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रजिस्टर में सालाना रिकॉर्ड तोड़ पौधरोपण, देखभाल राम भरोसे,पर्यावरण संरक्षण की ब्यापक जरूरत

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रजिस्टर में सालाना रिकॉर्ड तोड़ पौधरोपण, देखभाल राम भरोसे,पर्यावरण संरक्षण की ब्यापक जरूरत

हरिंद्र सिंह दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ ।उत्तर प्रदेश में हर साल करोड़ों पौधों का रोपण किया जाता है, लेकिन यह अभियान केवल रजिस्टर में हरियाली का रिकॉर्ड बनाने तक सीमित रह जाता है। वास्तविकता में, इन पौधों की देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी को भुला दिया जाता है, जिससे पर्यावरण को कोई विशेष लाभ नहीं मिलता। पौधरोपण का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और मानव जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाना होना चाहिए, लेकिन मौजूदा स्थिति इसके विपरीत है।

पौधरोपण के महत्व को देखते हुए सरकारें हर साल वृक्षारोपण अभियान चलाती हैं। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, और सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ता बड़े स्तर पर इस अभियान में भाग लेते हैं। पूर्व की अखिलेश सरकार हो या वर्तमान की योगी सरकार, सभी ने हर साल रिकॉर्डतोड़ पौधरोपण का दावा किया है। लेकिन इन पौधों का पेड़ बन पाना और उनका संरक्षण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

पौधों का मानव जीवन में अत्यधिक महत्व है। पेड़ न केवल ऑक्सीजन प्रदान करते हैं बल्कि वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को भी अवशोषित करते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होता है। विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, एक परिपक्व पेड़ प्रति वर्ष लगभग 48 पाउंड कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करता है और 260 पाउंड ऑक्सीजन का उत्पादन करता है, जो चार लोगों के लिए एक वर्ष तक पर्याप्त होता है। इसके अलावा, पेड़ मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, जलवायु को संतुलित रखते हैं और जल संरक्षण में मदद करते हैं।

हाल के वर्षों में, उत्तर प्रदेश में गर्मियों के दौरान हीट स्ट्रोक के कारण कई लोगों की मौतें हुई हैं। पेड़ों की कमी और हरियाली की कमी के कारण तापमान में वृद्धि होती है, जिससे हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। एक अध्ययन के अनुसार, पेड़ गर्मी के दिनों में तापमान को 10 डिग्री तक कम कर सकते हैं, जो हीट स्ट्रोक से बचाव में सहायक हो सकता है।

वृक्षारोपण अभियान के तहत जिले में लाखों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन देखभाल की कमी और लापरवाही के कारण अधिकांश पौधे सूख जाते हैं। अगर इन पौधों को ट्री गार्ड लगाकर सुरक्षित किया जाए और उनकी नियमित देखभाल की जाए, तो चारों तरफ हरियाली नजर आ सकती है। वर्तमान में, लगभग 10 प्रतिशत पौधे ही हरे रहते हैं जबकि 90 प्रतिशत पौधे सूख जाते हैं। इसका मुख्य कारण देखभाल की कमी, जल की अनुपलब्धता और पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी न लेने वाले लोग हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेड़ लगाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन वहां भी पौधों की देखभाल नहीं की जाती। पेड़ों को पानी नहीं दिया जाता और न ही उनकी सुरक्षा के लिए कोई उपाय किए जाते हैं। इससे पौधे सूख जाते हैं और हरियाली का सपना अधूरा रह जाता है।

पौधरोपण केवल सरकार का कार्य नहीं है, बल्कि इसे सफल बनाने के लिए आम जनता की भागीदारी भी आवश्यक है। पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल करना, नियमित पानी देना, और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हर नागरिक का दायित्व है। सरकार को भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। पौधरोपण के बाद उनके संरक्षण के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए, जिसमें पौधों की देखभाल और उनकी वृद्धि की निगरानी की जाए।

हम अपने खबर के माध्यम से मुख्यमंत्री से अनुरोध करते हैं कि इस दिशा में ठोस कानून बनाएं, जिससे पेड़ों का संरक्षण हो सके और हमारा जनजीवन सरल हो सके। ऐसे कठोर कानून बनाने की आवश्यकता है, जिनसे लोग पेड़ों को नुकसान पहुंचाने से पहले दस बार सोचें। सड़क निर्माण या किसी भी प्रकार के कंस्ट्रक्शन के दौरान पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए जाने चाहिए।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री से अनुरोध है कि वे रेरा के माध्यम से ऐसा कानून बनवाएं जिसमें घर बनाने से पहले लोग अपने घर के बाहर कुछ पेड़ अवश्य लगाएं। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि प्रदेश की उन्नति में भी सहायक होगा। पौधरोपण और पेड़ों का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है, और इस दिशा में सरकार और जनता दोनों को मिलकर प्रयास करना होगा।

उत्तर प्रदेश में प्रति वर्ष करोड़ों पौधों का रोपण किया जाता है, लेकिन उनके संरक्षण और देखभाल की कमी के कारण यह अभियान केवल औपचारिकता बन कर रह जाता है। पौधों का मानव जीवन में अत्यधिक महत्व है और उनकी कमी से विभिन्न समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जैसे कि हीट स्ट्रोक और वायु प्रदूषण। इसलिए, पौधरोपण के साथ-साथ उनकी देखभाल और संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। सरकार और जनता को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा ताकि उत्तर प्रदेश में हरियाली बनी रहे और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

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