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प्राचीन मर्म-चिकित्सा की दिव्य परम्परा का साक्षी बना श्रीराम आयुष केन्द्र का स्वास्थ्य मेला

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Dainik India News

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प्राचीन मर्म-चिकित्सा की दिव्य परम्परा का साक्षी बना श्रीराम आयुष केन्द्र का स्वास्थ्य मेला

गायत्री परिवार की बहुआयामी सेवा का अविरत प्रवाह—एक ही छत के नीचे समग्र चिकित्सा पद्धतियों का अद्वितीय संगम

मुख्य अतिथि डॉ. कविता मिश्रा बोलीं—“यहाँ सेवा नहीं, तपस्या होती है”

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ, 07 दिसम्बर।राजधानी के बक्शी का तालाब स्थित श्रीराम आयुष केन्द्र एवं गायत्री शक्तिपीठ, रामपुर-देवरई के प्रांगण में आयोजित महिला स्वास्थ्य मेला आज दिव्य, सौम्य और आध्यात्मिक गरिमा के मध्य सम्पन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक चिकित्सा-शिविर नहीं, बल्कि भारतीय चिकित्सा-परम्परा की पुनर्स्थापना का जीवंत साक्षात्कार था—जहाँ आधुनिक चिकित्सा के साथ सनातन की लुप्तप्राय उपचार पद्धतियाँ एक ही धारा में प्रवाहित होती दिखीं।

आरुषि मेडिकल सेंटर, अलीगंज की संस्थापिका एवं सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. कविता मिश्रा ने मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्वलन कर मेले का शुभारम्भ किया। मंदिर में दर्शन-प्रणाम पश्चात उन्होंने आयुष केन्द्र का विस्तृत परिभ्रमण कर वहाँ उपलब्ध चिकित्सा-सेवाओं, भावी परियोजनाओं और जनकल्याण की संकल्पना की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। आयोजन समिति द्वारा मुख्य अतिथि का सम्मान अंग-वस्त्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर किया गया।

एक ही स्थान पर एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, नेचुरोपैथी, पंचकर्म, योग—और साथ में प्राचीन “मर्म-चिकित्सा” का दिव्य संगम

श्रीराम आयुष केन्द्र की सबसे विशिष्ट पहचान है—अद्भुत एवं दुर्लभ मर्म-चिकित्सा पद्धति, जिसे सनातन काल में “उर्जा-बिंदु चिकित्सा” कहा गया है। यह चिकित्सा-विधि शरीर के सूक्ष्म ‘मर्म-स्थलों’ को सक्रिय कर रोग-निवारण करती है और आज दुर्लभ होने के बावजूद यहाँ वैज्ञानिक अनुशासन, तपस्या और साधना के साथ संचालित की जा रही है।

यही नहीं, इस केन्द्र में एलोपैथी से लेकर आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, नेचुरोपैथी, पंचकर्म, एक्यूप्रेशर तथा योग—सभी पद्धतियों को एक ही धारा में समन्वित कर जन-कल्याण हेतु व्यापक चिकित्सा-गुच्छन तैयार किया गया है। यहाँ देश-विदेश से रोगी पहुँचते हैं, विशेषकर वे लोग जो अन्य स्थानों पर चिकित्सा से निराश हो चुके होते हैं।
अस्पताल में रुकने-ठहरने, भोजन-व्यवस्था तक की सुविधा अत्यंत अल्प शुल्क पर उपलब्ध है और असमर्थ रोगियों की सहायता प्रायः अस्पताल-कर्मियों द्वारा यथाशक्ति की जाती है—यहाँ चिकित्सा नहीं, सेवा-तपस्या होती है।

मुख्य अतिथि डॉ. कविता मिश्रा बोलीं—“यह स्थान पुण्यभूमि है, आवश्यकता पड़ी तो मैं भी यहाँ के रोगियों का निशुल्क उपचार करूँगी”

अपने उद्बोधन में डॉ. मिश्रा भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा
“मैं अपने को सौभाग्यशाली समझती हूँ कि आज मुझे ऐसे सत्कर्म से जुड़ने का अवसर मिला। यदि यहाँ के किसी भी रोगी को आवश्यकता हुई, तो मैं अपने आरुषि मेडिकल सेंटर में भी निःशुल्क उपचार करूँगी। यह मेरा सौभाग्य होगा।”

गायत्री परिवार के सेवाभाव का हृदयस्पर्शी वर्णन

मुख्य अतिथि के वक्तव्य के पश्चात अस्पताल के निदेशक एवं सम्मानित समाजसेवी, राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि—
“डॉ. ए.पी. शुक्ल जैसे सेवक कल्पना से परे तपस्वी हैं। गायत्री परिवार के कार्यकर्ता स्वार्थ से परे, केवल युगदृष्टा पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की भावना को मूर्त रूप देने के लिए समर्पित हैं।”

कार्यक्रम के अध्यक्ष मेजर वी.के. खरे ने केन्द्र की चिकित्सा-व्यवस्थाओं के सामाजिक महत्त्व को रेखांकित करते हुए सभी आगन्तुकों का हार्दिक स्वागत किया।

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