इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद मथुरा एसपी की रिपोर्ट बंद लिफाफे में दाखिल; वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एपी सिंह बोले—राम मंदिर प्रकरण में अनुमान से अधिक समय लगा, कृष्ण जन्मभूमि मामले में शीघ्र निर्णय की उम्मीद, सनातन समाज को न्याय मिलने का विश्वास
दैनिक इंडिया न्यूज़ 25 अगस्त 2026 नई दिल्ली।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े प्रकरण में मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई लंबी सुनवाई के बाद न्यायिक प्रक्रिया ने एक और महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश किया। मामले के मुख्य याचिकाकर्ता परम पूज्य संत दिनेश फलाहारी जी महाराज तथा दूसरी याचिकाकर्ता नीतू चौहान की ओर से चल रही कानूनी लड़ाई में मथुरा के पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट बंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एपी सिंह के अनुसार, याचिकाकर्ताओं की ओर से रिपोर्ट पर आपत्ति दाखिल की जाएगी और अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।
मीडिया को संबोधित करते हुए डॉ. एपी सिंह ने कहा कि सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी पक्षों को सुना और इसके बाद आगे की विधिक प्रक्रिया निर्धारित की। उन्होंने बताया कि मथुरा एसपी की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में हाल के दिनों में कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से कारसेवा किए जाने का उल्लेख है, लेकिन संत दिनेश फलाहारी जी महाराज का उस प्रकरण से किसी प्रकार का संबंध नहीं है। उनके अनुसार, संत दिनेश फलाहारी जी मथुरा-वृंदावन में रहकर निरंतर साधना, पूजा और सेवा में संलग्न रहने वाले संत हैं।
नंगे पैर, फलाहार और अखंड साधना—आस्था की वह तपश्चर्या, जो श्रीकृष्ण जन्मभूमि के न्याय की प्रतीक्षा से जुड़ गई है। डॉ. एपी सिंह ने बताया कि संत दिनेश फलाहारी जी नंगे पैर रहते हैं और फलाहार पर रहकर अपनी साधना करते हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता किसी क्षणिक अभियान का परिणाम नहीं, बल्कि उनकी दीर्घकालिक आस्था, श्रद्धा और संकल्प का हिस्सा है। इसलिए कथित कारसेवा की किसी घटना से उन्हें जोड़ना उचित नहीं है और इसी संबंध में याचिकाकर्ताओं की ओर से न्यायालय के समक्ष आपत्तियां दाखिल की जाएंगी।
इसी बीच डॉ. एपी सिंह की एक टिप्पणी ने इस पूरे प्रकरण की प्रतीक्षा कर रहे सनातन समाज में नई आशा का संचार किया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि राम मंदिर प्रकरण में भी अनुमानित अवधि से अधिक समय लगा था, लेकिन श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित प्रकरण में उन्हें शीघ्र निर्णय आने की उम्मीद है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से जल्द ही ऐसा निर्णय सामने आ सकता है, जिसकी प्रतीक्षा सनातन समाज लंबे समय से कर रहा है।
डॉ. एपी सिंह ने अपने संबोधन में सनातन समाज को आश्वस्त करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के इस प्रकरण में निर्णय शीघ्र आने की उम्मीद है और उन्हें विश्वास है कि आने वाला न्यायिक परिणाम याचिकाकर्ताओं के पक्ष में होगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय न्यायालय को विधिक प्रक्रिया, उपलब्ध साक्ष्यों और पक्षकारों की दलीलों के आधार पर ही करना है। यही विधिक मर्यादा इस पूरे प्रकरण की सबसे महत्वपूर्ण कसौटी है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा यह विवाद केवल न्यायालय की फाइलों में दर्ज एक मुकदमा नहीं है; इसके साथ करोड़ों कृष्णभक्तों की आस्था और भावनाएं जुड़ी हुई हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अपने दावों को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में बंद लिफाफे में दाखिल पुलिस रिपोर्ट पर प्रस्तावित आपत्तियां अगली सुनवाई से पहले प्रकरण का महत्वपूर्ण विधिक पक्ष बन गई हैं।
राम जन्मभूमि प्रकरण का उल्लेख करते हुए डॉ. एपी सिंह ने न्यायपालिका के प्रति अपना विश्वास दोहराया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर से संबंधित न्यायिक यात्रा में अनुमानित समय से भी अधिक अवधि लगी, लेकिन अंततः न्यायिक प्रक्रिया अपने निष्कर्ष तक पहुंची। इसी संदर्भ में उन्होंने उम्मीद जताई कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामलों में भी अनावश्यक विलंब के बजाय विधिक प्रक्रिया शीघ्र निर्णायक दिशा में आगे बढ़ेगी।
इतिहास से जुड़े विवादित प्रश्नों पर डॉ. एपी सिंह ने मुगलकालीन आक्रमणों और मथुरा स्थित ईदगाह से संबंधित याचिकाकर्ताओं के दावों का उल्लेख किया। हालांकि इन ऐतिहासिक एवं विधिक दावों का अंतिम निर्धारण न्यायालय की प्रक्रिया में ही होना है। फिलहाल तत्काल प्रश्न मथुरा एसपी की बंद लिफाफे में प्रस्तुत रिपोर्ट और उस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल की जाने वाली आपत्तियों का है।
अब 18 सितंबर की तारीख इस प्रकरण के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। इससे पहले मुख्य याचिकाकर्ता संत दिनेश फलाहारी जी महाराज तथा दूसरी याचिकाकर्ता नीतू चौहान की ओर से आपत्तियां दाखिल किए जाने की बात कही गई है। इसके बाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत तर्क, दस्तावेज और आपत्तियां इस मामले की अगली न्यायिक दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कृष्णभक्तों के लिए यह प्रतीक्षा महज अगली तारीख की प्रतीक्षा नहीं, बल्कि उस न्यायिक निष्कर्ष की प्रतीक्षा है, जिसके लिए संबंधित पक्ष आस्था, विधिक अधिकार और अपने दावों के साथ न्यायालय की शरण में हैं। 18 सितंबर की अगली सुनवाई अब इस न्यायिक यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव होगी—और डॉ. एपी सिंह के आश्वस्तकारी शब्दों ने इस प्रतीक्षा के बीच उम्मीद की एक नई किरण अवश्य जगा दी है।