जनसुनवाई में खुली रिकॉर्ड रूम की अव्यवस्था, जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं
दैनिक इंडिया न्यूज, मऊ ।कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में बुधवार को उस समय प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई, जब एक सामान्य प्रतीत होने वाला मांग पत्र बड़े प्रशासनिक सवालों का कारण बन गया। शिकायतकर्ता द्वारा समय से अभिलेख उपलब्ध न कराए जाने की बात जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन के समक्ष रखी गई तो उन्होंने मामले को महज औपचारिक शिकायत मानकर टालने के बजाय तत्काल गंभीरता से लिया। प्रारंभिक जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि रिकॉर्ड रूम में अभिलेखों के रखरखाव और उपलब्धता को लेकर लंबे समय से लापरवाही बरती जा रही थी।
जिलाधिकारी ने संबंधित आरआरके को तत्काल तलब कर पत्रावलियों के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी। पूछताछ के दौरान जवाबों में स्पष्टता का अभाव और फाइलों के रखरखाव में शिथिलता सामने आने लगी। जैसे-जैसे मामले की परतें खुलती गईं, वैसे-वैसे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते चले गए। जिलाधिकारी ने तीखे शब्दों में कहा कि जनता से जुड़े मामलों में देरी केवल लापरवाही नहीं, बल्कि शासन की छवि को धूमिल करने वाली प्रवृत्ति है।
मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी दीपक सिंह को रिकॉर्ड रूम का स्थलीय निरीक्षण करने भेजा गया। निरीक्षण के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। कई अभिलेख अव्यवस्थित पाए गए, फाइलों के रखरखाव में मानकों की अनदेखी दिखी और जरूरी दस्तावेजों की उपलब्धता में भारी विलंब की स्थिति उजागर हुई। जांच में यह भी सामने आया कि रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली लंबे समय से उपेक्षा का शिकार बनी हुई थी।
सूत्रों के अनुसार रिकॉर्ड रूम में अभिलेखों का समुचित वर्गीकरण न होने के कारण आवश्यक दस्तावेज खोजने में अनावश्यक विलंब हो रहा था। इससे न केवल आम नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ रही थी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों की गति भी प्रभावित हो रही थी। जनहित से जुड़े मामलों में ऐसी लापरवाही को जिलाधिकारी ने अत्यंत गंभीर माना और संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासकीय अभिलेख केवल कागजों का संग्रह नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की विश्वसनीयता का आधार होते हैं। यदि अभिलेखों का रखरखाव ही अव्यवस्थित होगा तो पारदर्शिता और सुशासन की अवधारणा प्रभावित होगी। उन्होंने रिकॉर्ड रूम की व्यवस्था को तत्काल सुधारने, अभिलेखों के व्यवस्थित संरक्षण और समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रकरण को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित आरआरके सहित कुल पांच कर्मचारियों का वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने के निर्देश जारी कर दिए। साथ ही चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी भी स्तर पर शासकीय कार्यों में शिथिलता या जनता से जुड़े मामलों में लापरवाही पाई गई तो कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी की इस सख्त कार्रवाई के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में पूरे दिन चर्चा का माहौल बना रहा। प्रशासनिक अमले में यह संदेश स्पष्ट रूप से पहुंच गया कि अब जनहित से जुड़े मामलों में देरी और लापरवाही पर सीधे जवाबदेही तय होगी।