ब्रेकिंग न्यूज़
संस्कृत की दिव्य अनुगूंज में राष्ट्रीय आत्मा का जागरण: ‘प्रणवः’ से आरंभ हुआ सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महाशंखनाद | संस्कृत: राष्ट्रात्मा का अनश्वर स्पंदन और ‘प्रणव’ से प्रारंभ हुआ नवयुगीन चेतना का महाप्रस्थान | उत्तर प्रदेश बिजली विवाद और गहराया: प्राइवेटाइजेशन अटकने की खीझ क्या उपभोक्ताओं पर बन रही कहर? | “मानकों से खिलवाड़ पर कड़ा प्रहार: स्कूली वाहनों पर प्रशासन सख्त” | “विनाश की विभीषिका में करुणा का उदय, और राजनीति के प्रहारों के बीच सुलगता सच” | “महिला आरक्षण से शैक्षिक विमर्श तक: आश्वासन, अवकाश और अनुत्तरित प्रश्नों की गाथा” | “आस्था, इतिहास और स्वाभिमान का संगम: सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा के लिए जनपद से दल रवाना” | “नियुक्ति की दहलीज़ पर ठिठके 68 चिकित्सक: आयुष तंत्र में अदृश्य अवरोध या प्रशासनिक जड़ता?” | संस्कृत की दिव्य अनुगूंज में राष्ट्रीय आत्मा का जागरण: ‘प्रणवः’ से आरंभ हुआ सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महाशंखनाद | संस्कृत: राष्ट्रात्मा का अनश्वर स्पंदन और ‘प्रणव’ से प्रारंभ हुआ नवयुगीन चेतना का महाप्रस्थान | उत्तर प्रदेश बिजली विवाद और गहराया: प्राइवेटाइजेशन अटकने की खीझ क्या उपभोक्ताओं पर बन रही कहर? | “मानकों से खिलवाड़ पर कड़ा प्रहार: स्कूली वाहनों पर प्रशासन सख्त” | “विनाश की विभीषिका में करुणा का उदय, और राजनीति के प्रहारों के बीच सुलगता सच” | “महिला आरक्षण से शैक्षिक विमर्श तक: आश्वासन, अवकाश और अनुत्तरित प्रश्नों की गाथा” | “आस्था, इतिहास और स्वाभिमान का संगम: सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा के लिए जनपद से दल रवाना” | “नियुक्ति की दहलीज़ पर ठिठके 68 चिकित्सक: आयुष तंत्र में अदृश्य अवरोध या प्रशासनिक जड़ता?” |
हाइलाइट न्यूज़
<em>वारियर्स डिफेन्स एकेडमी मे उल्लास पूर्ण वातावरण मे मनाया गया नव वर्ष 2023</em> कार्ड धारकों को दिए जाने वाले खाद्यान्नकी घटतौली किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी: मुख्यमंत्री थाना फूलपुर पुलिस ने दुष्कर्म के आरोपी अभियुक्त अशोक पटेल को किया गिरफ्तार "साहित्य सारथी सम्मान" से नवाजे गए एस.वी. सिंह "प्रहरी" समग्र एवं सर्वोत्तम स्वास्थ्य का विज्ञान घण्टावाला के सहयोग से स्ट्रीट वेंडर्स को ऋण उतर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति के अंतर्गत पाठ्यक्रम समिति की विशेष बैठक सम्पन्न हनुमान अनुकंपा से समर्पण का संगम: राजाजीपुरम में हुआ दिव्य भंडारा <em>वारियर्स डिफेन्स एकेडमी मे उल्लास पूर्ण वातावरण मे मनाया गया नव वर्ष 2023</em> कार्ड धारकों को दिए जाने वाले खाद्यान्नकी घटतौली किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी: मुख्यमंत्री थाना फूलपुर पुलिस ने दुष्कर्म के आरोपी अभियुक्त अशोक पटेल को किया गिरफ्तार "साहित्य सारथी सम्मान" से नवाजे गए एस.वी. सिंह "प्रहरी" समग्र एवं सर्वोत्तम स्वास्थ्य का विज्ञान घण्टावाला के सहयोग से स्ट्रीट वेंडर्स को ऋण उतर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति के अंतर्गत पाठ्यक्रम समिति की विशेष बैठक सम्पन्न हनुमान अनुकंपा से समर्पण का संगम: राजाजीपुरम में हुआ दिव्य भंडारा
लेख / शोध English

भाग्यवाद का नाम लेकर अपने जीवन में निराशा का स्थान कहाँ?

B

Bhargav Bhargav

2 views
भाग्यवाद का नाम लेकर अपने जीवन में निराशा का स्थान कहाँ?

दैनिक इंडिया न्यूज लखनऊ

भाग्यवाद का नाम लेकर अपने जीवन में निराशा निरुत्साह के लिए स्थान मत दीजिए। आपका गौरव निरन्तर आगे बढ़ते रहने में है। भगवान् का वरद-हस्त सदैव आपके मस्तक पर है। वह तो आपका पिता अभिभावक, संरक्षक, पालक सभी कुछ है। उसकी अकृपा आप पर भला क्यों होगी ? क्या यह सच नहीं है कि उसने आपको यह अमूल्य मनुष्य शरीर दिया है। बुद्धि दी है, विवेक दिया है। कुछ अपनी इन शक्तियों से भी काम लीजिए, देखिए आपका भाग्य बनता है या नहीं ? भाग्य सदैव पुरुषार्थ का ही साथ देता है।

दुर्भाग्य के प्रमुख कारण मनुष्य के मनोविकार हैं। इन्हीं से जीवन बर्बाद होता है। काम, क्रोध, लोभ तथा मोह आदि के द्वारा ही मनुष्य का जीवन अपवित्र बनता है। संक्षेप में इसी को ही दुर्भाग्य की संज्ञा दी जा सकती है। अतः मनुष्य को चाहिए कि वह इन्द्रिय, मन और बुद्धि की अस्वच्छता को शुद्ध बनाने का सदैव अभ्यास करता रहे, इससे वह भविष्य सुन्दर बना सकता है। अनावश्यक वस्तुओं के अधिक से अधिक संचय को ही भाग्य नहीं कहते। वह मनुष्य जीवन में अच्छाइयों का विकास है, इसी से उससे शाश्वत सुख और शान्ति की उपलब्धि होती है। सत्कर्मों का आश्रय ही एक प्रकार से सौभाग्य का निर्माण करता है।

कर्म चाहे वह आज के हों अथवा पूर्व जीवन के उनका फल असंदिग्ध है। परिणाम से मनुष्य बच नहीं सकता। दुष्कर्मों का भोग जिस तरह भोगना ही पड़ता है, शुभ कर्मों से उसी तरह श्री—सौभाग्य और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। यह सुअवसर जिसे उपलब्ध हो, वही सच्चा भाग्यशाली है और इसके लिए किसी दैव के भरोसे नहीं बैठना पड़ता। कर्मों का सम्पादन मनुष्य स्वयं करता है। अतः अपने अच्छे-बुरे भाग्य का—निर्णायक भी वही है। अपने भाग्य को वह कर्मों द्वारा बनाया-बिगाड़ा करता है। हमारा श्रेय इसमें है कि सत्कर्मों के द्वारा अपना भविष्य सुधार लें। जो इस बात को समझ लेंगे और इस पर आचरण करेंगे उनको कभी दुर्भाग्य का रोना नहीं रोना पड़ेगा।

युगदृष्टा पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी के लेख से साभार संकलित

फोटो गैलरी

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहले टिप्पणी करें!