LIC के CSR सहयोग से निर्मित श्रीराम समग्र आयुष चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन,रत्नाकर पटनायक,प्रबंध निदेशक भारतीय जीवन बीमा निगम सहित आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ होंगे मुख्य अतिथि

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।रामपुर देवरई। क्षेत्र में आयुष चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित श्रीराम समग्र आयुष चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ समारोह के मुख्य अतिथि होंगे, जबकि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के प्रबंध निदेशक रत्नाकर पटनायक विशेष विशिष्ट अतिथि की उपस्थिति भी सुनिश्चित है। पूर्व निर्धारित प्रातः 11 बजे के स्थान पर समारोह अब सायं चार बजे आयोजित होगा। चिकित्सालय का निर्माण LIC के गोल्डन जुबली फंड के अंतर्गत CSR सहयोग से किया गया है।

चिकित्सालय के निदेशक (मानव संसाधन) जितेन्द्र प्रताप सिंह ने आयुष मंत्री से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें समारोह के लिए आमंत्रित किया और संशोधित कार्यक्रम की जानकारी दी। आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर LIC के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक एस.के. शुक्ल से भी चर्चा हुई। उन्होंने आयोजन से संबंधित आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया तथा स्थलीय निरिक्षण कर अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान कर समारोह को भव्य स्वरूप देने के लिए संकल्पित करने हेतू आश्वस्त किआ । इस समन्वय के बीच अब चिकित्सालय की स्थापना के उद्देश्य और क्षेत्र में उसकी उपयोगिता पर ध्यान केंद्रित है।
LIC के गोल्डन जुबली फंड से CSR के माध्यम से मिले सहयोग से निर्मित इस चिकित्सालय का उद्देश्य रामपुर देवरई तथा आसपास के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आयुष चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। स्थानीय स्तर पर इस प्रकार की सुविधा उपलब्ध होने से क्षेत्र के लोगों को आयुष पद्धति से उपचार के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। हालांकि, इसकी वास्तविक उपयोगिता चिकित्सालय के नियमित संचालन और उपलब्ध सेवाओं से ही निर्धारित होगी।
चिकित्सालय प्रबंधक डा ए पी शुक्ल के अनुसार, निर्माण अवधि के दौरान विदेशों से आए कुछ रोगियों ने भी यहां उपचार कराया था। उपलब्ध जानकारी में ऐसे रोगियों की संख्या, उपचार की प्रकृति अथवा परिणामों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इस तथ्य को किसी व्यापक निष्कर्ष के बजाय चिकित्सालय से संबंधित उपलब्ध सूचना के रूप में देखना अधिक उपयुक्त होगा।
उद्घाटन के बाद चिकित्सालय के समक्ष आधारभूत संरचना को नियमित चिकित्सा सेवाओं में परिणत करने की चुनौती होगी। ग्रामीण आबादी तक सेवाओं की पहुंच, उपचार की निरंतरता और संस्थान की कार्यप्रणाली ही यह निर्धारित करेगी कि यह केंद्र क्षेत्र की आयुष चिकित्सा आवश्यकताओं को किस सीमा तक पूरा कर पाता है।