अपरिमेय श्याम दास ने श्रीकृष्ण के जीवन को धर्म और कर्तव्य की प्रेरणा बताया, जितेन्द्र प्रताप सिंह ने गीता के श्लोक का किया उल्लेख

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर लखनऊ स्थित इस्कॉन मंदिर में भव्य कृष्ण अभिषेक एवं पूजन-अर्चन संपन्न हुआ। इस्कॉन लखनऊ के अध्यक्ष अपरिमेय श्याम दास जी एवं उनकी सहधर्मिणी की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में संस्कृतभारती, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सम्पर्क प्रमुख एवं श्रीराम आयुष चिकित्सालय, रामपुर देवरई के निदेशक जितेन्द्र प्रताप सिंह ने सहभागिता की। अनेक गणमान्य अतिथियों ने भी पूजन-अर्चन में भाग लिया।
अपरिमेय श्याम दास जी ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन धर्म, कर्तव्य और न्याय की प्रतिष्ठा का संदेश देता है। उनके अनुसार श्रीकृष्ण ने अन्याय के सामने निष्क्रिय रहने के बजाय धर्मसम्मत आचरण और लोककल्याण का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज में श्रीकृष्ण की शिक्षाओं को आचरण में उतारना सामाजिक सद्भाव और नैतिक चेतना को सुदृढ़ कर सकता है।
इसी संदर्भ में जितेन्द्र प्रताप सिंह ने श्रीमद्भगवद्गीता के अठारहवें अध्याय के 66वें श्लोक का उल्लेख किया—
“सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥”

उन्होंने कहा कि इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को संशय और विषाद से मुक्त होकर परम सत्य की शरण ग्रहण करने तथा अपने धर्मसम्मत कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश देते हैं। “मा शुचः” का आश्वासन मनुष्य को भय और निराशा से ऊपर उठकर कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
श्री सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण का दर्शन कर्म, ज्ञान और भक्ति के समन्वय के साथ लोकमंगल की भावना को प्रतिष्ठित करता है। जन्माष्टमी उनके संदेश को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि जीवन-मूल्यों के रूप में अपनाने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने उत्तर प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश में शांति, समृद्धि, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना के विस्तार की कामना की। उन्होंने ‘सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय’ तथा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को सामाजिक जीवन में सुदृढ़ करने का आह्वान किया।