ब्रेकिंग न्यूज़
मोदी के जन्मदिन पर गोमती तट पर उतरेगा भोजपुरी समाज | सड़क किनारे कचरे का पहाड़ देख हाईकोर्ट सख्त, नगर निगम को स्थायी समाधान का आदेश | ₹5 लाख का इलाज, ₹5 लाख की कल्याण निधि, 900 नई अदालतें—योगी ने खोला न्याय का नया अध्याय | पद्मश्री डॉ. एस. सी. राय की धर्मपत्नी श्रीमती मधु राय का निधन, शोक की लहर | हिंदी केवल भाषा नहीं, भारत की आत्मा का स्वर है—अब इसे जीवन और व्यवस्था की भाषा बनाने का समय | जिस दिन भारत अपनी हिंदी को भूल जाएगा, उसी दिन अपनी आत्माभिव्यक्ति का एक अध्याय खो देगा—अजय दीप सिंह IAS | हिंदी सिर्फ भाषा नहीं, भारत की आत्मा की आवाज है—अब राजभाषा को राजकाज की धड़कन बनाने का समय -अजय दीप सिंह | महज भूमि विवाद से नहीं बनता जातिगत अपराध, SC/ST Act की धारा 3(1)(r) के लिए जातिगत अपमान का प्रथमदृष्टया आधार अनिवार्य | मोदी के जन्मदिन पर गोमती तट पर उतरेगा भोजपुरी समाज | सड़क किनारे कचरे का पहाड़ देख हाईकोर्ट सख्त, नगर निगम को स्थायी समाधान का आदेश | ₹5 लाख का इलाज, ₹5 लाख की कल्याण निधि, 900 नई अदालतें—योगी ने खोला न्याय का नया अध्याय | पद्मश्री डॉ. एस. सी. राय की धर्मपत्नी श्रीमती मधु राय का निधन, शोक की लहर | हिंदी केवल भाषा नहीं, भारत की आत्मा का स्वर है—अब इसे जीवन और व्यवस्था की भाषा बनाने का समय | जिस दिन भारत अपनी हिंदी को भूल जाएगा, उसी दिन अपनी आत्माभिव्यक्ति का एक अध्याय खो देगा—अजय दीप सिंह IAS | हिंदी सिर्फ भाषा नहीं, भारत की आत्मा की आवाज है—अब राजभाषा को राजकाज की धड़कन बनाने का समय -अजय दीप सिंह | महज भूमि विवाद से नहीं बनता जातिगत अपराध, SC/ST Act की धारा 3(1)(r) के लिए जातिगत अपमान का प्रथमदृष्टया आधार अनिवार्य |
हाइलाइट न्यूज़
संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं की जननी है: अमित शाह पुलिस और प्रशासन 24x7 अलर्ट मोड में रहे:सीएम योगी आदित्यनाथ <em>संस्कृतभारती अवधप्रान्त के साप्ताहिक मिलन वर्ग का हुआ उद्घाटन</em> संस्कृत भारती न्यास की क्रांति सेना ने शहीद चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि मनाई उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की शांति भंग की आशंका में 25 व्यक्ति तथा एक वारंटी अभियुक्त गिरफ्तार शॉर्ट सर्किट से लगी आग, रिहायशी मकान जलकर हुई खाक चार साल में 378 नौकरी देने वाले भी देख रहे यूपी का ख्‍वाब: सिद्धार्थ नाथ सिंह संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं की जननी है: अमित शाह पुलिस और प्रशासन 24x7 अलर्ट मोड में रहे:सीएम योगी आदित्यनाथ <em>संस्कृतभारती अवधप्रान्त के साप्ताहिक मिलन वर्ग का हुआ उद्घाटन</em> संस्कृत भारती न्यास की क्रांति सेना ने शहीद चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि मनाई उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की शांति भंग की आशंका में 25 व्यक्ति तथा एक वारंटी अभियुक्त गिरफ्तार शॉर्ट सर्किट से लगी आग, रिहायशी मकान जलकर हुई खाक चार साल में 378 नौकरी देने वाले भी देख रहे यूपी का ख्‍वाब: सिद्धार्थ नाथ सिंह
ताज़ा खबर English

