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टिकरी बॉर्डर के पास विकास का दावा बेदम, लेखराम पार्क और सर्वोदय कन्या विद्यालय के रास्ते बने दुश्वारी का सबब

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Dainik India News

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विधायक बदले, सांसद बदले, पार्षद बदले और सरकारें भी बदलीं, लेकिन लेखराम पार्क की सड़कें नहीं बदलीं—बरसात में घुटनों तक पानी, दुर्गंध और जलभराव के बीच स्कूल जाने को मजबूर बच्चे; सवाल यह कि क्या अब ‘जेन अल्फा’ को भी अपने अधिकार के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा?

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।

राजधानी दिल्ली में विकास के दावों के बीच मुंडका विधानसभा क्षेत्र का टिकरी बॉर्डर मेट्रो स्टेशन से सटा लेखराम पार्क क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं की बदहाली से जूझ रहा है। वर्षों से सड़क, जलनिकासी और जलभराव की समस्या झेल रहे स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के चेहरे बदलते रहे, चुनावी घोषणाएं बदलती रहीं, सरकारें बदलती रहीं, मगर धरातल पर उनकी दुश्वारियां जस की तस बनी हुई हैं।

सबसे गंभीर स्थिति सर्वोदय कन्या विद्यालय के आसपास बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार बिना बारिश के भी विद्यालय के आसपास जलभराव की स्थिति बच्चों के लिए परेशानी का सबब बनी रहती है। बरसात के दिनों में हालात और विकराल हो जाते हैं। सड़क पर घुटनों के बराबर पानी जमा होने के बीच छात्राओं को विद्यालय पहुंचने और छुट्टी के बाद वापस घर लौटने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

यह दृश्य केवल जलभराव का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जिसमें राजधानी के बच्चे आज भी सामान्य और सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जिस पीढ़ी को ‘जेन अल्फा’ कहा जा रहा है, उसे आधुनिक दिल्ली की सुविधाओं के बजाय जलमग्न रास्तों, दुर्गंध और कीचड़ से होकर स्कूल जाना पड़े तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि चुनावों के दौरान सड़क निर्माण, जलनिकासी और क्षेत्र के कायाकल्प के आश्वासन बार-बार दिए गए। मगर चुनाव बीतते ही वादों की चमक फीकी पड़ गई और समस्याएं फिर प्रशासनिक उपेक्षा के अंधकार में चली गईं। नागरिकों के अनुसार वर्षों में विधायक, सांसद, पार्षद और सरकारें बदलती रहीं, लेकिन लेखराम पार्क की सड़क और जलनिकासी व्यवस्था की तस्वीर में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।

विडंबना देखिए—पार्षद भाजपा का, विधायक भाजपा का और सांसद भी भाजपा का, फिर भी स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क और जलनिकासी जैसी प्राथमिक समस्या का स्थायी समाधान जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि जब राजनीतिक स्तर पर जिम्मेदारी का अभाव नहीं है, तो फिर कार्रवाई के स्तर पर यह शिथिलता क्यों?

बारिश के दिनों में स्थिति केवल आवागमन तक सीमित नहीं रहती। लंबे समय तक जमा पानी से आसपास के घरों में सीलन, दुर्गंध और नमी की समस्या बढ़ने की शिकायतें सामने आती हैं। विद्यालय जाने वाले बच्चों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। अभिभावकों की चिंता है कि बच्चों को प्रतिदिन ऐसे रास्ते से गुजरना पड़ता है, जहां जलभराव के कारण फिसलने, गिरने और संक्रमण जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।

क्या दिल्ली सरकार ‘जेन अल्फा’ को भी अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन करने पर मजबूर करेगी? यह सवाल अब स्थानीय नागरिकों की बेचैनी को स्वर दे रहा है। बच्चों का विद्यालय तक सुरक्षित पहुंचना कोई राजनीतिक कृपा नहीं, बल्कि उनकी बुनियादी आवश्यकता है। इसके लिए किसी आंदोलन, प्रदर्शन अथवा चुनावी मौसम की प्रतीक्षा क्यों हो?

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार से स्थानीय लोगों को अब महज आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध और दृश्यमान कार्रवाई की अपेक्षा है। मुख्यमंत्री को उत्तर प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों का उदाहरण भी देखना चाहिए, जहां स्थानीय स्तर की सड़क, नाली और जलनिकासी जैसी समस्याओं को कई स्थानों पर पार्षद अथवा स्थानीय निकाय के स्तर पर ही निस्तारित करने का प्रयास किया जाता है। राजधानी दिल्ली में ऐसी मूलभूत समस्या का वर्षों तक लंबित रहना निश्चित रूप से प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

यह मामला किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य और नागरिकों के सम्मानजनक जीवन का है। लेखराम पार्क के लोगों को किसी नई घोषणा की नहीं, बल्कि सड़क पर काम शुरू होने की जरूरत है। सर्वोदय कन्या विद्यालय तक पहुंचने वाले मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए, जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था हो और जलभराव की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस तकनीकी समाधान लागू किया जाए।

अब गेंद दिल्ली सरकार, नगर निगम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के पाले में है। यदि राजधानी के एक पुराने आवासीय क्षेत्र में बच्चों को स्कूल जाने के लिए घुटनों तक पानी से होकर गुजरना पड़े, तो यह केवल एक सड़क की समस्या नहीं—यह शासन की संवेदनशीलता की परीक्षा है।

लेखराम पार्क के नागरिक अब पूछ रहे हैं—आखिर वह दिन कब आएगा, जब उनके बच्चे पानी और कीचड़ से संघर्ष किए बिना सुरक्षित रास्ते से स्कूल जा सकेंगे?

दैनिक इंडिया न्यूज़ की यह ग्राउंड रिपोर्ट प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करती है। उम्मीद है कि संबंधित विभाग इसे महज एक और शिकायत मानकर फाइलों में नहीं दबाएंगे, बल्कि मौके का निरीक्षण कर सड़क निर्माण और जलनिकासी की ठोस, समयबद्ध कार्ययोजना पर तत्काल काम शुरू करेंगे।

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