‘मम भाषा संस्कृतम्’ के संकल्प से संस्कृति और ज्ञान परंपरा का संदेश, संस्कृत महोत्सव-2026 में 10 करोड़ लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय स्थित वन्दे मातरम् सभागार में रविवार को संस्कृत के जयघोष के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा, भाषा और सांस्कृतिक चेतना का व्यापक स्वरूप सामने आया। अवसर था ‘संस्कृत महोत्सव-2026’ के समापन समारोह का, जो संस्कृत सप्ताह के अंतिम पड़ाव के रूप में आयोजित किया गया। समारोह में संस्कृत को केवल अतीत की भाषा के बजाय वर्तमान की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान-विमर्श से जोड़ने पर जोर दिया गया। इसी क्रम में ‘मम भाषा संस्कृतम्’ के संकल्प के साथ 10 करोड़ आम नागरिकों तक पहुंचने के लक्ष्य की घोषणा ने आयोजन को व्यापक जनजागरण के अभियान का स्वरूप दिया।

दिल्ली संस्कृत अकादमी, कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग, दिल्ली सरकार तथा संस्कृत भारती देहली प्रान्त के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में संस्कृत भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री जयप्रकाश गौतम मुख्य वक्ता रहे। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने समारोह की अध्यक्षता की। संस्कृत भारती के उत्तर क्षेत्रीय मंत्री कौशल किशोर तिवारी तथा कमला नगर जनपद अध्यक्ष धीरज कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मुख्य वक्ता जयप्रकाश गौतम ने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भारत की जीवंत सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान परंपरा की आधारशिला है। उन्होंने देश-विदेश में संस्कृत सप्ताह के दौरान आयोजित गतिविधियों का उल्लेख करते हुए संस्कृत के प्रचार-प्रसार में समाज की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताया। उनका कहना था कि प्रत्येक संस्कृत अनुरागी को समाज और संस्कृत सेवा के लिए नियमित रूप से समय देना चाहिए, क्योंकि संगठन की सामूहिक शक्ति ही व्यापक सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकती है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने संस्कृत भारती को युवाओं की ऊर्जा और कार्यशक्ति से जुड़ा संगठन बताते हुए कहा कि संस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्कृत के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रही है। उन्होंने इंडोनेशिया के बाली का उदाहरण देते हुए वहां भारतीय संस्कृति और संस्कृत के जीवंत प्रभाव का उल्लेख किया। उनके अनुसार ‘मम भाषा संस्कृतम्’ और भारतीय भाषाओं के प्रति जनजागरण के अभियान के माध्यम से 10 करोड़ आम नागरिकों तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने संस्कृत के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
विशिष्ट अतिथि कौशल किशोर ने कहा कि संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित गतिविधियां युवाओं और समाज को अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं। इस दौरान संस्कृत को केवल शैक्षणिक विषय तक सीमित रखने के बजाय उसे सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक संवाद का माध्यम बनाने की कोशिश दिखाई दी।
संस्कृत भारती देहली प्रान्त के प्रान्त संगठन मंत्री लविश कुमार ने संस्कृत सप्ताह के दौरान आयोजित कार्यक्रमों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संस्कृत शोभायात्रा, गृह-गृह संपर्क अभियान, ‘श्लोक सुनाओ, पुरस्कार पाओ’, संस्कृत सेल्फी प्वाइंट, लघु चलचित्र एवं शॉर्ट फिल्म प्रतियोगिता, विद्वत् सम्मेलन तथा प्रश्नमंच जैसी गतिविधियों के माध्यम से संस्कृत को जनसामान्य से जोड़ने का प्रयास किया गया।
प्रान्त मंत्री प्रो. रणजीत बेहेरा ने संस्कृत सप्ताह का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से संस्कृत और भारतीय संस्कृति की विविध छवियां सामने आईं। कार्यक्रम में प्रस्तुतियों ने सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों, विद्वानों और संस्कृतप्रेमियों की भागीदारी को भी व्यापक बनाया।
कार्यक्रम का संचालन संस्कृत सप्ताह के संयोजक दिव्य रंजन ने किया। इस अवसर पर दिल्ली संस्कृत अकादमी के उप सचिव सौरभ कुमार मिश्र सहित अकादमी के अन्य अधिकारी, विश्वविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य, संस्कृत विद्वान, संस्कृत भारती के नगर, जिला, विभाग और प्रान्त स्तर के कार्यकर्ता, विद्यार्थी तथा संस्कृतप्रेमी उपस्थित रहे।
संस्कृत महोत्सव का समापन भले ही हुआ, लेकिन समारोह में सामने आया 10 करोड़ लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य यह संकेत देता है कि संस्कृत को लेकर चल रहा अभियान अब केवल आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यापक सामाजिक सहभागिता से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।