ब्रेकिंग न्यूज़
UPITS के चतुर्थ संस्करण का भव्य शुभारंभ, ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश : जितेन्द्र प्रताप सिंह | ग्रेटर नोएडा से दुनिया के बाजार पर यूपी की दस्तक यूपीआईटीएस-2026 का आगाज; छह साझेदार देशों के साथ 90 देशों की कारोबारी भागीदारी, 2,400 से अधिक प्रदर्शकों ने खोला उत्तर प्रदेश के हुनर का वैश्विक मंच | वंदे मातरम् के स्वर से गूंजा समर्थ भारत का प्रशिक्षण केंद्र | जन्मदिवस पर सेवा और श्रद्धा का संगम, मयूर विहार श्रीराम मंदिर में हुआ विशाल भंडारा | नए वादों की बाढ़ के बीच 18,535 मामलों का निस्तारण, मऊ में घटा राजस्व वादों का बोझ | कलराज मिश्र की पत्नी के निधन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि | 22 साल की वित्तीय यात्रा से साहू ग्रुप की रणनीतिक कमान तक पहुंचे रोहित कुमार बाजपेयी | FROM A HOTEL FINANCE DESK TO THE COMMAND CENTRE OF A ₹1,500-CRORE BUSINESS GROUP: SAHU GROUP ENTERS ITS NEXT CORPORATE CHAPTER | UPITS के चतुर्थ संस्करण का भव्य शुभारंभ, ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश : जितेन्द्र प्रताप सिंह | ग्रेटर नोएडा से दुनिया के बाजार पर यूपी की दस्तक यूपीआईटीएस-2026 का आगाज; छह साझेदार देशों के साथ 90 देशों की कारोबारी भागीदारी, 2,400 से अधिक प्रदर्शकों ने खोला उत्तर प्रदेश के हुनर का वैश्विक मंच | वंदे मातरम् के स्वर से गूंजा समर्थ भारत का प्रशिक्षण केंद्र | जन्मदिवस पर सेवा और श्रद्धा का संगम, मयूर विहार श्रीराम मंदिर में हुआ विशाल भंडारा | नए वादों की बाढ़ के बीच 18,535 मामलों का निस्तारण, मऊ में घटा राजस्व वादों का बोझ | कलराज मिश्र की पत्नी के निधन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि | 22 साल की वित्तीय यात्रा से साहू ग्रुप की रणनीतिक कमान तक पहुंचे रोहित कुमार बाजपेयी | FROM A HOTEL FINANCE DESK TO THE COMMAND CENTRE OF A ₹1,500-CRORE BUSINESS GROUP: SAHU GROUP ENTERS ITS NEXT CORPORATE CHAPTER |
हाइलाइट न्यूज़
संस्कृत के वैश्विक विस्तार की रणनीति पर मंथन, जितेन्द्र प्रताप सिंह ने जयप्रकाश से की शिष्टाचार भेंट • गो-तस्करी जैसे जघन्य अपराध में लिप्त लोगों के खिलाफ कठोरतम कारवाही-मुख्यमंत्री • जनसहभागिता और अंतर्विभागीय समन्वय से संचारी रोग नियंत्रण अभियान को मिलेगा बल • भाजपा प्रदेश कार्यालय में संगठनात्मक गोष्ठी, प्रदेश अध्यक्ष ने बजट को बताया विकास की नई धारा • यातायात माह नवंबर 2021 के अंतर्गत नेत्र परीक्षण शिविर का किया गया आयोजन • वित्तीय वर्ष 2022-23 का बजट अब तक का सबसे बड़ा बजट: मुख्यमंत्री • उत्तर प्रदेश की 20 बड़ी खबरें: जानिए आज के प्रमुख घटनाक्रम • राजनीति मे भावों की अभिव्यक्ति के स्तर मे सुधार आवश्यक - जे पी सिंह • संस्कृत के वैश्विक विस्तार की रणनीति पर मंथन, जितेन्द्र प्रताप सिंह ने जयप्रकाश से की शिष्टाचार भेंट • गो-तस्करी जैसे जघन्य अपराध में लिप्त लोगों के खिलाफ कठोरतम कारवाही-मुख्यमंत्री • जनसहभागिता और अंतर्विभागीय समन्वय से संचारी रोग नियंत्रण अभियान को मिलेगा बल • भाजपा प्रदेश कार्यालय में संगठनात्मक गोष्ठी, प्रदेश अध्यक्ष ने बजट को बताया विकास की नई धारा • यातायात माह नवंबर 2021 के अंतर्गत नेत्र परीक्षण शिविर का किया गया आयोजन • वित्तीय वर्ष 2022-23 का बजट अब तक का सबसे बड़ा बजट: मुख्यमंत्री • उत्तर प्रदेश की 20 बड़ी खबरें: जानिए आज के प्रमुख घटनाक्रम • राजनीति मे भावों की अभिव्यक्ति के स्तर मे सुधार आवश्यक - जे पी सिंह •
लेख / शोध English