मोमबत्ती नहीं, मशालों का प्रज्ज्वलन चाहिए: सनातन के वीरों की पुकार

D

Dainik India News

5684 views
मोमबत्ती नहीं, मशालों का प्रज्ज्वलन चाहिए: सनातन के वीरों की पुकार

मोमबत्ती नहीं, मां दुर्गा की तलवार, परशुराम का फरसा और महादेव का त्रिशूल चाहिए -कुलदीप तिवारी

दैनिक इंडिया न्यूज़, 27 अप्रैल 2025।आज देशभर में पहलगाम की दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर कैंडल मार्च निकाले जा रहे हैं। लेकिन यह मोमबत्ती जलाना कहीं न कहीं एक निष्क्रियता की पहचान बनती जा रही है। सनातन संस्कृति ने कभी भी विरोध प्रदर्शन में कायरता नहीं दिखाई। जब-जब अन्याय हुआ, तब-तब हमारे पूर्वजों ने शंखध्वनि की, मशालें जलाईं और अपने शस्त्रों का प्रदर्शन कर शत्रुओं के हृदय कंपा दिए।

महाभारत में भी जब युद्ध प्रारंभ होता था, तो दीप नहीं जलते थे — शंख बजते थे, रणभेरी बजती थी। वीरों का सिंहनाद आकाश को चीर देता था। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है:

"शूरवीर के पग से धरा भी कांपे,
रण में शंखनाद से शत्रु भी थर्राए।"

सनातन परंपरा में दीपक ध्यान के लिए जलाया जाता है, युद्ध के लिए नहीं। युद्ध के समय मशालों की ज्वाला उठती थी, तलवारें चमकती थीं और रणभूमि में सिंह जैसे गर्जन करते वीर निकलते थे। हमें भी इसी परंपरा का पालन करना चाहिए। मोमबत्ती जलाने से दुश्मनों के हौसले नहीं टूटते, इसके लिए हमें अपने शौर्य और बलिदान की परंपरा को पुनः जीवंत करना होगा।

आज जरूरत है कि हम कायरता का प्रतीक मोमबत्ती नहीं, बल्कि साहस का प्रतीक मशालें जलाएँ। हमें अपने झंडों के साथ फ़्लैग मार्च करना चाहिए, अपने भीतर सोए हुए वीर रस को जगाना चाहिए। जिस प्रकार सेना अपने पराक्रम का प्रदर्शन करती है, उसी तरह जनता को भी एकजुट होकर शक्ति का परिचय देना चाहिए।

वीर रस से ओतप्रोत यह दोहा आज हर भारतीय के हृदय में धधकना चाहिए:

"चढ़ जा रण में वीर पुरुष, शंखनाद कर जोर,
शत्रु मचल उठे भयभीत हो, थर-थर कांपे चोर।"

पाकिस्तान की कायराना हरकतों के विरुद्ध हमें कड़ी प्रतिक्रिया देनी चाहिए। हमारे सैनिक सीमा पर अपने शौर्य से शत्रुओं को धूल चटा रहे हैं। हमें भी उनके हौसले को सलाम करते हुए अपने भीतर वही ज्वाला जगानी चाहिए जो दुश्मन के हौसले पस्त कर दे।

"जागो भारत के वीर सपूतो, मसाले हाथ में लो,
क्रोध की ज्वाला से शत्रु को, पैरों तले रौंद दो।"-

आज का समय कैंडल मार्च का नहीं, आत्मगौरव और शक्ति प्रदर्शन का है। आइए, अपने सनातन संस्कारों को जीवित करें और रणभूमि की पुकार पर वीरता का उत्तर दें। अब मोमबत्तियाँ नहीं, अब मसालों की आग चाहिए!

फोटो गैलरी

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहले टिप्पणी करें!