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“हुनर से रोजगार तक” : समर्थ भारत के मंच से कौशल–क्रांति का राष्ट्रीय उद्घोष

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Dainik India News

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“हुनर से रोजगार तक” : समर्थ भारत के मंच से कौशल–क्रांति का राष्ट्रीय उद्घोष

दैनिक इंडिया न्यूज़,नई दिल्ली।जब राष्ट्र के भविष्य को दिशा देने वाले विचार, नीति और पुरुषार्थ एक ही मंच पर समवेत होते हैं, तब साधारण आयोजन भी इतिहासबोध में परिवर्तित हो जाता है। ऐसा ही दृश्य दिनांक 15 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के एनएमडीसी कन्वेंशन सेंटर में देखने को मिला, जहाँ भाऊराव देवरस सेवा न्यास के मार्गदर्शन में संचालित “समर्थ भारत” प्रकल्प के अंतर्गत एक दिवसीय राष्ट्रीय विचार–गोष्ठी का आयोजन हुआ। यह गोष्ठी केवल संवाद नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की संकल्प–भूमि बनकर उभरी।


गोष्ठी का केंद्रीय विषय— “कौशल विकास से समर्थ युवा, समर्थ युवा से समर्थ भारत”—अपने आप में राष्ट्रनिर्माण की स्पष्ट घोषणा था। मंच से उठे विचारों ने यह रेखांकित किया कि कौशल आज केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण, आर्थिक स्वावलंबन और राष्ट्रीय आत्मविश्वास की अनिवार्य शर्त बन चुका है। यही कारण रहा कि सभागार में उपस्थित प्रत्येक वर्ग—युवा, उद्योग, नीति और समाज—इस विचार से स्वयं को जुड़ा हुआ अनुभव करता रहा।


इस राष्ट्रीय विमर्श में देश के विभिन्न राज्यों से आए सामाजिक कार्यकर्ता, सफल प्रशिक्षु, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के लगभग 150 उच्चाधिकारी, दानदाता और नीति–निर्माण से जुड़े प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। विशेष रूप से एस्सार ग्रुप से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों की सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि उद्योग जगत कौशल–आधारित भारत निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने को तत्पर है।


कार्यक्रम की गरिमा उस समय और अधिक बढ़ गई जब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने मुख्य वक्ता के रूप में युवाशक्ति, राष्ट्रधर्म और कौशल–संस्कृति के त्रिवेणी संगम पर अपने विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कौशल को संस्कार से नहीं जोड़ा गया, तो वह केवल तकनीक रह जाएगा; और यदि संस्कार को कौशल का आधार बना दिया गया, तो वही राष्ट्रनिर्माण की शक्ति बन जाता है।


भाऊराव देवरस सेवा न्यास के अध्यक्ष ओमप्रकाश गोयल की उपस्थिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख भरत भूषण अरोरा सहित अन्य वक्ताओं ने युवाओं के लिए हुनर आधारित प्रशिक्षण की आवश्यकता पर गंभीर विमर्श किया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति तभी वरदान बनेगी, जब वह प्रशिक्षित, अनुशासित और उद्देश्यपूर्ण होगी।


इस अवसर पर सीतापुर से विधान परिषद सदस्य तथा विधान परिषद की लेखा समिति के सदस्य पवन सिंह चौहान ने सदस्य संरक्षक मण्डल के रूप में सहभाग किया। उन्होंने कहा कि “समर्थ भारत” जैसी पहलें युवाओं को केवल रोजगार के योग्य नहीं बनातीं, बल्कि उन्हें राष्ट्र के प्रति जवाबदेह नागरिक के रूप में विकसित करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय अनुशासन, कौशल विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व—ये तीनों मिलकर भारत को दीर्घकालिक रूप से समर्थ राष्ट्र बनाते हैं।


कार्यक्रम में आईईटी के रजिस्ट्रार प्रदीप बाजपेई, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अरुण द्विवेदी, समर्थ भारत, लखनऊ के संयोजक विवेक, सह संयोजक देवेश कुमार श्रीवास्तव, आलोक, मनोज मिश्रा, सुरेन्द्र, अंबुज और प्रेम सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की सक्रिय उपस्थिति रही। प्रत्येक उपस्थिति इस बात का संकेत थी कि समर्थ भारत अब केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप ले चुका है।
समापन सत्र में उद्योग प्रतिनिधियों की ओर से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि उद्योग, समाज और सरकार—तीनों के समन्वय से ही हुनर से रोजगार की यात्रा को गति मिल सकती है। वक्ताओं ने युवाओं को आश्वस्त किया कि यदि वे कौशल के पथ पर आगे बढ़ते हैं, तो उद्योग उनके साथ खड़ा है।
समग्रतः, यह राष्ट्रीय विचार–गोष्ठी केवल एक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि कौशल–आधारित राष्ट्रनिर्माण की वैचारिक उद्घोषणा बनकर उभरी—जहाँ प्रत्येक वक्तव्य अगले विचार के लिए जिज्ञासा जगाता रहा और हर विचार भारत को समर्थ बनाने के संकल्प को और अधिक दृढ़ करता चला गया।

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