पिता और पुत्र:वाचस्पति त्रिपाठी

D

Dainik India News

• 5781 views

एक बहुत ही बड़े उद्योगपति का पुत्र कॉलेज में अंतिम वर्ष की परीक्षा की तैयारी में लगा रहता है,
तो उसके पिता उसकी परीक्षा के विषय में पूछते है तो वो जवाब में कहता है कि हो सकता है कॉलेज में अव्वल आऊँ,
अगर मै अव्वल आया तो मुझे वो महंगी वाली कार ला दोगे जो मुझे बहुत पसन्द है..
तो पिता खुश होकर कहते हैं क्यों नहीं अवश्य ला दूंगा.
ये तो उनके लिए आसान था. उनके पास पैसो की कोई कमी नहीं थी।
जब पुत्र ने सुना तो वो दो गुने उत्साह से पढाई में लग गया। रोज कॉलेज आते जाते वो शो रुम में रखी कार को निहारता और मन ही मन कल्पना करता की वह अपनी मनपसंद कार चला रहा है।
दिन बीतते गए और परीक्षा खत्म हुई। परिणाम आया वो कॉलेज में अव्वल आया उसने कॉलेज से ही पिता को फोन लगाकर बताया की वे उसका इनाम कार तैयार रखे मै घर आ रहा हूं।
घर आते आते वो ख्यालो में गाडी को घर के आँगन में खड़ा देख रहा था। जैसे ही घर पंहुचा उसे वहाँ कोई कार नही दिखी.
वो बुझे मन से पिता के कमरे में दाखिल हुआ.
उसे देखते ही पिता ने गले लगाकर बधाई दी और उसके हाथ में कागज में लिपटी एक वस्तु थमाई और कहा लो यह तुम्हारा गिफ्ट।
पुत्र ने बहुत ही अनमने दिल से गिफ्ट हाथ में लिया और अपने कमरे में चला गया। मन ही मन पिता को कोसते हुए उसने कागज खोल कर देखा उसमे सोने के कवर में रामायण दिखी ये देखकर अपने पिता पर बहुत गुस्सा आया..
लेकिन उसने अपने गुस्से को संयमित कर एक चिठ्ठी अपने पिता के नाम लिखी की पिता जी आपने मेरी कार गिफ्ट न देकर ये रामायण दी शायद इसके पीछे आपका कोई अच्छा राज छिपा होगा.. लेकिन मै यह घर छोड़ कर जा रहा हु और तब तक वापस नही आऊंगा जब तक मै बहुत पैसा ना कमा लू।और चिठ्ठी रामायण के साथ पिता के कमरे में रख कर घर छोड कर चला गया।
समय बीतता गया..
पुत्र होशियार था होन हार था जल्दी ही बहुत धनवान बन गया. शादी की और शान से अपना जीवन जीने लगा कभी कभी उसे अपने पिता की याद आ जाती तो उसकी चाहत पर पिता से गिफ्ट ना पाने की खीज हावी हो जाती, वो सोचता माँ के जाने के बाद मेरे सिवा उनका कौन था इतना पैसा रहने के बाद भी मेरी छोटी सी इच्छा भी पूरी नहीं की।
यह सोचकर वो पिता से मिलने से कतराता था।
एक दिन उसे अपने पिता की बहुत याद आने लगी.
उसने सोचा क्या छोटी सी बात को लेकर अपने पिता से नाराज हुआ अच्छा नहीं हुआ।
ये सोचकर उसने पिता को फोन लगाया बहुत दिनों बाद पिता से बात कर रहा हूँ ।
ये सोच धड़कते दिल से रिसीवर थामे खड़ा रहा.
तभी सामने से पिता के नौकर ने फ़ोन उठाया और उसे बताया की मालिक तो दस दिन पहले स्वर्ग सिधार गए और अंत तक तुम्हे याद करते रहे और रोते हुए चल बसे.
जाते जाते कह गए की मेरे बेटे का फोन आया तो उसे कहना की आकर अपना व्यवसाय सम्भाल ले।
तुम्हारा कोई पता नही होनेे से तुम्हे सूचना नहीं दे पाये।
यह जानकर पुत्र को गहरा दुःख हुआ और दुखी मन से अपने पिता के घर रवाना हुआ।
घर पहुच कर पिता के कमरे जाकर उनकी तस्वीर के सामने रोते हुए रुंधे गले से उसने पिता का दिया हुआ गिफ्ट रामायण को उठाकर माथे पर लगाया और उसे खोलकर देखा.
पहले पन्ने पर पिता द्वारा लिखे वाक्य पढ़ा जिसमे लिखा था "मेरे प्यारे पुत्र, तुम दिन दुनी रात चौगुनी तरक्की करो और साथ ही साथ मै तुम्हे कुछ अच्छे संस्कार दे पाऊं.. ये सोचकर ये रामायण दे रहा हूँ ",
पढ़ते वक्त उस रामायण से एक लिफाफा सरक कर नीचे गिरा जिसमे उसी गाड़ी की चाबी और नगद भुगतान वाला बिल रखा हुआ था।
ये देखकर उस पुत्र को बहुत दुख हुआ और धड़ाम से जमींन पर गिर रोने लगा।
हम हमारा मनचाहा उपहार हमारी पैकिंग में ना पाकर उसे अनजाने में खो देते है।
पिता तो ठीक है।
इश्वर भी हमे अपार गिफ्ट देते है, लेकिन हम अज्ञानी हमारे मन पसन्द पैकिंग में ना देखकर, पा कर भी खो देते है।
हमे अपने माता पिता के प्रेम से दिये ऐसेे अन गिनत उपहारों का प्रेम का सम्मान करना चाहिए और उनका धन्यवाद करना चाहिये।

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहले टिप्पणी करें!