दैनिक इंडिया न्यूज़ नई दिल्ली। धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़े मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में संक्षिप्त सुनवाई हुई। मामले की सूची में यह प्रकरण क्रमांक 177 पर सूचीबद्ध था। सुबह लगभग साढ़े दस बजे से कुछ पहले मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने मामले को आज ही सुने जाने का अनुरोध किया।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तत्काल सुनवाई योग्य अर्जेंट मामला नहीं मानते हुए अगली सुनवाई के लिए 29 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। न्यायालय ने सभी पक्षों को अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद उन दलीलों पर जवाब दाखिल करने के लिए अगले दो सप्ताह का समय निर्धारित किया गया है। इसके पश्चात मामले को 29 अक्टूबर को सुनवाई के लिए रखा जाएगा।
नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान को लेकर विवाद
भोजशाला प्रकरण में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इससे पहले जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अंतिम सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए अंतरिम स्तर पर विवादित परिसर में पूर्व व्यवस्था बहाल करने से इनकार किया था तथा मुस्लिम पक्ष के लिए परिसर के समीप वैकल्पिक स्थान पर शुक्रवार की नमाज की व्यवस्था के निर्देश दिए थे।
30 जुलाई के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए खसरा संख्या 596 में स्थान निर्धारित किया था। हालांकि क्षेत्रीय प्रशासन की ओर से उस स्थान पर नमाज की व्यवस्था में समस्या बताए जाने के बाद भोजशाला के बगल की जमीन पर खसरा संख्या 612 में नमाज पढ़ने की व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था का हिंदू समुदाय की ओर से पुरजोर विरोध किया जा रहा है।
‘भोजशाला के आसपास नमाज से रास्ता बाधित होता है’—कुलदीप तिवारी
हिंदू पक्ष के प्रमुख याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी ने आज की न्यायालयीन कार्यवाही की जानकारी देते हुए कहा कि अब सभी पक्षों को अपनी दलीलें और उनके जवाब प्रस्तुत करने के लिए निर्धारित समय दिया गया है। उनके अनुसार, 29 अक्टूबर की सुनवाई इस मामले की आगे की न्यायिक दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।
कुलदीप तिवारी ने कहा कि भोजशाला परिसर के आसपास नमाज पढ़ने से भोजशाला आने-जाने वाला रास्ता बाधित होता है और यह स्थिति आपसी विवाद एवं कानून-व्यवस्था की समस्या का कारण भी बनती है। उनके मुताबिक, नमाज के लिए भोजशाला के नजदीक की जमीन पर वैकल्पिक व्यवस्था करना उचित नहीं है और स्थानीय प्रशासन को इसके लिए अलग स्थान पर व्यवस्था करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि, “हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। हिंदू अपनी भावनाओं को दबाकर बैठा है और किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए संयम बरत रहा है। वर्षों से चले आ रहे अन्याय के प्रति हिंदू समाज में आक्रोश है।”
तिवारी ने आगे कहा कि उन्हें विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष को न्याय मिलेगा। उनके अनुसार, ऐतिहासिक तथ्यों, कानूनी आधारों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर हिंदू पक्ष का दावा मजबूत है।
भोजशाला के साथ ज्ञानवापी और मथुरा मामलों में भी सक्रिय
कुलदीप तिवारी जन उद्घोष सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष हैं। भोजशाला मामले के साथ-साथ वे ज्ञानवापी और मथुरा से जुड़े मामलों में भी पक्षकार के रूप में मजबूती के साथ सक्रिय हैं। भोजशाला प्रकरण में उनकी ओर से लगातार न्यायिक प्रक्रिया और उससे जुड़े विषयों को लेकर पक्ष रखा जाता रहा है।
भोजशाला प्रकरण लंबे समय से ऐतिहासिक, धार्मिक और कानूनी विवाद का विषय रहा है। परिसर के स्वरूप, उसके ऐतिहासिक महत्व तथा धार्मिक अधिकारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी सुनवाई हो चुकी है।
अब सभी पक्षों की निगाहें 29 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। उस दिन मामले में पक्षकारों द्वारा दाखिल की जाने वाली दलीलों और जवाबों के आधार पर आगे की न्यायिक कार्यवाही की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।