71वें वर्ष में प्रवेश पर लखनऊ की ट्रांसगोमती शाखा में समारोह; जितेन्द्र प्रताप सिंह ने साझा किए एलआईसी से 50 वर्षों के जुड़ाव के अनुभव, गोल्डन जुबली सीएसआर फंड से बन रहा ‘श्री राम आयुष चिकित्सालय एवं अनुसंधान संस्थान’, 10 सितंबर को प्रस्तावित उद्घाटन

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।सात दशक पूरे कर 71वें वर्ष में प्रवेश कर रहा भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अब अपनी भूमिका को बीमा सुरक्षा से आगे सामाजिक सरोकारों तक विस्तारित करने की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। लखनऊ की ट्रांसगोमती शाखा में एलआईसी के 70 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित समारोह में जहां निगम की दीर्घ यात्रा और बीमा बाजार में उसकी स्थिति पर चर्चा हुई, वहीं गोल्डन जुबली सीएसआर फंड के माध्यम से लखनऊ में निर्माणाधीन ‘श्री राम आयुष चिकित्सालय एवं अनुसंधान संस्थान’ को सामाजिक उत्तरदायित्व की महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने रखा गया। कार्यक्रम में बताया गया कि संस्थान का उद्घाटन 10 सितंबर 2026 को एलआईसी के प्रबंध निदेशक रत्नाकर पटनायक द्वारा किया जाएगा।

समारोह के मुख्य अतिथि जितेन्द्र प्रताप सिंह, नेशनल फेडरेशन ऑफ इंश्योरेंस फील्ड वर्कर्स ऑफ इंडिया, नार्थ सेंट्रल जोन के पूर्व क्षेत्रीय सचिव एवं संस्कृतभारती, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सम्पर्क प्रमुख, ने एलआईसी की सात दशक की यात्रा को अपने व्यक्तिगत अनुभवों से जोड़ा। उन्होंने बताया कि उनका स्वयं का एलआईसी से जुड़ाव 50 वर्षों का है और इस अवधि में निगम की यात्रा को करीब से देखना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा है। लेकिन उनके संबोधन का महत्व केवल स्मृतियों तक सीमित नहीं रहा; उन्होंने एलआईसी की वर्तमान भूमिका और सामाजिक दायित्व का व्यापक परिप्रेक्ष्य भी सामने रखा।

यहीं से समारोह की चर्चा बीमा कारोबार से आगे निकलकर उस प्रश्न तक पहुंची कि किसी बड़े वित्तीय संस्थान का सामाजिक उत्तरदायित्व व्यवहार में किस रूप में दिखाई देता है। इसका उत्तर सिंह ने एलआईसी के गोल्डन जुबली सीएसआर फंड के माध्यम से लखनऊ में बन रहे आयुष संस्थान के रूप में सामने रखा। उन्होंने बताया कि निगम शहर में ‘श्री राम आयुष चिकित्सालय एवं अनुसंधान संस्थान’ का निर्माण करा रहा है।

उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्घाटन 10 सितंबर 2026 को एलआईसी के प्रबंध निदेशक रत्नाकर पटनायक द्वारा किया जाएगा। सिंह ने इस सामाजिक कार्यक्रम में एलआईसी से जुड़े साथियों, सहभागियों और पॉलिसीधारकों को आमंत्रित भी किया। इस पहल ने समारोह के केंद्र में एक ऐसा विषय ला दिया, जो बीमा कारोबार की पारंपरिक सीमाओं से बाहर स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़ा है।

समारोह में एलआईसी की दावा-निपटान व्यवस्था का भी उल्लेख हुआ। कार्यक्रम का संचालन कर रहे गौतम हलधर ने कहा कि वर्तमान परिवेश में दावा निपटान के मामले में एलआईसी सर्वश्रेष्ठ है और लगभग 99 प्रतिशत दावों का समयपूर्व निपटारा करती है। उन्होंने दावा किया कि इसमें ट्रांसगोमती शाखा अग्रणी भूमिका निभा रही है। यह आंकड़ा कार्यक्रम में वक्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया दावा है और प्रेस नोट में इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र सांख्यिकीय दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया है।

ट्रांसगोमती शाखा की उपलब्धियों में बैंक एश्योरेंस अधिकारी मनीष का प्रदर्शन भी चर्चा में रहा। कार्यक्रम में बताया गया कि उन्होंने पूरे राष्ट्र में प्रथम स्थान प्राप्त कर कीर्तिमान स्थापित किया है। शाखा के अधिकारियों और अभिकर्ताओं ने उनकी उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी। इस उपलब्धि ने समारोह में संस्थागत उपलब्धियों के साथ व्यक्तिगत प्रदर्शन को भी स्थान दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जितेन्द्र प्रताप सिंह और वरिष्ठ शाखा प्रबंधक द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। वरिष्ठ शाखा प्रबंधक मिश्र ने एलआईसी के इतिहास और यात्रा पर स्वरचित काव्य प्रस्तुत किया। शाखा के अधिकारी, कर्मचारी और अभिकर्तागण कार्यक्रम में उपस्थित रहे और निगम की 70 वर्ष की यात्रा के अवसर पर एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।
एलआईसी के 70 वर्ष पूरे होने का यह आयोजन महज एक वर्षगांठ समारोह बनकर नहीं रहा। इसमें एक ओर सात दशक की संस्थागत यात्रा, बीमा बाजार में निगम की स्थिति और दावा-निपटान व्यवस्था का उल्लेख हुआ, तो दूसरी ओर ‘श्री राम आयुष चिकित्सालय एवं अनुसंधान संस्थान’ के माध्यम से सामाजिक उत्तरदायित्व का एक नया आयाम सामने आया। 71वें वर्ष में प्रवेश कर रहे एलआईसी के लिए अब उसकी पुरानी विरासत के साथ ऐसी पहलों का विस्तार ही यह तय करेगा कि सात दशक का संस्थागत विश्वास आने वाले वर्षों में किस नई भूमिका में दिखाई देता है।