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संविधान के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर बोले मुख्यमंत्री

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संविधान के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर बोले मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने 75वें गणतंत्र दिवस पर अपने सरकारी आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया

दैनिक इंडिया न्यूज, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 75वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आज यहां अपने सरकारी आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर उन्होंने मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीदों तथा देशभक्तों को नमन करते हुए भारतीय संविधान के निर्माताओं को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आजादी की लम्बी लड़ाई के उपरांत आज ही के दिन सन् 1950 में स्वतंत्र भारत में संविधान लागू हुआ था। भारत का संविधान दुनिया के सबसे बड़े संविधानों में से एक है। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, संविधानविदों व विशेषज्ञों के सम्मिलित प्रयासों के अनुसार जिस संविधान को देश में लागू किया गया, वह विगत 74 वर्षों से भारत में जाति, मत, सम्प्रदाय, क्षेत्र के आधार पर भेदभाव तथा तमाम अन्य अवरोधों को पूरी तरह समाप्त करते हुए अपनी कसौटी पर खरा उतरा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में आजादी का आंदोलन चलाया गया। भारत माता के महान सपूतों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। स्वतंत्रता के पश्चात देश अपने संविधान निर्माण के लिए आगे बढ़ा। डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद ने सभी संविधानविदों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा विशेषज्ञों के साथ मिलकर संविधान को स्वरूप प्रदान करने तथा संविधान सभा की विभिन्न बैठकों में मतभिन्नता के बावजूद सर्व सहमति बनाने का अभिनन्दनीय प्रयास किया था। सभी विशेषज्ञों के अनुसार संविधान का ड्राफ्ट तैयार कर वर्तमान स्वरूप देने का श्रेय बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर जैसे महापुरुष को जाता है। इन महापुरुषों ने जिस प्रतिबद्धता और तत्परता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया, वह हम सभी के लिए अनुकरणीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा संविधान सर्वोपरि तथा अनेक उपलब्धियों से भरा हुआ है। संविधान हमें अधिकार प्रदान करने के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी आग्रही बनाता है। ‘हर काम, देश के नाम’ अर्थात हम सभी का प्रत्येक कार्य देश के लिए होना चाहिए। यदि हम दुनिया के इस प्राचीनतम राष्ट्र के प्रति श्रद्धा और सम्मान के भाव को व्यक्त करते हैं, तो देश में प्रत्येक व्यक्ति, जाति, मत, मजहब व सम्प्रदाय स्वयं को सुरक्षित महसूस करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अमृत महोत्सव वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आगामी 25 वर्षों की एक व्यापक कार्य योजना को लेकर आगे बढ़ने के लिए देशवासियों का आह्वान किया था। यदि हम सभी अपने संकल्प को जमीनी धरातल पर उतारने के लिए आगामी 25 वर्षों में अपने कर्तव्यों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करते हैं, तो वर्ष 2047 तक भारत दुनिया के विकसित देशों की श्रृंखला में खड़ा होगा। प्रत्येक भारतवासी न केवल अपने देश और प्राचीन विरासत के प्रति गौरव की अनुभूति कर रहा होगा, बल्कि अपने वर्तमान को सुखद और सुंदर बनाने के साथ ही, भविष्य को उज्ज्वल बनाने के प्रति पूरी तरह आशान्वित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के उपरान्त आज हमें भारत के संविधान को लागू करने के अमृत महोत्सव वर्ष में सहभागी बनने का अवसर प्राप्त हुआ है। संविधान के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर हम लोग आजादी को अक्षुण्ण बनाए रख सकते हैं तथा भारत को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत के रूप में स्थापित करने में अपना योगदान दे सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में आधुनिक लोकतंत्र के रूप में स्वयं को स्थापित करने वाले तमाम देशों, जो स्वयं को आज की व्यवस्था के अनुसार सबसे प्रगतिशील मानते हैं, ने लम्बे समय तक लिंग भेद के आधार पर महिलाओं को मताधिकार से वंचित किया था। अनेक दबी-कुचली परम्पराओं को समाज तथा राष्ट्र की मुख्य धारा से अलग किया था। भारत दुनिया का वह देश है, जिसने संविधान लागू करने के साथ ही इस बात को सुनिश्चित किया कि भारत में लिंग, जाति, मत, मजहब व क्षेत्र आदि के आधार पर किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होगा। भारत के संविधान ने प्रत्येक वयस्क मतदाता को मताधिकार का प्रयोग करने तथा देश में सरकार का चयन करने का पूरा अधिकार दिया।
इस अवसर पर शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी व समाज के जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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