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एक दिलचस्प कहानी, जिसकी थी उसी को मिली ,मिलने में लग गए 68 साल

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Dainik India News

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एक दिलचस्प कहानी,   जिसकी थी उसी को मिली ,मिलने में लग गए 68 साल

हरिंद्र सिंह/डीडी इंडिया

एयर इंडिया को टाटा ग्रुप खरीदने जा रहा है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट से यह खबर मिली है. यानी अब सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया टाटा ग्रुप की होने जा रही है।

टाटा के पास एयर इंडिया को वापस आने में कुल 68 साल लग गए. यह साल 1953 था, जब भारत सरकार ने टाटा संस से एयर इंडिया में मालिकाना हक खरीद लिया था. ऐसे में एयर इंडिया को टाटा ग्रुप के पास वापस आने में कुल 68 साल का समय लग गया. आइए एयर इंडिया की स्थापना से लेकर इसकी दिलचस्प कहानी को जानते हैं

1932 में हुई थी स्थापना

एयर इंडिया की स्थापना 1932 में टाटा एयर सर्विसेज के तौर पर हुई थी, जिसका नाम बाद में बदलकर टाटा एयरलाइंस कर दिया गया था. एयरलाइन की शुरुआत भारतीय बिजनेस के दिग्गज जे आर डी टाटा ने की थी. अप्रैल 1932 में, टाटा ने इंपीरियल एयरवेज के लिए मेल ले जाने का कॉन्ट्रैक्ट जीता थ।इसके बाद टाटा संस ने दो सिंगल इंजन विमानों के साथ अपना एविएशन डिपार्टमेंट बनाया. 15 अक्टूबर 1932 को टाटा ने कराची से बॉम्बे के लिए एक एयर मेल ले जाने वाला विमान उड़ाया। यह एयरक्राफ्ट मद्रास तक गया, जिसके पायलट पूर्व रॉयल फोर्स के पायलट Nevill Vintcent थे, जो टाटा के दोस्ट भी थे. शुरुआत में, कंपनी ने साप्ताहिक एयर मेल सर्विस का संचालन किया, जो कराची और मद्रास के बीच और अहमदाबाद और बॉम्बे के जरिए चलती थी. अपने पगले साल में, एयरलाइन ने 2,60,000 किलोमीटर की उड़ान भरी. इसमें पहले साल में 155 मुसाफिरों ने सफर किया और 9.72 टन मेल और 60,000 रुपये का मुनाफा कमाया।

टाटा एयरलाइंस किया गया नाम

एयरलाइन ने छह सीटों वाली Miles Merlin के साथ बॉम्बे से त्रिवंद्रम के बीच अपनी पहली घरेलू उड़ान की शुरुआत की. साल 1938 में, इसका नाम बदलकर टाटा एयरलाइंस कर दिया गया. 1938 में, इसके गंतव्यों में कॉलम्बो और दिल्ली को जोड़ा गया. दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान एयरलाइन ने रॉयल एयर फोर्स की उनकी सेना की आवाजाही, सप्लाई ले जाने, शरणार्थियों को बचाने और एयरक्राफ्ट के रखरखव में मदद की।

1953 में सरकार ने लिया मालिकाना हक

21 फरवरी 1960 को, एयर इंडिया इंटरनेशनल ने अपने पहले बोइंग 707-420 को बेड़े में शामिल किया. एयरलाइन ने 14 मई 1960 को न्यू यॉर्क को सेवाएं शुरू कर दी. 8 जून 1962 को एयरलाइन के नाम को आधिकारिक तौर पर एयर इंडिया कर दिया गया. और 11 जून 1962 को एयर इंडिया दुनिया की पहली ऑल जेट एयरलाइन बन गई।

2000 में, एयर इंडिया ने शांघाई, चीन को सेवाओं की शुरुआत ती. 23 मई 2001 को नगर विमानन मंत्रालय ने उस समय कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर Michael Mascarenhas पर भ्रष्टाचार का चार्ज फिक्स किया. साल 2007 में एयर इंडिया और इंडियन एयरालइंस को एयर इंडिया लिमिटेड का मर्जर किया गया।

2017 में सरकार से मिली निजीकरण की मंजूरी

इसके बाद साल 2017 में केंद्रीय कैबिनेट ने एयर इंडिया के निजीकरण को मंजूरी दी. साल 2018 में एयर इंडिया को बेचने की कोशिश की गई, जो असफल रही. अपने असफल प्रयास के बाद, सरकार ने पिछले साल जनवरी में विनिवेश प्रक्रिया को फिर से शुरू किया और एयर इंडिया में एयर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी सहित राज्य के स्वामित्व वाली एयरलाइन में अपनी 100 प्रतिशत वाली एक्सप्रेस लिमिटेड और एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में 50 फीसदी इक्विटी बेचने के लिए बोलियां आमंत्रित कीं।

आपको बता दें कि एयर इंडिया पर कुल 38,366.39 करोड़ रुपये का कर्ज है।एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड के स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) को एयरलाइन द्वारा 22,064 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के बाद की यह रकम है.सरकार ने संसद को बताया था कि अगर एयर इंडिया बिक नहीं पाती है तो उसे बंद करना है एकमात्र उपाय ।

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