
भगवान जगन्नाथ के श्रीचरणों में उमड़ा जनसागर, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक सहित हजारों श्रद्धालुओं ने राष्ट्रकल्याण की कामना की

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।राजधानी लखनऊ उस समय अद्वितीय आध्यात्मिक चेतना, भक्तिरस और सनातन सांस्कृतिक वैभव से अनुप्राणित हो उठी, जब इस्कॉन लखनऊ के तत्वावधान में भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा की भव्य रथयात्रा अपूर्व श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक उल्लास के मध्य संपन्न हुई। नगर की प्रमुख सड़कों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसमुद्र मानो स्वयं श्रीजगन्नाथ के दिव्य सान्निध्य में आत्मसमर्पण का उत्सव मना रहा था।

इस दिव्य अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने रथयात्रा में सहभागिता कर भगवान श्रीजगन्नाथ के श्रीचरणों में राष्ट्र की अखंडता, समृद्धि, शांति और समग्र मानवता के कल्याण की मंगलकामना की। उनके साथ राजधानी के अनेक विशिष्ट जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, संत-महात्मा एवं हजारों श्रद्धालुओं ने रथ को खींचकर स्वयं को धन्य अनुभव किया।

रथयात्रा के दौरान हरिनाम संकीर्तन, मृदंग एवं करताल की मधुर ध्वनियों से सम्पूर्ण वातावरण कृष्णमय हो उठा। भक्ति संगीत, मुकुंद रॉक बैंड की मनोहारी प्रस्तुति, आध्यात्मिक नाट्य मंचन तथा महाप्रसाद वितरण ने इस आयोजन को जन-जन के लिए अविस्मरणीय आध्यात्मिक पर्व बना दिया।

इस अवसर पर परम पूज्य भक्ति पद्म सौरभ प्रचारक स्वामी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने श्रद्धालुओं को दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिसिंचित किया।

रथयात्रा के प्रमुख संयोजक एवं इस्कॉन लखनऊ के वरिष्ठ प्रचारक अपरिमेय श्याम जी दास ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ केवल किसी एक संप्रदाय अथवा समुदाय के आराध्य नहीं हैं, बल्कि वे संपूर्ण सृष्टि के पालनकर्ता, लोकमंगल के अधिष्ठाता तथा समस्त मानवता के करुणामय संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि श्रीजगन्नाथ का रथ प्रत्येक मनुष्य को यह संदेश देता है कि जीवन की वास्तविक सार्थकता ईश्वर के प्रति समर्पण, निष्काम सेवा, करुणा, प्रेम और लोककल्याण में निहित है।

उन्होंने आगे कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ का विशाल स्वरूप समस्त मानवता को समान दृष्टि से देखने की प्रेरणा देता है। उनके विशाल नेत्र प्रत्येक जीव पर समान कृपा बरसाते हैं तथा उनका रथ यह उद्घोष करता है कि प्रभु स्वयं अपने भक्तों के द्वार तक आते हैं। यही कारण है कि रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण, सांस्कृतिक एकात्मता और वैश्विक बंधुत्व का विराट अभियान है।

अपरिमेय श्याम जी दास ने कहा कि वर्तमान भौतिकतावादी युग में जब मनुष्य तनाव, अशांति और आत्मिक रिक्तता से जूझ रहा है, तब भगवान श्रीजगन्नाथ की भक्ति जीवन को संतुलन, सदाचार, आत्मबल और परम आनंद प्रदान करती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे केवल उत्सव तक सीमित न रहें, बल्कि श्रीहरि के नाम-स्मरण, भगवद्भक्ति और सेवा को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाएं।

श्रद्धालुओं का मत था कि भगवान श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा में सम्मिलित होना केवल एक धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि आत्मा के परमात्मा से साक्षात्कार का दुर्लभ अवसर है। मान्यता है कि श्रद्धा एवं भक्ति से रथ के दर्शन अथवा रथ की रस्सी खींचने मात्र से भी प्रभु की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, सुख, शांति और मंगल का मार्ग प्रशस्त होता है।

राजधानी लखनऊ की यह भव्य रथयात्रा एक बार पुनः यह सिद्ध कर गई कि सनातन संस्कृति केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि विश्वबंधुत्व, सहअस्तित्व, प्रेम, सेवा और आध्यात्मिक उत्कर्ष का शाश्वत जीवन-दर्शन है। भगवान श्रीजगन्नाथ की यह दिव्य यात्रा श्रद्धालुओं के हृदयों में भक्ति की ऐसी अमिट छाप छोड़ गई, जिसकी आध्यात्मिक अनुभूति दीर्घकाल तक जनमानस को आलोकित करती रहेगी।