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गोमती नगर फेस–2 में विराट हिंदू सम्मेलन का शंखनाद, संगठित चेतना से नवभारत निर्माण का उद्घोष • भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में उतरी नि. चेयरमैन माधुरी मद्धेशिया, महिला मतदाताओं का ध्रुवीकरण शुरू • बाढ़ की पीड़ा के बीच लखनऊ लौट रहे राजनाथ सिंह, तीन दिवसीय प्रवास में फैजुल्लागंज के पीड़ित परिवारों से करेंगे मुलाकात • <strong>यूपी के 22 ज़िलों में नल कनेक्शन देने का आंकड़ा 50 फ़ीसदी के पार</strong> • दिल्ली में सनातन विमर्श की नई कड़ी: जितेन्द्र प्रताप सिंह की अशोक तिवारी से शिष्टाचार भेंट • लोक भारती द्वारा आयोजित जल उत्सव माह का उद्घाटन सम्पन्न, • इरशाद ने थूक लगा कर बनाई रोटी, वीडियो वायरल होते ही ढाबाहुआ सील, आरोपी गिरफ्तार • जेई के नेतृत्व में चला बिजली सघन चेकिंग अभियान,उपभोक्ताओं में मचा हड़कंप • गोमती नगर फेस–2 में विराट हिंदू सम्मेलन का शंखनाद, संगठित चेतना से नवभारत निर्माण का उद्घोष • भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में उतरी नि. चेयरमैन माधुरी मद्धेशिया, महिला मतदाताओं का ध्रुवीकरण शुरू • बाढ़ की पीड़ा के बीच लखनऊ लौट रहे राजनाथ सिंह, तीन दिवसीय प्रवास में फैजुल्लागंज के पीड़ित परिवारों से करेंगे मुलाकात • <strong>यूपी के 22 ज़िलों में नल कनेक्शन देने का आंकड़ा 50 फ़ीसदी के पार</strong> • दिल्ली में सनातन विमर्श की नई कड़ी: जितेन्द्र प्रताप सिंह की अशोक तिवारी से शिष्टाचार भेंट • लोक भारती द्वारा आयोजित जल उत्सव माह का उद्घाटन सम्पन्न, • इरशाद ने थूक लगा कर बनाई रोटी, वीडियो वायरल होते ही ढाबाहुआ सील, आरोपी गिरफ्तार • जेई के नेतृत्व में चला बिजली सघन चेकिंग अभियान,उपभोक्ताओं में मचा हड़कंप •
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मन और अन्त:करण की एकता में, दोनों के मिलन में ही सुख है। इसी को योगिक शब्दावली में आत्मा और परमात्मा का मिलन कह सकते हैं। इस मिलन का ही दूसरा नाम योग है। आत्मा और परमात्मा के मिलन से दोनों के योग से एक ऐसे आनन्द का अविर्भाव होता है,जिसकी तुलना संसार के अन्य किसी भी सुख से नहीं की जा सकती।इसी सुख को  परमानन्द,जीवनमुक्ति, ब्रह्म-निर्वाह, आत्मोपलब्धि, प्रभु-दर्शन आदि नामों से पुकारा जाता है। प्रेम ही सम्पूर्ण सुखों का आधार है। आज प्रत्येक व्यक्ति सुखी जीवन के लिए तरह-तरह के साधन जुटाता है सुख के लिये हरसंभव प्रयत्न भी करता है किन्तु फिर भी अधिकांश लोग दु:खी एवं क्लान्त दिखाई देते हैं। इसका एकमात्र कारण है वे प्रेम को छोड़कर अन्यत्र सुख की खोज करते हैं जो बालू में तेल निकालने जैसा प्रयत्न है। सुख भोगने के लिए प्रेम को जीवन में उतारना होगा । इसी की साधना करनी होगी।दूसरों की बुराइयाँ ढूंढ़ने में हमारी दृष्टि अलग तरीके से और अपनी बात आने पर और तरीके से काम करती है। यदि यह दोष हटा दिया जाय और दूसरों की भाँति अपनी बुराई भी देखने लग जायें, दूसरों को सुधारने की चिन्ता करने की भाँति यदि अपने को सुधारने की भी चिन्ता करने लगें तो इतना बडा काम हो सकता है जितना सारी दुनियाँ को सुधार लेने पर ही हो सकना संभव है।चरित्र ही जीवन की आधार शिला है। मनुष्य संसार में जो कुछ सफलता, सौभाग्य, सुख प्राप्त करता है उसके मूल में उसके चरित्र की उच्चता ही रहती है। निर्बल चरित्र वाले अथवा चरित्रहीन व्यक्ति का जीवन निस्सार और महत्त्वशून्य है। चाहे वह सांसारिक दृष्टि से थोडा या अधिक धन प्राप्त करके आराम का जीवन व्यतीत करता हो पर अन्य लोगों की दृष्टि से वह कभी प्रतिष्ठा या सम्मान का पात्र नहीं हो सकता।- तपोनिष्ठ वेदमुर्ति पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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