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अयोध्या में इतिहास का पुनरारोपण : धर्मध्वजा के आरोहण ने राष्ट्र-चेतना को पुनः प्रज्वलित किया

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अयोध्या में इतिहास का पुनरारोपण : धर्मध्वजा के आरोहण ने राष्ट्र-चेतना को पुनः प्रज्वलित किया

दैनिक इंडिया न्यूज़ अयोध्या । अयोध्या धाम आज पुनः उस अद्वितीय, अलौकिक और अविनाशी क्षण का साक्षी बना, जिसकी प्रतीक्षा पाँच शताब्दियों से संपूर्ण भारतीय सभ्यता कर रही थी।श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भव्य भगवा ध्वज का आरोहण केवल एक धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा में निहित सनातन चैतन्य का दिव्य उद्गम है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के पवित्र कर-कमलों से सम्पन्न यह ऐतिहासिक अनुष्ठान, तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माननीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी की गरिमामयी उपस्थिति, इस क्षण को युगांतरकारी महत्ता प्रदान करती है। स्वर्णाभ सूर्य की किरणों के मध्य जब भगवा पताका आकाश में लहराई, तो सम्पूर्ण अयोध्या उमंग, उल्लास और अद्भुत आध्यात्मिक कंपन से अभिभूत हो उठी।

यह ध्वजारोहण उन असंख्य त्यागियों, तपस्वियों, बलिदानियों और संघर्षशील पीढ़ियों के संकल्पों का अनन्त पुरावर्तन है, जिन्होंने सत्य और धर्म की रक्षा हेतु अपने जीवन समर्पित किए। पाँच सौ वर्षों के अन्याय, आघात, विध्वंस और वंचना के पश्चात यह विजय केवल मंदिर की विजय नहीं—
यह भारतीय अस्मिता, सांस्कृतिक स्वाभिमान और सनातन धर्म की अजेयता का दृढ़ उद्घोष है।

यह क्षण हमें यह स्मरण कराता है कि भारत की संस्कृति खंडहरों में भी पुष्पित होती है, अंधकार में भी प्रकाश खोज लेती है और बाधाओं के मध्य भी अपने सत्य-संकल्प को जीवित रखती है। अयोध्या का यह नव-प्रकाशित पर्व आने वाली सहस्त्राब्दियों तक धर्म, मर्यादा और राष्ट्रधर्म का पथ आलोकित करता रहेगा।

इसी कड़ी में राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह जिनको संयोगवश शिखर पूजन के कार्यक्रम में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था , स्वयं को अत्यन्त धन्य, कृतकृत्य एवं भाव-विभोर अनुभव कर रहे हैं। उनके लिए यह केवल आध्यात्मिक इतिहासिक घटनाक्रम नहीं, बल्कि धर्म-संस्कृति के पुनरुद्धार के इस महान यज्ञ में प्रत्यक्ष सहभागिता का अमूल्य अवसर है।

उनका यह कथन स्वयं अयोध्या की पवित्र वायु में गुंजित हो उठा—
“यह केवल ध्वज का आरोहण नहीं, यह भारत के पुनर्जागरण का ध्वनित प्रस्थान-बिंदु है।”

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