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वारियर्स डिफेंस कॉलेज में संस्कृत सप्ताह के तहत विशेष आयोजन, छात्रों को प्राचीन ग्रंथों और भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़ने का आह्वान

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वारियर्स डिफेंस कॉलेज में संस्कृत सप्ताह के तहत विशेष आयोजन, छात्रों को प्राचीन ग्रंथों और भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़ने का आह्वान

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।संस्कृत सप्ताह के अवसर पर वारियर्स डिफेंस कॉलेज एवं एकेडमी, मोहनलालगंज में मंगलवार को संस्कृत भारती, अवध प्रान्त की ओर से आयोजित विशेष कार्यक्रम में छात्रों ने संस्कृत भाषा सीखने का संकल्प लिया। आयोजन में संस्कृत को केवल प्राचीन भाषा के रूप में देखने के बजाय भारतीय ज्ञान-परंपरा, चिंतन और बौद्धिक अनुशासन से जोड़कर समझने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में छात्रों को संस्कृत के अध्ययन के माध्यम से प्राचीन ग्रंथों और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से परिचित होने का संदेश दिया गया।

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संस्कृत भारती के संपर्क प्रमुख, पूर्वी उत्तर प्रदेश, जितेन्द्र प्रताप सिंह ने छात्रों को संबोधित करते हुए संस्कृत के ऐतिहासिक एवं भाषायी महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृत देववाणी और आदि भाषा है तथा इसकी व्याकरणिक संरचना और मूल स्वरूप आज भी अपनी विशिष्टता के साथ विद्यमान है। उनके अनुसार, समय के साथ विश्व की अनेक भाषाओं के शब्द, भाव और प्रयोग परिवर्तित हुए, जबकि संस्कृत की मूल व्याकरणिक व्यवस्था और संरचना दीर्घकाल से अपनी निरंतरता बनाए हुए है।

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उन्होंने छात्रों को संस्कृत सीखने के लिए संस्कृत भारती के 20 घंटे के प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि इच्छुक विद्यार्थी इसमें सहभागी हो सकते हैं। इसके लिए छात्र अपना नाम वारियर्स डिफेंस एकेडमी के प्रबंध निदेशक गुलाब सिंह को दे सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य छात्रों के बीच संस्कृत के प्रति रुचि विकसित करना और उन्हें भाषा के व्यावहारिक अध्ययन से जोड़ना है।

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कार्यक्रम में संस्कृत भारती, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रमोद पंडित ने भी छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने श्रुति-परंपरा, संस्कृत भाषा और प्राचीन ग्रंथों के संदर्भ में विद्यार्थियों को जानकारी दी तथा संस्कृत अध्ययन के बौद्धिक पक्ष को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एकाग्रता, विचारों के परिष्कार और अध्ययन की क्षमता को विकसित करने में संस्कृत का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।

प्रमोद पंडित ने छात्रों से कहा कि संस्कृत ग्रंथों का अध्ययन केवल भाषा सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति, ज्ञान-परंपरा और जीवन-दृष्टि को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी प्राचीन ज्ञान-संपदा से जुड़ने तथा उसके अध्ययन के माध्यम से जीवन और राष्ट्र के प्रति अपनी भूमिका को समझने के लिए प्रेरित किया।

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वारियर्स डिफेंस कॉलेज एवं एकेडमी के प्रबंध निदेशक गुलाब सिंह ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए छात्रों से संस्कृत सीखने के लिए आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि परीक्षा समाप्त होने के बाद विद्यालय में ही 20 घंटे का संस्कृत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कराया जाएगा। इसके तहत प्रतिदिन एक घंटे की कक्षा के माध्यम से 20 दिनों तक छात्रों को संस्कृत भाषा के अध्ययन से जोड़ा जाएगा।

उन्होंने कहा कि संस्कृत का अध्ययन विद्यार्थियों की जीवनशैली और विचारों को प्रभावित करने के साथ उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर भी देगा। विद्यालय की ओर से संस्कृत सीखने के इच्छुक छात्रों को इस अभियान से जोड़ने की पहल की जाएगी।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर छात्रों ने करतल ध्वनि के साथ संस्कृत भारती की पहल का स्वागत किया और संस्कृत भाषा को उसके मूल स्वरूप में सीखने के लिए प्रयास करने का संकल्प लिया। संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के बीच भाषा, संस्कृति और भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति नई जिज्ञासा जगाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।

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