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527 दीपों की दिव्य सलामी से गूँजा लखनऊ, कारगिल के अमर रणबांकुरों के चरणों

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Dainik India News

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दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ, 26 जुलाई2026।जब राष्ट्र अपनी स्वतंत्र चेतना की रक्षा हेतु प्राणों का उत्सर्ग करने वाले अमर वीरों का स्मरण करता है, तब इतिहास केवल पढ़ा नहीं जाता, बल्कि प्रत्येक भारतीय के हृदय में पुनः जीवंत हो उठता है। कारगिल विजय दिवस के पावन एवं गौरवमय अवसर पर भारतीय जनता पार्टी, उत्तर प्रदेश के एनजीओ प्रकोष्ठ द्वारा लखनऊ कैंट स्थित स्मृतिका युद्ध स्मारक में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह ऐसा ही एक अनुपम राष्ट्रोत्सव बन गया, जहाँ 527 दीपों की ज्योति ने उन 527 अमर बलिदानियों के अदम्य पराक्रम को साक्षात् प्रकाशमय कर दिया। दीपों की प्रत्येक लौ मानो राष्ट्ररक्षा हेतु न्योछावर हुए प्रत्येक सैनिक के अमर त्याग की अमिट गाथा का उद्घोष कर रही थी।

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भारत माता के मानचित्र के समक्ष प्रज्ज्वलित 527 दीप केवल दीप नहीं थे, बल्कि वे भारत की सामूहिक कृतज्ञता, राष्ट्रीय अस्मिता और अटूट श्रद्धा के दिव्य प्रतीक थे। दीपों की स्वर्णिम आभा में सम्पूर्ण स्मारक राष्ट्रभक्ति के अप्रतिम तेज से आलोकित हो उठा। उपस्थित प्रत्येक नागरिक की दृष्टि श्रद्धा से नत थी और प्रत्येक हृदय में एक ही भाव उदित हो रहा था—राष्ट्र सर्वोपरि है, क्योंकि इसकी रक्षा के लिए किसी माँ ने अपना पुत्र और किसी पत्नी ने अपना सुहाग अर्पित किया है।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. नीरज सिंह ने महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल, विधायक डॉ. नीरज बोरा, विधायक ओ.पी. श्रीवास्तव, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान तथा रामचंद्र प्रधान के साथ दीप प्रज्वलित कर अमर शहीदों को कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से विनम्र श्रद्धासुमन अर्पित किए। जैसे ही दीप प्रज्ज्वलित हुए, सम्पूर्ण वातावरण में एक ऐसा आध्यात्मिक और राष्ट्रीय भाव प्रस्फुटित हुआ जिसने प्रत्येक उपस्थित जन को भावविभोर कर दिया।

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समारोह का सर्वाधिक भावुक क्षण तब उपस्थित हुआ जब कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों तथा शहीदों के परिजनों को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज कुमार पांडेय के परिजनों तथा वीर शहीद सुनील जंग के परिवार का सम्मान करते समय अनेक उपस्थित जनों की आँखें नम हो उठीं। यह सम्मान केवल कुछ परिवारों का नहीं था, बल्कि उन सभी माताओं के त्याग का अभिनंदन था जिन्होंने राष्ट्ररक्षा के लिए अपने हृदय के टुकड़े भारत माता के चरणों में समर्पित कर दिए।

अपने प्रेरणास्पद उद्बोधन में डॉ. नीरज सिंह ने कहा कि भारतीय सैनिक केवल सीमाओं के प्रहरी नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा के अमर संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब भारत अपने वीर जवानों का स्मरण करेगा, तब-तब उन अमर बलिदानियों का तेज आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर प्रज्ज्वलित रहेगा। उन्होंने कहा कि आज प्रज्ज्वलित किए गए 527 दीप सम्पूर्ण राष्ट्र की ओर से उन अमर शहीदों के प्रति अनंत कृतज्ञता और श्रद्धा का प्रतीक हैं, जिनके सर्वोच्च बलिदान के कारण भारत का मस्तक आज भी विश्व के समक्ष गौरव से ऊँचा है।

कार्यक्रम के संयोजक हेमंत दीक्षित के कुशल निर्देशन में सेंचुरियन डिफेंस अकादमी के छात्र-छात्राओं ने अनुशासन, उत्साह और राष्ट्रनिष्ठा का अनुपम परिचय दिया। जैसे ही "भारत माता की जय", "वंदे मातरम्" और "अमर शहीद अमर रहें" के गगनभेदी उद्घोष सम्पूर्ण परिसर में गूँजे, ऐसा प्रतीत हुआ मानो कारगिल की दुर्गम चोटियों पर गूँजने वाला वही अदम्य साहस पुनः जीवित हो उठा हो। उपस्थित प्रत्येक नागरिक के रोम-रोम में राष्ट्रभक्ति का ज्वार उमड़ पड़ा।

समारोह में भारतीय सेना के जवान, उनके परिजन, भाजपा पदाधिकारी विवेक सिंह तोमर, सुशील तिवारी 'पम्मी', प्रवीण गर्ग, पूर्व सैनिक, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएँ तथा बड़ी संख्या में राष्ट्रप्रेमी नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में भारत की संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा हेतु सदैव समर्पित रहने का संकल्प दोहराया।

कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य विजय का स्मरण नहीं, बल्कि उस अमर राष्ट्रीय चेतना का महापर्व है जिसने यह सिद्ध कर दिया कि भारत का सैनिक प्राण दे सकता है, परंतु राष्ट्र का मस्तक कभी झुकने नहीं देता। उन अमर शहीदों के चरणों में समर्पित प्रत्येक दीप यह उद्घोष करता रहेगा कि जब तक भारत की धरा पर सूर्य का प्रकाश विद्यमान है, तब तक कारगिल के अमर बलिदानियों का यश, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति भारतीय जनमानस में चिरकाल तक अविनाशी बनी रहेगी।

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