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पैगम्बर मोहम्मद साहब की जयंती पर सद्भावना का संदेश

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Dainik India News

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पैगम्बर मोहम्मद साहब की जयंती पर सद्भावना का संदेश
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मिश्रपुर में अमजदिया फाउंडेशन के आयोजन में उमड़ा विभिन्न धर्मों का संगम, सूफियाना कलाम और सामूहिक भंडारे ने प्रेम, इंसानियत, अमन और भाईचारे की भावना को दी नई आवाज

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।जब मजहबी पहचान की सरहदें पीछे छूट जाएं और इंसानियत सबसे बड़ी पहचान बनकर सामने आए, तब किसी आयोजन का अर्थ महज एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहता। लखनऊ के गुडंबा क्षेत्र स्थित मिश्रपुर में पैगम्बर मोहम्मद साहब के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर अमजदिया फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम कुछ ऐसा ही संदेश देता नजर आया। आयोजन में विभिन्न धर्मों से जुड़े बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता रही और सूफी कलाम से लेकर सामूहिक भंडारे तक की गतिविधियों ने प्रेम, शांति, सौहार्द और भाईचारे के पैगाम को केंद्र में रखा।

कार्यक्रम स्थल पर देर तक बनी रही आध्यात्मिक और सामाजिक समरसता की फिजा ने आयोजन को विशिष्ट स्वरूप दिया। अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए लोगों की मौजूदगी के बीच सूफियाना कलाम ने माहौल में रूहानी रंग घोला, तो सामूहिक भंडारे ने सामाजिक समानता और साझेपन की अनुभूति को और प्रगाढ़ किया। आयोजकों के अनुसार, आयोजन का मूल उद्देश्य पैगम्बर मोहम्मद साहब के जीवन और उनके बताए मानवीय मूल्यों के माध्यम से समाज में सद्भावना का संदेश पहुंचाना रहा।

अमजदिया फाउंडेशन के आयोजक एवं अधिवक्ता अमजद खान तमन्ना ने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब ने अपने जीवन में आपसी प्रेम, इंसानियत, शांति और भाईचारे को विशेष महत्व दिया। उनके अनुसार, दुनिया भर में उनके अनुयायी उनके बताए रास्ते पर चलते हुए अमन-चैन कायम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमजदिया फाउंडेशन भी पैगम्बर मोहम्मद साहब के विचारों को आगे बढ़ाने तथा समाज में मानवीय मूल्यों, परस्पर सम्मान और सद्भावना की भावना को सुदृढ़ करने के लिए प्रयासरत है।

इस अवसर पर प्रस्तुत सूफी कलाम ने कार्यक्रम की आध्यात्मिक गरिमा को और गहन किया। कलाम की रूहानी अभिव्यक्ति के बीच उपस्थित लोगों ने धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ इंसानी रिश्तों की उस बुनियादी डोर को भी महसूस किया, जो विविधताओं के बीच संवाद और सह-अस्तित्व की राह प्रशस्त करती है। इसके बाद आयोजित भंडारे में लोगों ने सामूहिक रूप से भोजन ग्रहण किया, जिसने आयोजन के सामाजिक सरोकार को और व्यापक आयाम दिया।

कार्यक्रम में विभिन्न समुदायों और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। अफरोज अलाउद्दीन खान, आमिर खान, आश मोहम्मद एडवोकेट, निशचल चौधरी, निराले शाह वारसी, अनीश वारसी, डॉ. शेखर, डॉ. संदीप चौरसिया, गुलफान, सलीम, शोएब, रियाज, शादाब वारसी, जेपी मौर्य, अजीत सिंह, मनीष और अभिषेक सहित बड़ी संख्या में लोग आयोजन में शामिल हुए।

आयोजन का संदेश केवल मंच और कार्यक्रम स्थल तक सीमित नहीं रहा। विभिन्न धर्मों के लोगों की सहभागिता ने यह संकेत दिया कि सामाजिक सौहार्द की बुनियाद संवाद, परस्पर सम्मान और मानवीय संवेदनाओं से मजबूत होती है। ऐसे आयोजनों की सार्थकता इसी में निहित है कि वे धार्मिक आस्था को मानवीय मूल्यों से जोड़ते हुए समाज में आपसी विश्वास की वह जमीन तैयार करें, जिस पर भाईचारे की इमारत और अधिक सुदृढ़ हो सके।

मोहम्मद साहब के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर आयोजित यह कार्यक्रम इसी संदेश के साथ संपन्न हुआ कि मजहब की राहें अलग हो सकती हैं, लेकिन इंसानियत, अमन, मोहब्बत और भाईचारे की मंजिल साझा है।




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