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दो टूक :हल्दीघाटी हो या गनवान घाटी भारत ना झुका है, ना झुकेगा अगर कोई हमें उसका आएगा तो हम उसे छोड़ेंगे नहीं -रक्षा मंत्री

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Dainik India News

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दो टूक :हल्दीघाटी हो या गनवान घाटी भारत ना झुका है, ना झुकेगा अगर कोई हमें उसका आएगा तो हम उसे छोड़ेंगे नहीं -रक्षा मंत्री

हरिंद्र सिंह दैनिक इंडिया न्यूज़ :रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप महासम्मेलन में एक भाषण दिया। उन्होंने बयान में देश की अद्वितीय सामरिक ताकत, सुरक्षा और स्वाभिमान को महत्व दिया। उन्होंने कहा कि हमेशा से भारत अपने भूमि के लिए सम्मान की रक्षा करता आया है और आगे भी करता रहेगा।

श्री सिंह ने हल्दीघाटी और गलवान घाटी के उदाहरण को उठाकर दिखाया कि भारतीय सेना ने अपने इतिहास में किसी भी परिस्थिति में झुकने की अनुमति नहीं दी है। हल्दीघाटी की घटना में महाराणा प्रताप ने विजय के लिए लड़ाई दी थी, जबकि गलवान घाटी में वर्तमान में भारतीय सेना ने चीन के साथ तनावमय सीमा विवाद का सामना किया है। इन उदाहरणों से उन्होंने यह प्रमाणित किया कि भारत न कभी झुका है और न कभी झुकेगा।

उन्होंने भारतीय सेना की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर भी बल दिया और कहा कि हमारी सेनाएं हमेशा सम्मान की रक्षा करती हैं।

और देश की सुरक्षा के सेना लिए प्रतिबद्ध रहेंगी। उन्होंने उपस्थित जनता को समझाया कि उन्हें अपने गर्वपूर्ण इतिहास के पन्नों से प्रेरणा मिलेगी, जैसे महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज ने स्वाभिमान और साहस के साथ अपने जीवन को जीता है।

श्री सिंह ने देश के गर्व का जिक्र करते हुए कहा कि भारत कभी भी किसी को उकसाने की नीति नहीं अपनाता है, लेकिन अगर कोई देश हमें उकसाएगा तो हम उसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व में होने वाली सुरक्षा कार्रवाईयों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सेनाएं उरी और पुलवामा जैसी घटनाओं के बाद भी आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करती आ रही हैं। वे इस्तीफे के मुद्दे पर भी संवेदनशीलता जताकर दिखा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि आज की युद्ध प्रणाली बहुत व्यापक हो गई है और हमें तकनीकी और सामरिक तरीकों में अद्यतित रहना चाहिए। उन्होंने भारतीय सेना के मौजूदा मोड़ को स्वयंसेवक आंदोलन और सेना के नारे "भारत माता की जय" के साथ तुलना की और कहा कि हमें इस समय में अपनी ताकत को मजबूती से बनाए रखने की जरूरत है।

वे भी उज्जवल बुद्धि, बहुदलीय समर्थन, रक्षा और विदेशी सहयोग को महत्व देने का आह्वान करते हुए देशवासियों को उपहासपूर्ण ढंग से कहा कि हम अपने विरोधियों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।

यह बयान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के विश्वास को दिखाता है कि भारतीय सरकार और सुरक्षा एजेंसियां देश की सुरक्षा को लेकर निरंतर तत्पर और अनुकरणीय हैं। इससे देशवासियों को एक मजबूत संदेश मिलता है कि भारत सदैव अपने मान-सम्मान की रक्षा करेगा और किसी भी विनाशकारी ताकत के सामरिक आक्रमण का सामना करने के लिए तैयार हैं।

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