30 अप्रैल 2019 से रिक्त पद का आरटीआई अभिलेखों में भी उल्लेख, 2022 में कहा गया 'विज्ञापन प्रक्रियाधीन', 2026 में परिषद् ने निकाली भर्ती, विधानसभा अब भी मौन
दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।उत्तर प्रदेश विधान परिषद् सचिवालय द्वारा 6 अगस्त 2026 को प्रमुख सचिव के पद पर भर्ती का विज्ञापन जारी किए जाने के साथ ही उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय की प्रशासनिक स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। उपलब्ध आधिकारिक अभिलेखों, आरटीआई आदेशों और न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेज़ों से संकेत मिलता है कि विधानसभा में प्रमुख सचिव का पद 30 अप्रैल 2019 से रिक्त बताया जाता रहा है, किंतु नियमित चयन प्रक्रिया अब तक सार्वजनिक रूप से पूरी नहीं हो सकी।
दैनिक इंडिया न्यूज़ के पास उपलब्ध विधानसभा सचिवालय के 30 अप्रैल 2019 के कार्यालय आदेश के अनुसार तत्कालीन प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे उसी दिन अपराह्न से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दायर प्रथम अपील पर विशेष सचिव एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी मोहम्मद मुशाहिद द्वारा पारित आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि 30.04.2019 से प्रमुख सचिव का पद रिक्त है तथा उस पर चयन प्रक्रिया अपनाई जानी थी।
अभिलेख बताते हैं कि 26 अगस्त 2022 को आरटीआई के माध्यम से प्रमुख सचिव के रिक्त पद पर भर्ती हेतु विज्ञापन की प्रति और विवरण मांगा गया। इसके उत्तर में 13 अक्टूबर 2022 को जनसूचना अधिकारी ने लिखित रूप से सूचित किया कि "प्रकरण में विज्ञापन का प्रसारण प्रक्रियाधीन है।" इसके बाद 29 अगस्त 2024 को अद्यतन स्थिति मांगे जाने पर अपीलीय आदेश में यह दर्ज किया गया कि प्रमुख सचिव के पद पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन अभी तक जारी नहीं हुआ था।
इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ पीठ में लंबित रिट याचिका संख्या 4560/2026 की कार्यवाही में भी इस पद से जुड़े प्रश्न न्यायिक विमर्श का हिस्सा बने हैं। दूसरी ओर, 6 अगस्त 2026 को विधान परिषद् सचिवालय ने प्रमुख सचिव के रिक्त पद पर आवेदन आमंत्रित कर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी। ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न उठ रहा है कि जब परिषद् में नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ हो सकती है, तो विधानसभा सचिवालय के वर्ष 2019 से रिक्त बताए जा रहे पद पर नियमित भर्ती की प्रक्रिया अब तक सार्वजनिक रूप से पूरी क्यों नहीं हुई? इस प्रश्न पर अब संबंधित प्राधिकारियों के आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार रहेगा।