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संभोग से समाधि तक: देहबोध से आत्मबोध की एक आध्यात्मिक यात्रा | DISSENT UNDER THE GUISE OF DISSENT: THE ANATOMY OF ANARCHY, THE SUPREMACY OF TRUTH, AND THE CONSTITUTIONAL CONSCIENCE OF A DEMOCRACY | प्रवीण गर्ग के जन्मदिवस पर शुभकामनाओं का तांता, वरिष्ठजनों के श्रीचरणों में नमन कर स्नेहीजनों के प्रति जताया आभार | मधुबन में श्रद्धा और आस्था के साथ कन्या पूजन, सुख-समृद्धि की कामना के बीच भक्तिमय हुआ वातावरण | मधुबन में दुर्गा पंडालों पर उमड़ा आस्था का सैलाब, जयकारों से भक्तिमय हुआ पूरा क्षेत्र | फैजुल्लागंज को बाढ़ से बचाने के लिए 5.5 किमी तटबंध, 12 नए पंपिंग स्टेशन; ड्रेनेज से शिक्षा और स्वास्थ्य तक बदलेगा विकास का खाका | विकसित भारत-2047 की पैरवी करेंगे युवा विधिवेत्ता, योगी बोले— फैसला इतिहास सुनाएगा, बहस आपको करनी है | असहमति की आड़ में अराजकता का आख्यान- राजनाथ सिंह | संभोग से समाधि तक: देहबोध से आत्मबोध की एक आध्यात्मिक यात्रा | DISSENT UNDER THE GUISE OF DISSENT: THE ANATOMY OF ANARCHY, THE SUPREMACY OF TRUTH, AND THE CONSTITUTIONAL CONSCIENCE OF A DEMOCRACY | प्रवीण गर्ग के जन्मदिवस पर शुभकामनाओं का तांता, वरिष्ठजनों के श्रीचरणों में नमन कर स्नेहीजनों के प्रति जताया आभार | मधुबन में श्रद्धा और आस्था के साथ कन्या पूजन, सुख-समृद्धि की कामना के बीच भक्तिमय हुआ वातावरण | मधुबन में दुर्गा पंडालों पर उमड़ा आस्था का सैलाब, जयकारों से भक्तिमय हुआ पूरा क्षेत्र | फैजुल्लागंज को बाढ़ से बचाने के लिए 5.5 किमी तटबंध, 12 नए पंपिंग स्टेशन; ड्रेनेज से शिक्षा और स्वास्थ्य तक बदलेगा विकास का खाका | विकसित भारत-2047 की पैरवी करेंगे युवा विधिवेत्ता, योगी बोले— फैसला इतिहास सुनाएगा, बहस आपको करनी है | असहमति की आड़ में अराजकता का आख्यान- राजनाथ सिंह |
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'एक पेड़ माँ के नाम' से हरित उत्तर प्रदेश का महाअभियान, मऊ बना जनसहभागिता का प्रेरक केंद्र • सीएम ने कसा तंज 2024 ही नहीं, 2027 और 2032 में भी रिपीट होगी हमारी सरकार • बौद्धिक दासता या बौद्धिक दक्षता : जब समानता, विवेक को निगलने लगे- हरेंद्र सिंह • खंड विकास अधिकारी ने ली ग्राम पंचायत सचिवों की बैठक • शासन द्वारा आदर्श आचार संहिता से सम्बन्धित दिये गये निर्देश • “प्रो. सोनिया नित्यानंद की पुनर्नियुक्ति पर जितेंद्र प्रताप सिंह ने दी शुभकामनाएं, बोले—केजीएमयू के गौरव को मिलेगी नई ऊंचाई” • बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई , इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया • लखनऊ के युवाओं को नीरज सिंह का तोहफ़ा • 'एक पेड़ माँ के नाम' से हरित उत्तर प्रदेश का महाअभियान, मऊ बना जनसहभागिता का प्रेरक केंद्र • सीएम ने कसा तंज 2024 ही नहीं, 2027 और 2032 में भी रिपीट होगी हमारी सरकार • बौद्धिक दासता या बौद्धिक दक्षता : जब समानता, विवेक को निगलने लगे- हरेंद्र सिंह • खंड विकास अधिकारी ने ली ग्राम पंचायत सचिवों की बैठक • शासन द्वारा आदर्श आचार संहिता से सम्बन्धित दिये गये निर्देश • “प्रो. सोनिया नित्यानंद की पुनर्नियुक्ति पर जितेंद्र प्रताप सिंह ने दी शुभकामनाएं, बोले—केजीएमयू के गौरव को मिलेगी नई ऊंचाई” • बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई , इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया • लखनऊ के युवाओं को नीरज सिंह का तोहफ़ा •
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विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका पर नजर रखने के लिये मीडिया को चौथे स्तंभ को जानें:हरिंद्र सिंह:-

