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भागवत कथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी- अनुराधा तिवारी कथावाचिका

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Dainik India News

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भागवत कथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी- अनुराधा तिवारी कथावाचिका
  धनञ्जय पाण्डेय/दैनिक इंडिया न्यूज़

दुबारी, मऊ । स्थानीय तहसील दुबारी काली चौरा स्थित एवं श्रीमद्भागवत ज्ञान कथा महायज्ञ के छठवें दिन देवरिया से पधारी कथा वाचिका सुश्री अनुराधा तिवारी ने कहा कि संसार में भगवान कृष्ण ही सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करते हैं। भगवान के चरणों में जितना समय बीत जाए उतना अच्छा है। इस संसार में एक-एक पल बहुत कीमती है। जो बीत गया सो बीत गया। इसलिए जीवन को व्यर्थ में बर्बाद नहीं करना चाहिए। भगवान द्वारा प्रदान किए गए जीवन को भगवान के साथ और भगवान के सत्संग में ही व्यतीत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भागवत प्रश्न से प्रारंभ होती है और पहला ही प्रश्न है कि कलयुग के प्राणी का कल्याण कैसे होगा। इसमें सतयुग, त्रेता और द्वापर युग की चर्चा ही नहीं की गई है। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि बार-बार यही चर्चा क्यों की जाती है, अन्य किसी की क्यों नहीं। इसके कई कारण हैं जैसे अल्प आयु, भाग्यहीन और रोगी।
इसलिए इस संसार में जो भगवान का भजन न कर सके, वह सबसे बड़ा भाग्यहीन है। भगवान इस धरती पर बार-बार इसलिए आते हैं ताकि हम कलयुग में उनकी कथाओं में आनंद ले सकें और कथाओं के माध्यम से अपना चित्त शुद्ध कर सकें। व्यक्ति इस संसार से केवल अपना कर्म लेकर जाता है। इसलिए अच्छे कर्म करो। भाग्य, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भगवत की कथा सुनो। भागवत कथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी है। गुरुवार को श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण और रुक्मणी का विवाह बडे ही धूमधाम से मनाया गया। विवाह उत्सव के दौरान कई भजनों की प्रस्तुति दी गई। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया। इस दौरान आयोजन कर्ता महेंद्र पाल,अशोक बरनवाल, शिवानंद यादव,भानु प्रताप सिंह,शंभू गुप्ता,नंदलाल शर्मा सहित भारी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।

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