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श्री बाल रामलीला नाट्य कला मंदिर में धनुष यज्ञ का जीवंत मंचन, गूंजे जयकारे

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Dainik India News

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श्री बाल रामलीला नाट्य कला मंदिर में धनुष यज्ञ का जीवंत मंचन, गूंजे जयकारे

राजन त्रिवेदी, दैनिक इंडिया न्यूज़, हरदोई।
श्री बाल रामलीला नाट्य कला मंदिर, चौक में धनुष यज्ञ का भव्य मंचन दर्शकों के लिए एक अद्वितीय अनुभव लेकर आया। वृंदावन से आए मेहमान कलाकारों द्वारा फुलवारी, धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का अद्भुत मंचन प्रस्तुत किया गया, जिसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

रावण का जीवंत अभिनय मेला संरक्षक रमाकांत मिश्रा द्वारा किया गया, जिसने दर्शकों को रावण के चरित्र की गहराई का अनुभव कराया। वाणासुर के किरदार को मंच व्यवस्थापक रमेश सैनी ने जीवंत किया, जिन्होंने अपने अभिनय से वाणासुर की शक्ति और वीरता का अद्भुत चित्रण किया।

मंचन की शुरुआत गणेश पूजन और आरती से हुई। इसके बाद राजा जनक द्वारा आयोजित धनुष यज्ञ में सभी राजा-महाराजाओं को आमंत्रित किया गया। एक के बाद एक सभी राजाओं ने शिव धनुष को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। इस पर राजा जनक अत्यंत दुखी हुए और व्याकुल होकर कहने लगे कि शायद अब धरती वीरों से विहीन हो गई है, जिससे माता सीता का विवाह कैसे होगा। इस दृश्य पर रामचरितमानस की यह चौपाई सजीव होती प्रतीत हुई:

"नर अस जड़ जनम जग माहीं।
जिन्हहि न रघुपति पद पंकज भाहीं॥"

यह सुनकर लक्ष्मण क्रोधित हो गए और जनक को संबोधित करते हुए कहा कि आपकी सभा में सूर्यवंशी प्रभु श्रीराम उपस्थित हैं, आप हमारे कुल का अपमान न करें। प्रभु श्रीराम के हस्तक्षेप से लक्ष्मण शांत हुए, और गुरु विश्वामित्र के आदेश पर श्रीराम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई और उसे तोड़ दिया। इसी के साथ देवताओं ने पुष्पवर्षा की, और माता सीता ने प्रभु श्रीराम को वरमाला पहनाई। पूरे सभा में "जय श्रीराम" और "सीताराम" के जयकारे गूंजने लगे।

इस पर रामचरितमानस की एक और चौपाई इस भाव को व्यक्त करती है:

"जेहि ससि महं निज तेज न थोर।
ताहि भंजन हर कोपु न थोर॥"

जैसे ही यह समाचार परशुराम को मिला, पूरे रामलीला मैदान में उनकी गर्जना गूंज उठी। परशुराम का क्रोध देखकर लक्ष्मण भी उग्र हो गए, लेकिन प्रभु श्रीराम के वचनों ने परशुराम को शांत कर दिया। उन्हें एहसास हुआ कि शिव धनुष को तोड़ने वाला साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि स्वयं प्रभु श्रीराम हैं। उन्होंने क्षमा याचना करते हुए कहा, "प्रभु, मुझे क्षमा करें, मैंने अनजाने में आपको अनुचित वचन कहे।" इसके बाद परशुराम का क्रोध शांत हुआ।

मंच संचालन अम्बरीश द्विवेदी ने किया। श्री बाल रामलीला नाट्य कला मंदिर के अध्यक्ष ने सफल आयोजन के लिए सभी कलाकारों और आयोजकों को धन्यवाद दिया और राम बारात में सभी को आमंत्रित किया। इस अवसर पर मेला कमेटी के पदाधिकारी और सैकड़ों दर्शक उपस्थित रहे।

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