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विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका पर नजर रखने के लिये मीडिया को चौथे स्तंभ को जानें:हरिंद्र सिंह:-

लोकतांत्रिक देशों में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के क्रियाकलापों पर नजर रखने के लिये मीडिया को ‘‘चौथे स्तंभ’’ के रूप में जाना जाता है। 18वीं शताब्दी के बाद से, खासकर अमेरिकी स्वतंत्रता आंदोलन और फ्राँसीसी क्रांति के समय से जनता तक पहुँचने और उसे जागरूक कर सक्षम बनाने में मीडिया ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मीडिया अगर सकारात्मक भूमिका अदा करें तो किसी भी व्यक्ति, संस्था, समूह और देश को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक रूप से समृद्ध बनाया जा सकता है।

वर्तमान समय में मीडिया की उपयोगिता, महत्त्व एवं भूमिका निरंतर बढ़ती जा रही है। कोई भी समाज, सरकार, वर्ग, संस्था, समूह व्यक्ति मीडिया की उपेक्षा कर आगे नहीं बढ़ सकता। आज के जीवन में मीडिया एक अपरिहार्य आवश्यकता बन गया है। अगर हम देखें कि समाज किसे कहते हैं तो यह तथ्य सामने आता है कि लोगों की भीड़ या असंबंद्घ मनुष्य को हम समाज नहीं कह सकते हैं। समाज का अर्थ होता है संबंधों का परस्पर ताना-बाना, जिसमें विवेकवान और विचारशील मनुष्यों वाले समुदायों का अस्तित्व होता है।

मीडिया एक समग्र तंत्र है जिसमें प्रिंटिंग प्रेस, पत्रकार, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम, रेडियों, सिनेमा, इंटरनेट आदि सूचना के माध्यम सम्मिलित होते हैं। अगर समाज में मीडिया की भूमिका की बात करें तो इसका तात्पर्य यह हुआ कि समाज में मीडिया प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से क्या योगदान दे रहा है एवं उसके उत्तरदायित्वों के निर्वहन के दौरान समाज पर उसका क्या सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

प्रभाव पर गौर करने पर स्पष्ट होता है कि मीडिया की समाज में शक्ति, महत्ता एवं 9उपयोगिकता में वृद्धि से इसके सकारात्मक प्रभावों में काफी अभिवृद्धि हुई है लेकिन साथ-साथ इसके नकारात्मक प्रभाव भी उभर कर सामने आए हैं।

मीडिया ने जहाँ जनता को निर्भीकता पूर्वक जागरूक करने, भ्रष्टाचार को उजागर करने, सत्ता पर तार्किक नियंत्रण एवं जनहित कार्यों की अभिवृद्धि में योगदान दिया है, वहीं लालच, भय, द्वेष, स्पर्द्धा, दुर्भावना एवं राजनैतिक कुचक्र के जाल में फंसकर अपनी भूमिका को कलंकित भी किया है। व्यक्तिगत या संस्थागत निहित स्वार्थों के लिये यलो जर्नलिज़्म को अपनाना, ब्लैकमेल द्वारा दूसरों का शोषण करना, चटपटी खबरों को तवज्जों देना और खबरों को तोड़-मरोड़कर पेश करना, दंगे भड़काने वाली खबरे प्रकाशित करना, घटनाओं एवं कथनों को द्विअर्थी रूप प्रदान करना, भय या लालच में सत्तारूढ़ दल की चापलूसी करना, अनावश्यक रूप से किसी की प्रशंसा और महिमामंडन करना और किसी दूसरे की आलोचना करना जैसे अनेक अनुचित कार्य आजकल मीडिया द्वारा किये जा रहे हैं। दुर्घटना एवं संवेदनशील मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना, ईमानदारी, नैतिकता, कर्त्तव्यनिष्ठा और साहस से’ संबंधित खबरों को नजरअंदाज करना आजकल मीडिया का एक सामान्य लक्षण हो गया है। मीडिया के इस व्यवहार से समाज में अव्यवस्था और असंतुलन की स्थिति पैदा होती है।

