दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।लखनऊ की सड़कों पर रेंगती रफ्तार, बारिश में जलमग्न होते प्रमुख मार्ग और धार्मिक स्थलों तक पहुंचने में आने वाली परिवहन की दिक्कत—इन तीनों मोर्चों पर अब एक साथ काम शुरू होने जा रहा है। पीजीआई के सामने करीब डेढ़ किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर प्रस्तावित है, इंदिरा नगर और गोमतीनगर के जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 30 करोड़ रुपये से दो बड़े नालों का निर्माण कराया जाएगा और श्रद्धालुओं के लिए चंद्रिका देवी होते हुए नैमिषारण्य तक सीधी मिनी बस सेवा शुरू करने की तैयारी है। इन योजनाओं का असर केवल यातायात या जलनिकासी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजधानी की रोजमर्रा की आवाजाही और धार्मिक पर्यटन की कनेक्टिविटी पर भी दिखाई देगा।
इनमें सबसे अधिक तत्काल राहत जिस परियोजना से मिलने की उम्मीद है, वह पीजीआई के सामने प्रस्तावित फ्लाईओवर है। लखनऊ-रायबरेली मार्ग पर पीजीआई के सामने सुबह से शाम तक जाम की स्थिति मरीजों, तीमारदारों और आम यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बनती रही है। प्रस्तावित फ्लाईओवर करीब डेढ़ किलोमीटर लंबा होगा और इसे केंद्रीय सड़क निधि यानी सीआरएफ से बनाए जाने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। यहां यातायात का दबाव कितना अधिक है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पीजीआई और मोहनलालगंज क्षेत्र की स्थानीय आवाजाही समेत प्रतिदिन करीब 1.25 से 1.40 लाख वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। लेकिन जाम की कहानी केवल वाहनों की संख्या तक सीमित नहीं है।
सड़क के किनारे और फुटपाथों पर अतिक्रमण कर लगी सौ से अधिक दुकानें भी यातायात की रफ्तार रोकने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। पीजीआई जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान के सामने जाम लगने का सीधा असर उन मरीजों और तीमारदारों पर पड़ता है, जिनके लिए कुछ मिनट भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसी समस्या को देखते हुए सांसद प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी ने सांसद राजनाथ सिंह के समक्ष फ्लाईओवर की आवश्यकता रखी थी। इसके बाद सांसद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर इस दिशा में पहल का अनुरोध किया। हालांकि यह मांग अचानक सामने नहीं आई थी; इसकी पृष्ठभूमि में वर्षों से चली आ रही यातायात समस्या है।
पिछले वर्ष सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में शहीद पथ से आगे पीजीआई-मोहनलालगंज तक पीक ऑवर में लगने वाले जाम का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। तब जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को जाम के कारणों का अध्ययन कर उसके स्थायी समाधान के विकल्प तलाशने के निर्देश दिए थे। करीब चार वर्ष पहले भी पीजीआई के सामने फ्लाईओवर की योजना बनाई गई थी, लेकिन आउटर रिंग रोड के निर्माण के बाद क्षेत्र की स्थिति बदलने से प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। अब एनएचएआई की ओर से सीआरएफ के माध्यम से फ्लाईओवर निर्माण का सुझाव दिए जाने के बाद इस योजना को फिर गति मिलने की उम्मीद जगी है।
सड़क की समस्या का समाधान अपनी जगह है, लेकिन राजधानी के सामने दूसरी बड़ी चुनौती हर वर्ष बारिश के साथ लौटने वाला जलभराव है। इंदिरा नगर और गोमतीनगर के कई हिस्सों में भारी बारिश के दौरान सड़कें और अंडरपास जलमग्न हो जाते हैं। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से दो बड़े नालों का निर्माण प्रस्तावित किया गया है। मुख्य अभियंता महेश वर्मा के अनुसार एक नाला मुंशी पुलिया से कुकरैल तक बनाया जाएगा, जिससे इंदिरा नगर और आसपास के इलाकों की जलनिकासी व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। मगर सबसे गंभीर तस्वीर गोमतीनगर के उस अंडरपास की रही है, जो हर तेज बारिश में प्रशासनिक व्यवस्थाओं की परीक्षा लेता है।
विपिन खंड स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक के सामने बने अंडरपास में करीब दो वर्ष पहले हुई तेज बारिश के दौरान इतना पानी भर गया था कि सड़क और अंडरपास का अंतर ही मिट गया था। पानी में बच्चों के नहाने तक की तस्वीरें सामने आई थीं और पूरा मार्ग स्विमिंग पूल जैसा दिखाई देने लगा था। इस घटना के बाद स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की मांग तेज हुई। अब यहां करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से नया नाला प्रस्तावित है, जो अंडरपास से शुरू होकर भागीदारी भवन के सामने से होते हुए नगर निगम बैरल तक जाएगा। इसके बनने से विपिन खंड, विपुल खंड और आसपास के कई सेक्टरों को जलभराव से राहत मिलने की उम्मीद है।
राजधानी की इन बुनियादी समस्याओं के बीच धार्मिक यात्रियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सुविधा प्रस्तावित है। रोडवेज चंद्रिका देवी मंदिर होते हुए नैमिषारण्य स्थित मां ललिता देवी धाम तक सीधी मिनी बस सेवा शुरू करने की तैयारी कर रहा है। क्षेत्रीय परिवहन निगम प्रस्तावित मार्ग का सर्वे करेगा। योजना के अनुसार बस कैसरबाग से चलकर बीकेटी स्थित चंद्रिका देवी मंदिर के निकट से गोमती पुल, माल, भरावन, अतरौली, गोंडवा और हत्याहरण तीर्थ होते हुए नैमिषारण्य पहुंचेगी। अभी श्रद्धालुओं को इस धार्मिक यात्रा के लिए कई स्तरों पर साधन बदलने की परेशानी उठानी पड़ती है; सीधी बस सेवा इस व्यवस्था को काफी सरल बना सकती है।
क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन के अनुसार बस संचालन शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है और अगस्त के अंतिम सप्ताह तक सेवा शुरू होने की उम्मीद है। लखनऊ से नैमिषारण्य की दूरी करीब 85 किलोमीटर है, जबकि चंद्रिका देवी होकर प्रस्तावित मार्ग लगभग 53 किलोमीटर का होगा। यानी श्रद्धालुओं को करीब 32 किलोमीटर कम दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे यात्रा का समय और किराया दोनों घट सकते हैं। योजना यहीं रुकने वाली नहीं है; दूसरे चरण में लखनऊ से भवरेश्वर महादेव के लिए भी बस सेवा शुरू करने की तैयारी है।
एक ओर पीजीआई के सामने फ्लाईओवर राजधानी की सबसे व्यस्त चिकित्सा पट्टी में यातायात का दबाव कम करने की कोशिश है, दूसरी ओर 30 करोड़ रुपये के नाले उन इलाकों के लिए स्थायी जलनिकासी की उम्मीद जगाते हैं, जहां बारिश के साथ जनजीवन ठहर जाता है। इनके साथ चंद्रिका देवी और नैमिषारण्य के बीच सीधी बस सेवा धार्मिक पर्यटन को सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं तय समय और गुणवत्ता के साथ धरातल पर उतरती हैं तो लखनऊ को जाम, जलभराव और परिवहन की तीन पुरानी चुनौतियों से एक साथ राहत मिलने की राह खुल सकती है।