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राजा महेंद्र प्रताप सिंह एक महान क्रांतिकारी व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का संक्षिप्त जीवन परिचय

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Dainik India News

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राजा महेंद्र प्रताप सिंह एक महान क्रांतिकारी व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का संक्षिप्त जीवन परिचय

उदय राज/मुकेश कुमार दैनिक इंडिया न्यूज, लखनऊ:राजा महेंद्र प्रताप सिंह का जन्म 1 दिसंबर 1886 की मुरसान शहर अलीगढ़ जनपद में हुआ उनका विवाह पंजाब में जींद राज्य में महाराज रणवीर सिंह की छोटी बहन से हुआ राजा साहब का सामाजिक व राजनीतिक जीवन वर्ष 1907से ही प्रारंभ हो गया था जब वह प्रथम बार रूम बुडापेस्ट बर्लिन पेरिस लंदन वाशिंगटन म्युनिख इटावा स्विट्जरलैंड तथा जापान गए इससे पूर्व संपूर्ण भारतवर्ष की यात्रा कर चुके थे राजा साहब जीवन पर्यंत यह प्रयास करते रहे कि अपने देश अपनी माटी का कैसे उद्धार किया जाए और कैसे आगे बढ़ाया जाए महाराजा महेंद्र प्रताप सिंह के द्वारा रचित या वर्णित किए गए कार्य कुछ इस प्रकार हैं

1= एक तकनीकी संरक्षण संस्थान की स्थापना

2==स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

3==देश में के बाहर भारत की प्रथम अस्थाई सरकार का गठन

4== द्वितीय विश्व युद्ध के समय की गतिविधियां और

5==आनंद दल गठन

6== नव विचार विज्ञान इत्यादि उनके कुछ कार्य बिंदु थे,

1 फरवरी 1910 में राजा महेंद्र प्रताप का सोवियत रूस से में हार्दिक स्वागत हुआ वर्ष 1919 में वह रूस के राजदूत के साथ अफगानिस्तान लौटे परंतु प्रथम विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजों की अफगानिस्तान से संधि हो जाने के कारण उन्हें अफगानिस्तान छोड़ना पड़ा स्वदेश में उन्होंने महात्मा गांधी तथा स्वतंत्रता आंदोलन के अन्य नेताओं तथा देशी राज्यों के शासको से भी संपर्क बनाए रखा जिससे कि अंग्रेजों की द्वितीय विश्व युद्ध के लिए साधन जुटाने के प्रयासों को यथाशक्ति कम किया जा सके.।

किंतु दुर्भाग्य बस इस बार हिटलर की गलती के कारण रूस के अंग्रेजों तथा मित्र राष्ट्र से मिल जाने के परिणाम स्वरुप युद्ध में अंग्रेज ही विजय रहे नेताजी का निधन हो गया तथा राजा महेंद्र प्रताप को जापान में ही कैद कर बंदी बना लिया गया द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपने कैद मुक्ति होने और सन 1946 ईस्वी में भारत लौटने तक के समय राजा महेंद्र प्रताप ने एक आनंद दल की स्थापना की जिसका उद्देश्य प्रेम धर्म संसार शासन संसार न्यायालय के आदेशों का प्रचार करना था अपनी कल्पना के अनुरूप स्थापित कर उपरोक्त संस्थाओं का संक्षिप्त विकास करने की दृष्टि से उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में घोर चिंतन व अन्वेषण किया और विज्ञान की परिकल्पना की इस विषय पर उन्होंने आठ पुस्तिकाएं लिखी हैं महाराजा महेंद्र प्रताप सिंह उपरोक्त उत्सव के शीर्षक ही उनकी कार्य प्रति पादन करते थे उनमें नैतिकता की व्यवस्था आध्यात्मिक सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक विचार का आभास मिलता है आर्यन पेशवा राजा महेंद्र प्रताप विश्व में लाना चाहते थे तथा जिनको स्थापित करने के लिए उन्होंने अपने शैली के अनुसार कदम उठाए राजा महेंद्र प्रताप अपने आदर्शों का आदर्श का संदेश देने हेतु न केवल आवश्यक साहित्य लेखन प्रकाशन करते रहे अर्पित जीवन पर्यंत उनके अनुरूप कार्य किया तथा उन पर आगे लगभग आधी शताब्दी तक अर्थात 29 अप्रैल 1979 को उनके निर्माण का एक महान विचार के रूप में वह विचारक थे वह विचारों की दुनिया पर छाए रहे उनके निधन से विश्व और विरोध रूप से भारत ने एक महान मित्र मार्गदर्शन दार्शनिक व्यक्तित्व खो दिया ।

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