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बीमारी के आगे नहीं झुकी इच्छाशक्ति, विद्यार्थियों के भविष्य को ही बनाया जीवन का ध्येय

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Dainik India News

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बीमारी के आगे नहीं झुकी इच्छाशक्ति, विद्यार्थियों के भविष्य को ही बनाया जीवन का ध्येय

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ।जब जीवन कठिन परीक्षाओं से गुजरता है, तब कुछ लोग परिस्थितियों के सामने ठहर जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपने साहस और संकल्प से उन परिस्थितियों को ही चुनौती दे देते हैं। ऐसा ही प्रेरणादायी व्यक्तित्व है सतीश मिश्रा, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए भी शिक्षा के अपने पावन दायित्व से तनिक भी विमुख नहीं हुए हैं। वर्षों से City Montessori School की एल डी ए शाखा में अंग्रेज़ी का अध्यापन करते हुए उन्होंने असंख्य विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने का कार्य किया है।

उनकी शिक्षण पद्धति केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन और ऊँचे लक्ष्य का संस्कार भी जगाती रही है। उनके मार्गदर्शन में अनेक छात्र-छात्राएँ Council for the Indian School Certificate Examinations की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए मेरिट सूची में स्थान बना चुके हैं। इतना ही नहीं, उनके द्वारा तैयार किया गया प्रश्नपत्र भी बोर्ड द्वारा चयनित किया जाना उनकी विद्वत्ता और शैक्षिक गहराई का प्रमाण है।


किन्तु सतीश मिश्रा की सबसे बड़ी पहचान केवल उनकी विद्वता नहीं, बल्कि उनका अदम्य साहस है। लंबे समय से कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझने के बावजूद उन्होंने अपने दायित्वों से विराम लेने का विचार तक नहीं किया। जब अनेक लोग जीवन की इस कठिन घड़ी में विश्राम को ही विकल्प मान लेते हैं, तब मिश्रा विद्यालय पहुँचकर उसी ऊर्जा और उत्साह से विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं, मानो जीवन की हर पीड़ा उनके संकल्प के आगे नतमस्तक हो गई हो।

जब मीडिया ने उनसे प्रश्न किया कि इतनी कठिन परिस्थितियों में भी यह अद्भुत प्रेरणा और साहस उन्हें कहाँ से प्राप्त होता है, तो उनका उत्तर सुनकर हर व्यक्ति का मन भावविभोर हो उठा। उन्होंने कहा—हम उस महान भूमि के वासी हैं, जहाँ महाराणा प्रताप जैसे महापुरुषों ने घास की रोटी खाकर भी अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए मुगलों से संघर्ष किया। ऐसे महान आदर्शों की परंपरा में जन्म लेने वाला व्यक्ति कठिनाइयों से भयभीत कैसे हो सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके विद्यालय के संस्थापक जगदीश गांधी हैं। मिश्रा के शब्दों में—“जगदीश गांधी ने अपने जीवन की शुरुआत अत्यंत साधारण परिस्थितियों से की, लेकिन अपने संकल्प, परिश्रम और दूरदृष्टि से शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी ऊँचाइयाँ प्राप्त कीं, जिनसे आज पूरी दुनिया प्रेरणा लेती है। जब हम ऐसे व्यक्तित्वों के सान्निध्य में कार्य करते हैं, तो जीवन की कठिनाइयाँ हमें रोक नहीं पातीं, बल्कि आगे बढ़ने का साहस देती हैं।”

उनकी यह जीवनगाथा केवल एक शिक्षक की कहानी नहीं, बल्कि उस अदम्य मानवीय शक्ति का प्रमाण है जो विपरीत परिस्थितियों में भी बुझने के बजाय और अधिक प्रखर होकर प्रज्वलित होती है। जिन विद्यार्थियों को उन्होंने शिक्षा दी, वे आज देश और विदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता की ऊँचाइयों को छूते हुए **लखनऊ का नाम गौरवान्वित कर रहे हैं।

सतीश मिश्रा का जीवन यह संदेश देता है कि सच्चा शिक्षक केवल ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि अपने जीवन के उदाहरण से साहस, संघर्ष और समर्पण का पाठ भी पढ़ाता है। आज जब वे स्वयं एक कठिन संघर्ष से गुजर रहे हैं, तब उनका यही अटूट मनोबल हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ बन गया है।
निस्संदेह, यह कहानी केवल पढ़ी नहीं जाती—इसे बार-बार पढ़ने का मन करता है, क्योंकि हर बार यह मन में एक नई ऊर्जा, एक नया विश्वास और एक नया संकल्प जगा देती है कि यदि मनुष्य के भीतर कर्तव्य के प्रति निष्ठा हो, तो कोई भी बीमारी या कठिनाई उसके संकल्प को पराजित नहीं कर सकती।

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