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भरण पोषण के लिए दी जा रही धनराशि पड़ रही कम,गोवंश रह जा रहे भूखें

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Dainik India News

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  धनञ्जय पाण्डेय/दैनिक इंडिया न्यूज़

मधुबन,मऊ। भाजपा सरकार को छुट्टा पशुओं का संरक्षण करना चुनौती साबित हो रहा है। तमाम नियमों कयासों के बाद भी छुट्टा पशुओं के आतंक से किसान हर रोज परेशान हैं। वैसे तो छुट्टा जानवरों से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार ने जगह-जगह गो-आश्रय स्थल बनाए हैं। वहां पर गाय भी रखी गई हैं, लेकिन उनकी देखरेख और खानपान सही ना होने के कारण कई बार गोवंश बीमार भी हो जाती हैं। फतेहपुर मंडाव ब्लॉक में सात गो- आश्रय स्थल हैं। जिनमें कुत्तुबपुर धनेवा, सिद्धा अहिलसापुर, केशवपुर सुल्तानीपुर, नसीरपुर कुशहां, भटौली (कलनापार), सौदी,नगर पंचायत मधुबन आश्रय स्थल के लिए सरकार ने पशु चिकित्सा विभाग और पंचायती राज विभाग को इसकी जिम्मेदारी दी है। जिसके लिए प्रति गोवंश के हिसाब से अनुदान राशि सभी गोशालाओं को दी जा रही है। लेकिन सरकार जो धनराशि गोशालाओं के लिए दे रही है। उससे एक गाय का एक बार का भी भरण पोषण नहीं हो सकता। वहीं जानवरों को दिन में तीन बार खाने की जरूरत पड़ती है,जोकि एक बार में 5 किलो भूसा एक गाय खाती है। ऐसे में सरकार द्वारा दी गई राशि से किस तरह भरण-पोषण हो सकता है। वहीं जानवरों के खाने के लिए भूसे के रुपए दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं। मधुबन में भूसा 10से ₹13 तक बिक रहा है तो वही सरकार गोशाला के लिए ₹30 प्रति गाय दे रही है। किसानों ने बताया एक गाय पूरे दिन में 15 किलो भूसा खाती है वहीं सरकार के द्वारा दिए गए ₹30 से मात्र 2 किलो ही भूसा आएगा। वही नसीरपुर कुशहां ग्राम प्रधान धनंजय यादव ने कहा कि सरकार जो ₹30 प्रति गाय खिलाने हेतु धन आवंटित की है, वह इस बढ़ती महंगाई में बहुत ही कम है, हम सभी प्रधानों के सामने पशुओं की देखभाल को लेकर बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है, वही सुबह 8:00 से शाम 5:00 बजें दो शिफ्ट में सफाई कर्मी ड्यूटी देते हैं, तो जहां शाम 5:00 बजे से सुबह 8:00 बजे तक गो-आश्रय स्थल लावारिस अवस्था में होते हैं कोई ड्यूटी नहीं देता। ऐसे में पशुओं की सुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है, जिसे लेकर रात में घूम रहे आवारा जंगली जानवरों से भी भय बना रहता है। कि कोई अनहोनी न हो। वही उपमुख्यचिकित्साधिकारी डॉक्टर कृष्ण कुमार पांडे ने बताया कि जानवरों के लिए भूसा ही पर्याप्त नहीं होता है। उसके लिए विटामिन और प्रोटीन की भी जरूरत पड़ती है। जोकि भूसा के साथ-साथ दाना और हरे चारें के साथ पूरी होती है। सरकार जो 30 रुपये दे रही है। वह एक जानवर के लिए बहुत ही कम है। सरकार को इस पर विचार करने की जरूरत है।

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