
दैनिक इंडिया न्यूज़ 30 जुलाई 2026, लखनऊ। क्या आधुनिक जीवनशैली से उपजी जटिल व्याधियों का समाधान केवल औषधियों में निहित है, अथवा प्रकृति की गोद में भी आरोग्य का शाश्वत मार्ग विद्यमान है? इसी प्रश्न का व्यावहारिक उत्तर प्रस्तुत करने हेतु रामपुर देवरई, लखनऊ स्थित श्रीराम आयुष चिकित्सालय एवं अनुसंधान संस्थान में सात दिवसीय विशेष आवासीय प्राकृतिक चिकित्सीय शिविर का शुभारम्भ अत्यंत श्रद्धा, गरिमा एवं वैदिक परम्परा के अनुरूप सम्पन्न हुआ। उद्घाटन समारोह में आध्यात्मिक चेतना, स्वास्थ्य-साधना और भारतीय संस्कृति का अनुपम समन्वय दृष्टिगोचर हुआ।


समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. चन्द्र भूषण त्रिपाठी, प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड, तथा विशिष्ट अतिथि जितेन्द्र प्रताप सिंह, सम्पर्क प्रमुख, पूर्व उत्तर प्रदेश क्षेत्र एवं प्रमोद पंडित, क्षेत्रीय संगठन मंत्री, संस्कृत भारती, की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशिष्ट आयाम प्रदान किया। अतिथियों ने माँ गायत्री, युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य तथा वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य दीप प्रज्वलित किया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा एवं मंगलमय भावों से अनुप्राणित हो उठा।

अतिथियों का पारंपरिक अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं गायत्री साहित्य भेंट कर आत्मीय अभिनन्दन किया गया। स्वागत की इस भारतीय सांस्कृतिक परम्परा ने उपस्थित जनसमुदाय को यह अनुभूति कराई कि भारतीय संस्कृति में अतिथि केवल सम्मान का पात्र नहीं, बल्कि देवतुल्य माना गया है।

संस्थान के प्रबंधक एवं न्यासी डॉ. ए. पी. शुक्ल ने अपने स्वागत उद्बोधन में प्राकृतिक चिकित्सा की वैज्ञानिकता, आयुष पद्धति की प्रासंगिकता तथा समग्र स्वास्थ्य के प्रति उसके बहुआयामी योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह सात दिवसीय आवासीय शिविर केवल रोगोपचार का माध्यम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलित विकास का सशक्त अभियान है। उन्होंने देश के विभिन्न प्रांतों से पधारे प्रतिभागियों का आत्मीय स्वागत करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिविर के दौरान प्राकृतिक चिकित्सा, योग, प्राणायाम, सात्त्विक आहार, जीवनशैली परिष्कार तथा भारतीय स्वास्थ्य-दर्शन पर आधारित विविध सत्र प्रतिभागियों को न केवल निरोगी जीवन की दिशा प्रदान करेंगे, बल्कि उन्हें आत्मानुशासन, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नयन का भी अनुभव कराएँगे।

उद्घाटन समारोह का वातावरण श्रद्धा, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने एक स्वर में यह संकल्प व्यक्त किया कि भारतीय आयुष परम्परा, प्राकृतिक चिकित्सा तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन के माध्यम से स्वस्थ, जागरूक एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देंगे।
इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए चिकित्सक, प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ, गायत्री परिवार के कार्यकर्ता, संस्कृत भारती के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्वास्थ्य-जिज्ञासु नागरिक उपस्थित रहे। समारोह का समापन वैदिक मंगलकामना एवं राष्ट्रकल्याण की प्रार्थना के साथ हुआ।