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गंदे पानी की सप्लाई से उपभोक्ताओं में उबाल

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Dainik India News

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गंदे पानी की सप्लाई से उपभोक्ताओं में उबाल

निजी कंपनी की मनमानी, बच्चों-बुज़ुर्गों की सेहत से खिलवाड़ – प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ, अलीगंज :शहर में स्वच्छ पेयजल की भारी मांग के बीच सप्लाई हो रहे पानी की गुणवत्ता को लेकर बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। अलीगंज सेक्टर एम के निवासियों ने खुलासा किया है कि एक निजी कंपनी प्लास्टिक कंटेनरों के ज़रिये गंदा और अस्वच्छ पानी सप्लाई कर रही है, जिससे लोगों की जान पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

पीड़ित ग्राहकों का कहना है कि जब उन्होंने सप्लायर से गंदे पानी की शिकायत की तो उसने गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए उल्टा ग्राहकों पर ही दोष मढ़ दिया और कहा – “गंदगी तुम्हारे बर्तन में होगी।” इस जवाब ने स्थानीय लोगों के आक्रोश को और भी बढ़ा दिया है।

दोहरा नाम, गुमराह करने की साज़िश

ग्राहक बताते हैं कि शिकायत के बाद कंपनी मालिक ने भी नाम छुपाकर सभी को गुमराह करने की कोशिश की। आरोप है कि वह खुद को कमल हसन की जगह ‘कमल’ बताता रहा। इस तरह नाम और पहचान छुपाने को लोग सीधे तौर पर एक साज़िश मान रहे हैं। उनका कहना है कि जब कंपनी और उसके अधिकारी अपनी असली पहचान तक छुपा रहे हैं, तब आम जनता उनके पानी की शुद्धता पर कैसे भरोसा करे?

जनस्वास्थ्य पर बड़ा खतरा

चौंकाने वाली बात यह है कि यह अस्वच्छ पानी सबसे ज़्यादा बच्चों और बुज़ुर्गों की सेहत पर हमला कर रहा है। डॉक्टर चेतावनी दे चुके हैं कि गंदा या दूषित पानी डायरिया, पीलिया, टाइफाइड और पेट के संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियाँ फैलाता है। स्थानीय लोग दहशत और चिंता में हैं क्योंकि उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अब पीने का पानी itself शंका के घेरे में आ चुका है।

उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन

लोगों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल लापरवाही नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों और मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन हैं। “पानी जीवन का आधार है और जब कोई निजी कंपनी मुनाफे के लालच में हमें गंदा पानी पिलाने लगे तो यह अपराध से कम नहीं।” – एक स्थानीय निवासी का बयान।

प्रशासन से कड़ी चेतावनी की उम्मीद

ग्राहकों ने प्रशासन से साफ शब्दों में कहा है कि अब केवल जांच की औपचारिकता से काम नहीं चलेगा।

निजी कंपनियों पर तुरंत लगाम लगाई जाए।

गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर संबंधित कंपनी के मालिक और सप्लायर पर कार्रवाई की जाए।

सभी निजी पानी सप्लाई कंपनियों की व्यापक जांच कराई जाए।

यदि प्रशासन ने शीघ्र कदम नहीं उठाए तो क्षेत्रवासी चेतावनी दे रहे हैं कि वे आंदोलन करने और सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

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