी कि सर्जरी से वाल्व नहीं बदलवाना चाहते थे।

इसके लिए उन्होंने लखनऊ में सहारा हॉस्पिटल के प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर गौतम स्वरूप से सम्पर्क किया।
डॉ.स्वरूप जोकि मरीज के हृदय के वाल्व बदलने के विशेषज्ञ हैं, उन्होंने टावी यानि टावर विधि से मरीज का एरोटिक वाल्व सिर्फ 1 घंटे की प्रक्रिया में बिना बेहोश किये बदल दिया।

डॉक्टर स्वरूप ने बताया कि एरोटिक स्टेनोसिस नामक बीमारी बहुत धीरे-धीरे बढ़ती है, जिससे शुरुआती लक्षण पता नहीं चलते हैं परन्तु लक्षणों के आने के बाद आगे का जीवन बहुत कम हो जाता है एवं अकस्मात मृत्यु होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। अब तक इसका इलाज ओपन हार्ट सर्जरी से होता था परन्तु बहुत से बुजुर्ग अधिक उम्र की वजह से सर्जरी से वाल्व नहीं बदलवा पाते थे। टावर ऐसे मरीजों के लिए वरदान है, जिसमें हॉस्पिटल में रुकना भी कम पड़ता है और मरीज की आंखों के सामने ही उसका वाल्व बदल दिया जाता है।
सहारा हॉस्पिटल पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक टावी यानि टावर विधि से करने वाला प्राइवेट अस्पताल है।

सहारा इंडिया परिवार के वरिष्ठ सलाहकार अनिल विक्रम सिंहजी ने बताया कि हमारे अभिभावक सहाराश्री जी ने लखनऊ को विश्व स्तरीय हॉस्पिटल प्रदान किया है जहां अत्याधुनिक कार्डियक विभाग, अति कुशल चिकित्सकों के साथ एवं अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है। अब मरीजों को मुंबई या दिल्ली जाने की आवश्यकता नहीं है।
सहाराश्री जी की प्रेरणा से समय-समय पर हॉस्पिटल को आधुनिकीकरण की तरफ ले जाते हुए नयी-नयी विधाओं का इस्तेमाल कर मरीजों को लाभान्वित किया जा रहा है।

बाक्स ****
टी आर वी (टावी) तकनीक के लाभ

· सर्जरी की जरूरत नहीं

· मरीज जल्द ठीक, अस्पताल में कम (२-३ दिन) रहना पड़ेगा

· कोई बेहोशी / एनेस्थीसिया नहीं

· बेहतर जिंदगी

· छाती पर घाव नहीं

· दिल पहले से बेहतर काम करेगा


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