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2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का जोरदार प्रदर्शन

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Dainik India News

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2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का जोरदार प्रदर्शन

सेवा सुरक्षा और आजीविका बचाने की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में सौंपा गया ज्ञापन

दैनिक इंडिया न्यूज़

लखनऊ। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर सोमवार को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, लखनऊ द्वारा 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से प्रेषित किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने अपर जिला मजिस्ट्रेट महेंद्रपाल सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा जारी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) संबंधी अधिसूचना तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के बाद देश के विभिन्न राज्यों में वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। यदि इन शिक्षकों पर भी TET अनिवार्य किया जाता है, तो लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और आजीविका प्रभावित हो सकती है।

महासंघ ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षक उस समय निर्धारित सभी शैक्षिक योग्यताओं एवं सेवा शर्तों को पूरा करते हुए नियमित रूप से कार्यरत हैं। ऐसे शिक्षकों पर वर्षों बाद नई पात्रता शर्त लागू करना नैसर्गिक न्याय और संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है। संगठन ने सरकार से मांग की कि पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त रखते हुए उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

देशव्यापी अभियान के अंतर्गत आयोजित इस प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष अनुराग सिंह राठौर, जिला महामंत्री धर्मेंद्र सिंह, संगठन मंत्री आशीष मिश्रा, प्रांतीय मंत्री श्वेता सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में रुचि अरोड़ा, मंजुला रानी, मंसूर अहमद, निष्ठा मिश्रा, समीक्षा मिश्रा, कंचन यादव, निशा सिंह, अर्चना शुक्ला, वंदना मिश्रा, नरेंद्र कुमार, नीरज मिश्रा, कुंवर अवधेश, रोहित सिंह, राजेश यादव, रामकृष्ण, विजय चौरसिया, अशोक गुप्ता, बालकृष्ण सिंह, ऐश्वर्या शुक्ला, निर्दोष दीक्षित, निखिल निगम, राकेश खन्ना, कृपाशंकर, नीलम प्रकाश, मनीष बाजपेयी, सोनी टंडन, मोनिका सक्सेना, ज्योति सिंह, शिप्रा तिवारी, सत्यप्रकाश शुक्ला, सर्वेश कुमारी, मीना कुमारी, रीना वर्मा, अंशुमान एवं अक्षय मिश्रा सहित सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सहभागिता की।

"पूर्व नियुक्त शिक्षकों के अधिकारों से समझौता नहीं"

महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और संबंधित संस्थाएं शिक्षकों की इस न्यायोचित मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेतीं, तो देशभर में व्यापक आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। संगठन का कहना है कि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने में योगदान दे रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

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