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राजधानी में पुनः आलोकित हुआ सौहार्द का दिव्य उत्सव

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Dainik India News

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राजधानी में पुनः आलोकित हुआ सौहार्द का दिव्य उत्सव

श्रद्धेय लालजी टंडन (बाबूजी)द्वारा प्रतिष्ठित परंपरा में पुनः खिला होली मिलन का अनुपम अध्याय

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ।राजधानी लखनऊ की सांस्कृतिक चेतना उस समय पुनः भावविभोर हो उठी, जब वर्षों से अविरल रूप से प्रवहमान श्रद्धेय लालजी टंडन द्वारा प्रतिष्ठित होली मिलन की गौरवशाली परंपरा ने एक बार फिर समूचे नगर को स्नेह, सौहार्द और सामाजिक समरसता के अनुपम रंगों से अभिसिंचित कर दिया। यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, अपितु मानवीय आत्मीयता, सांस्कृतिक एकात्मता और लखनऊ की गंगा-जमुनी परंपरा का सजीव एवं प्रेरणास्पद प्रतीक बनकर उपस्थित हुआ।

समारोह का वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो विविध समाज-स्तरों की भावनाएँ एक ही सूत्र में संयोजित होकर एक विराट आत्मीय परिवार का रूप धारण कर चुकी हों।
वर्षों पूर्व श्रद्धेय लालजी टंडन ने इस परंपरा का आरंभ केवल उत्सवी उल्लास के लिए नहीं, बल्कि समाज के विविध वर्गों के मध्य आत्मीयता का सेतु निर्मित करने की पवित्र भावना से किया था। समय की अनवरत धारा में अनेक परिवर्तन आए, किंतु इस परंपरा का प्राणतत्व अक्षुण्ण बना रहा। उनके सुपुत्र स्वर्गीय आशुतोष टंडन ने अपने विनम्र, सहज और जनसंपर्कशील व्यक्तित्व के माध्यम से इस परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनके असामयिक स्वर्गवास के उपरांत यह स्वाभाविक जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि क्या यह सांस्कृतिक परंपरा उसी गरिमा के साथ आगे बढ़ सकेगी; किंतु समय ने यह सिद्ध कर दिया कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक धरोहर है।

स्वर्गीय गोपाल जी टंडन की पावन स्मृतियों को नमन करते हुए टंडन परिवार ने इस परंपरा की ज्योति को अविराम बनाए रखा। इस वर्ष आयोजन का दायित्व संभालते हुए अमित टंडन ने जिस निष्ठा, विनम्रता और आत्मीय भाव से समूचे नगर को इस उत्सव में सहभागी बनाया, वह स्वयं में अनुकरणीय उदाहरण बन गया। समारोह स्थल पर प्रवेश करते ही ऐसा प्रतीत होता था मानो स्नेह, सद्भाव और आत्मीयता की अदृश्य सरिता प्रवाहित हो रही हो, जिसमें प्रत्येक आगंतुक स्वयं को सहज ही आत्मविभोर अनुभव करता था।

कार्यक्रम के आरंभ में श्रद्धेय लालजी टंडन तथा स्वर्गीय गोपाल जी टंडन के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उपस्थित जनसमूह ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। उस क्षण का वातावरण अत्यंत श्रद्धामय, भावपूर्ण और गरिमामंडित था—मानो स्मृतियों के आलोक में उनके व्यक्तित्व की तेजस्वी छवि पुनः सजीव हो उठी हो। श्रद्धांजलि के उपरांत प्रारंभ हुआ होली मिलन का उल्लासपूर्ण क्रम, जिसमें गुलाल की सुगंध, परस्पर आलिंगन और मंगलकामनाओं की मधुर अभिव्यक्तियों ने समूचे वातावरण को हर्षोल्लास से परिपूर्ण कर दिया।

क्रमशः यह आयोजन केवल उत्सव का स्वरूप न रहकर सामाजिक समरसता का जीवंत मंच बन गया। नगर के विभिन्न भागों से आए लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल अर्पित कर यह संदेश दिया कि होली का वास्तविक स्वरूप केवल रंगोत्सव नहीं, बल्कि हृदयों के मध्य विद्यमान दूरियों का परिमार्जन कर आत्मीयता का सेतु निर्मित करना है। उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति इस अनुभूति से अभिभूत था कि लखनऊ की सांस्कृतिक आत्मा आज भी उतनी ही प्रखर और जीवंत है जितनी वह अपने गौरवपूर्ण अतीत में थी।
समारोह के समापन क्षणों में यह भाव अत्यंत स्पष्टता से उभरकर सामने आया कि टंडन परिवार द्वारा निरंतर संचालित यह परंपरा केवल सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि राजधानी की सांस्कृतिक चेतना का अमूल्य अध्याय है। जब तक ऐसे आयोजन समाज को जोड़ते रहेंगे, तब तक आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समन्वय की यह ज्योति कभी मंद नहीं पड़ेगी और लखनऊ की सांस्कृतिक गरिमा निरंतर आलोकित होती रहेगी।

इस गरिमामय अवसर पर विधायक योगेश शुक्ल, भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, विधायक ओपी श्रीवास्तव,भाजपा नेता आशीष श्रीवास्तव, मंडल अध्यक्ष नरेंद्र सिंह देवड़ी, वरिष्ठ भाजपा नेता दीपक तिवारी, लोहिया नगर के पार्षद राकेश मिश्रा, वरिष्ठ भाजपा नेता राजा मिश्रा, कृष्ण कुमार सिंह, रक्षा मंत्री कार्यालय के विशेष कर्तव्याधिकारी के.पी. सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार तथा पूर्व अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी, भाजपा नेता रवि सिंह सहित नगर के अनेक प्रतिष्ठित एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। उपस्थित सभी जनों ने परस्पर गुलाल अर्पित कर एक-दूसरे को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं तथा यह संकल्प व्यक्त किया कि यह गौरवशाली परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक सामाजिक समरसता, सौहार्द और सांस्कृतिक एकात्मता का संदेश देती रहेगी।

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