प्रिंट मीडिया और टी.वी. एवं सिनेमा के माध्यम से पश्चिमी संस्कृति का आगमन और प्रसार हो रहा है जिससे समाज में अनावश्यक फैशन, अश्लीलता, चोरी, गुंडागर्दी जैसी घटनाओं में वृद्धि हुई है। इस पतन के कारण युवा पीढ़ी भी पतन के गर्त में धँसती जा रही है।

इंटरनेट के माध्यम से असामाजिक क्रियाकलाप युवाओं तक पहुंच रहे है जिससे उनमें नैतिकता, संस्कृति और सभ्यता की लगातार कमी आती जा रही है। इन सबको देखते हुए मीडिया की भूमिका पर चर्चा करना आज आवश्यक हो गया है।

मीडिया की भूमिका यथार्थ सूचना प्रदायक एजेंसी के रूप में होनी चाहिये। मीडिया द्वारा समाज को संपूर्ण विश्व में होने वाली घटनाओं की जानकारी मिलती है। इसलिये मीडिया का यह प्रयास होना चाहिये कि ये जानकारियाँ यथार्थपरक हो। सूचनाओं को तोड़-मरोड़कर या दूषित कर प्रस्तुत करने का प्रयास नहीं होना चाहिये। समाज के हित एवं जानकारी के लिये सूचनाओं को यथावत एवं विशुद्ध रूप में जनता के समक्ष पेश करना चाहिये। मीडिया का प्रस्तुतीकरण ऐसा होना चाहिये जो समाज का मार्गदर्शन कर सके। खबरों और घटनाओं का प्रस्तुतीकरण इस प्रकार हो जिससे जनता का मागदर्शन हो सके। उत्तम लेख, संपादकीय, ज्ञानवर्द्घक सूचनाएँ, श्रेष्ठ मनोरंजन आदि सामग्रियों का खबरों में समावेशन होना चाहिये तभी समाज को सही दिशा प्रदान की जा सकेगी।

मीडिया समाज को अनेक प्रकार से नेतृत्व प्रदान करता है। इससे समाज की विचारधारा प्रभावित होती है। मीडिया को प्रेरक की भूमिका में भी उपस्थित होना चाहिये जिससे समाज एवं सरकारों को प्रेरणा व मार्गदर्शन प्राप्त हो। मीडिया समाज के विभिन्न वर्गों के हितों का रक्षक भी होता है। वह समाज की नीति, परंपराओं, मान्यताओं तथा सभ्यता एवं संस्कृति के प्रहरी के रूप में भी भूमिका निभाता है। पूरे विश्व में घटित विभिन्न घटनाओं की जानकारी समाज के विभिन्न वर्गों को मीडिया के माध्यम से ही मिलती है। अत: उसे सूचनाएँ निष्पक्ष रूप से सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करनी चाहिये।

मीडिया अपनी खबरों द्वारा समाज के असंतुलन एवं संतुलन में भी बड़ी भूमिका निभाता है। मीडिया अपनी भूमिका द्वारा समाज में शांति, सौहार्द, समरसता और सौजन्य की भावना विकसित कर सकता है। सामाजिक तनाव, संघर्ष, मतभेद, युद्ध एवं दंगों के समय मीडिया को बहुत ही संयमित तरीके से कार्य करना चाहिये। राष्ट्र के प्रति भक्ति एवं एकता की भावना को उभरने में भी मीडिया की अहम भूमिका होती है। शहीदों के सम्मान में प्रेरक उत्साहवर्द्धक खबरों के प्रसारण में मीडिया को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिये। मीडिया विभिन्न सामाजिक कार्यों द्वारा समाज सेवक की भूमिका भी निभा सकता है। भूकंप, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक या मानवकृत आपदाओं के समय जनसहयोग उपलब्ध कराकर मानवता की बहुत बड़ी सेवा कर सकता है। मीडिया को सद्प्रवृत्तियों के अभिवर्द्धन हेतु भी आगे आना चाहिये।

मीडिया की बहुआयामी भूमिका को देखते हुए कहा जा सकता है कि मीडिया आज विनाशक एवं हितैषी दोनों भूमिकाओं में सामने आया है। अब समय आ गया है कि मीडिया अपनी शक्ति का सदुपयोग जनहित में करे और समाज का मागदर्शन करे ताकि वह भविष्य में भस्मासुर न बन सके।

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