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ज्येष्ठ के 8 मंगल पर “प्लास्टिक मुक्त भंडारा” का आह्वान, आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण की मुहिम तेज

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ज्येष्ठ के 8 मंगल पर “प्लास्टिक मुक्त भंडारा” का आह्वान, आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण की मुहिम तेज

 दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ। इस वर्ष ज्येष्ठ माह के अद्वितीय संयोग ने सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों को विशेष रूप से सक्रिय कर दिया है। दो ज्येष्ठ माह होने के कारण कुल 8 मंगलवार पड़ रहे हैं, जिनमें शहर के विभिन्न स्थानों पर बड़े स्तर पर भंडारों का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी, लेकिन इसी के साथ एक गंभीर चिंता भी सामने आ रही है—प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग।

धार्मिक आयोजनों में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक के ग्लास, थाली, कटोरी और चम्मच का उपयोग न केवल गंदगी फैलाता है, बल्कि पर्यावरण और जीव-जंतुओं के लिए भी घातक साबित होता है। सड़कों, नालियों और जलाशयों में फैला यह प्लास्टिक प्रदूषण को बढ़ावा देता है और बीमारियों को जन्म देता है।

इसी संदर्भ में सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों द्वारा “प्लास्टिक मुक्त भंडारा” अभियान की शुरुआत की जा रही है। इस मुहिम के तहत लोगों से अपील की जा रही है कि वे प्लास्टिक के स्थान पर पत्तों से बने पत्तल-कटोरी, लकड़ी के चम्मच, पानी के लिए कुल्हड़ या फिर स्टील के बर्तनों का उपयोग करें। यह न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित विकल्प हैं, बल्कि भारतीय परंपरा और संस्कृति के भी अनुरूप हैं।

विशेषज्ञों और धर्माचार्यों का भी मानना है कि प्रकृति की उपेक्षा कर किसी भी देवता को प्रसन्न नहीं किया जा सकता। सच्ची भक्ति वही है, जिसमें सेवा के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा का भाव भी शामिल हो। यदि भंडारे जैसे पुण्य कार्य पर्यावरण के अनुकूल तरीके से किए जाएं, तो उनका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल एक अपील नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी है। यदि आज हम सजग नहीं हुए, तो प्रदूषण की यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।

अंत में सभी श्रद्धालुओं और आयोजकों से विनम्र निवेदन है कि इस ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार को “प्लास्टिक मुक्त भंडारा” आयोजित कर एक स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण में अपना योगदान दें। यही सच्ची भक्ति, यही सच्चा पुण्य है।

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