दैनिक इंडिया न्यूज़ | लखनऊ,प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को लेकर अब गंभीर प्रश्न खड़े होने लगे हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया है कि जिन स्मार्ट मीटरों की तकनीकी जांच कराई गई, वह परीक्षण ऐसी प्रयोगशाला में हुआ जो इस प्रकार के उन्नत स्मार्ट मीटरों की व्यापक एवं मानक आधारित जांच के लिए अधिकृत ही नहीं है।
परिषद के अनुसार विभिन्न कंपनियों के 24 स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के नमूने लेकर मध्यांचल की हाईटेक परीक्षण प्रयोगशाला में उनकी जांच शुरू कराई गई और उसी के आधार पर मीटरों की शुद्धता संबंधी अंतरिम रिपोर्ट तैयार की गई। किंतु जिस प्रयोगशाला में यह परीक्षण किया गया, वह केवल साधारण विद्युत मीटरों के मानकों की जांच के लिए मान्यता प्राप्त है।
परिषद ने स्पष्ट किया कि उक्त प्रयोगशाला मुख्य रूप से भारतीय मानक आईएस 14697 एवं आईएस 13779 के अंतर्गत आने वाले सामान्य मीटरों की जांच के लिए अधिकृत है, जबकि स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के लिए निर्धारित भारतीय मानक आईएस 16444 है। इस मानक के अनुरूप परीक्षण के लिए विशेष तकनीकी दक्षता एवं अधिकृत प्रयोगशाला की आवश्यकता होती है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि कुछ सामान्य पैरामीटरों की जांच साधारण प्रयोगशाला में संभव है, किंतु स्मार्ट मीटरों की महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील तकनीकी जांच वहां नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटरों में विद्युत आवश्यकताओं, ऊर्जा खपत, रेडियो प्रौद्योगिकी, संचार क्षमता और कार्यात्मक दक्षता से जुड़े परीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, जिनके लिए मध्यांचल की प्रयोगशाला अधिकृत नहीं है।
परिषद ने पावर कॉरपोरेशन पर उपभोक्ताओं के हितों के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए मांग की है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की जांच केवल भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा अधिकृत एवं मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से ही कराई जाए। परिषद का कहना है कि यदि परीक्षण प्रक्रिया पारदर्शी एवं मानक अनुरूप नहीं होगी, तो उपभोक्ताओं का विश्वास पूरी तरह प्रभावित होगा।
उल्लेखनीय है कि प्रदेशभर में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। उपभोक्ताओं द्वारा अधिक बिलिंग, नेटवर्क समस्या, मीटर रीडिंग में गड़बड़ी तथा संचार तंत्र की विफलता जैसी शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। ऐसे में परीक्षण प्रक्रिया पर उठे सवालों ने पूरे स्मार्ट मीटर अभियान की विश्वसनीयता पर गंभीर बहस खड़ी कर दी है।