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“खून की आख़िरी बूंद तक इस मिट्टी के लिए संघर्ष”—ए. के. शर्मा

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Dainik India News

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“खून की आख़िरी बूंद तक इस मिट्टी के लिए संघर्ष”—ए. के. शर्मा


जहाँ संत रविदास की वाणी गूंजी, वहीं विकास का रोडमैप रखा गया: ए. के. शर्मा


दैनिक इंडिया न्यूज़, मधुबन (मऊ)।मऊ जनपद का मधुबन क्षेत्र बुधवार को केवल एक धार्मिक आयोजन का साक्षी नहीं बना, बल्कि वह वैचारिक चेतना, सामाजिक समरसता और विकासात्मक संकल्प के त्रिवेणी संगम का केंद्र बन गया। उसुरी कुटी में आयोजित संत शिरोमणि श्री रविदास जयंती पखवाड़ा कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा की सहभागिता ने इस आयोजन को ऐतिहासिक और दिशासूचक स्वरूप प्रदान किया। संत समाज, श्रद्धालुओं, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की व्यापक उपस्थिति ने कार्यक्रम की सामाजिक स्वीकार्यता और भावनात्मक गहराई को और सुदृढ़ कर दिया।


कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्री ए. के. शर्मा द्वारा संत शिरोमणि श्री रविदास के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ हुआ। यह क्षण मात्र औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं था, बल्कि उस संत परंपरा के प्रति नमन था, जिसने भारतीय समाज को बाह्य आडंबरों से मुक्त कर आत्मशुद्धि, समानता और मानवता के शाश्वत मूल्यों से जोड़ा। मंच से मंत्री ने संत रविदास को ऐसी चेतना का प्रतीक बताया, जिनकी वाणी समय की सीमाओं को लांघकर आज भी समाज को दिशा देने का सामर्थ्य रखती है।


अपने संबोधन में मंत्री शर्मा ने कहा कि संत शिरोमणि श्री रविदास ने समाज में व्याप्त पाखंड, अंधविश्वास और सामाजिक विभाजन को नकारते हुए आत्मिक शुद्धता और नैतिक आचरण को सर्वोच्च स्थान दिया। “मन चंगा तो कठौती में गंगा” जैसे उनके सूत्रवाक्य केवल काव्यात्मक पंक्तियाँ नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का दार्शनिक घोष हैं, जो व्यक्ति को बाह्य आडंबर से हटाकर अंतःकरण की पवित्रता की ओर ले जाते हैं। यही दर्शन आज के विखंडित सामाजिक परिदृश्य में समरसता का सबसे सशक्त आधार बन सकता है।


मंत्री ने यह भी कहा कि संत रविदास का स्पष्ट संदेश था कि ईश्वर की खोज बाहरी प्रतीकों में नहीं, बल्कि मन की निर्मलता में निहित है। जब मन स्वच्छ होता है, तभी समाज में सद्भाव, भाईचारा और समता का विस्तार होता है। यही कारण है कि संत रविदास की वाणी केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्निर्माण की प्रेरक शक्ति है, जिसे आज की पीढ़ी को आत्मसात करने की आवश्यकता है।


विकास के ठोस एजेंडे को सामने रखते हुए उन्होंने उसुरी कुटी के समग्र विकास की घोषणा की। बताया कि वंदन योजना के अंतर्गत लगभग दो करोड़ रुपये की लागत का प्रस्ताव शासन स्तर पर प्रक्रियाधीन है, जिसकी स्वीकृति शीघ्र प्राप्त होने की संभावना है। इस परियोजना के माध्यम से इस पावन स्थल का सौंदर्यीकरण, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और श्रद्धालुओं के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएंगी, जिससे यह स्थान धार्मिक के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनेगा।


मंत्री ने मऊ जनपद के विकास पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह क्षेत्र अब ठहराव नहीं, बल्कि प्रगति का प्रतीक बन रहा है। विद्युत उपकेंद्रों की स्थापना, डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण, घाटों का विकास और अन्य अधोसंरचनात्मक परियोजनाएँ धरातल पर उतर चुकी हैं। आने वाले समय में शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन और नगरीय सुविधाओं के क्षेत्र में भी संतुलित एवं सतत विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।


अपने वक्तव्य के सबसे प्रभावशाली क्षण में मंत्री ए. के. शर्मा ने भावुक और दृढ़ स्वर में कहा कि पूर्व में मऊ का विकास अवरुद्ध रहा, कई आवश्यक कार्य समय पर पूरे नहीं हो सके। अब सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ न केवल लंबित योजनाओं को गति दे रही है, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दूरदर्शी विकास मॉडल लागू कर रही है। उन्होंने कहा—“जब तक शरीर में खून की एक भी बूंद है, तब तक इस मिट्टी के लिए संघर्ष करते रहेंगे और मऊ के विकास को हर हाल में साकार करेंगे।”


ऊर्जा क्षेत्र पर बोलते हुए मंत्री ने बताया कि संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए गए हैं। तकनीकी सुदृढ़ता और प्रशासनिक पारदर्शिता के माध्यम से आमजन के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने का प्रयास निरंतर जारी है। विकास अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि जनजीवन में प्रत्यक्ष अनुभव का विषय बन रहा है।


कार्यक्रम में मधुबन नगर पंचायत अध्यक्ष आरती मल्ल, पूर्व चेयरमैन प्रतिनिधि शंकर मद्धेशिया, विकाश मल्ल, राहुल दीक्षित, बलवंत चौधरी, हौसला उपाध्याय सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। संत रविदास की वैचारिक विरासत और सरकार की विकासात्मक प्रतिबद्धता के संगम ने इस आयोजन को मात्र एक समारोह नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और भविष्यदृष्टि का प्रेरक अध्याय बना दिया।

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