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राष्ट्र के प्रहरियों की कलाई पर बंधा रक्षा-सूत्र

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Dainik India News

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राष्ट्र के प्रहरियों की कलाई पर बंधा रक्षा-सूत्र

रक्षाबंधन पर सैन्य जवानों के साथ दिखा बहनत्व और राष्ट्र-रक्षा का अद्भुत संगम, वारियर्स डिफेंस कॉलेज व आर्मी पब्लिक स्कूल की छात्राओं-शिक्षिकाओं ने जवानों को बांधी राखी

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दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।लखनऊ स्थित जीआर रेजिमेंटल सेंटर के हरनारायण सिंह चौहान स्टेडियम में रक्षाबंधन का पर्व इस बार केवल भाई-बहन के स्नेह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा में समर्पित सैनिकों के प्रति कृतज्ञता और आत्मीयता के भाव से जुड़ गया। वारियर्स डिफेंस कॉलेज की छात्राओं, आर्मी पब्लिक स्कूल की शिक्षिकाओं एवं छात्राओं तथा जीआर रेजिमेंटल सेंटर स्कूल की छात्राओं ने सेना के जवानों की कलाइयों पर रक्षा-सूत्र बांधकर उनके प्रति सम्मान और बहनत्व की भावना व्यक्त की। समारोह में भारतीय संस्कृति की परंपरा और राष्ट्र-सेवा के संकल्प का ऐसा समागम दिखाई दिया, जिसने रक्षाबंधन के सामाजिक अर्थ को व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ प्रदान किया।

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रक्षाबंधन भारतीय परंपरा में केवल एक धागा बांधने का अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, आत्मीयता और परस्पर संरक्षण के संकल्प का पर्व माना जाता है। बहन द्वारा भाई की कलाई पर बांधा गया रक्षा-सूत्र जहां स्नेह और मंगलकामना का प्रतीक है, वहीं भाई की ओर से बहन की सुरक्षा का संकल्प इस रिश्ते को उत्तरदायित्व से जोड़ता है। जब यही रक्षा-सूत्र देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों की कलाई तक पहुंचता है, तो उसका भाव पारिवारिक सीमाओं से निकलकर राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता में परिवर्तित हो जाता है।

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कार्यक्रम में मेजर जनरल विक्रम कुमार (सेवानिवृत्त), राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सम्पर्क प्रमुख, पूर्व उत्तर प्रदेश क्षेत्र, संस्कृतभारती श्री जितेन्द्र प्रताप सिंह तथा वारियर्स डिफेंस कॉलेज के अध्यक्ष श्री गुलाब सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति में आयोजित समारोह ने भारतीय संस्कृति, शिक्षा और सैन्य अनुशासन के बीच अंतर्संबंध को भी रेखांकित किया।

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रक्षाबंधन के इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि इसमें छात्राओं ने सैनिकों के प्रति उस सम्मान को प्रत्यक्ष रूप से अभिव्यक्त किया, जिसे सामान्यतः शब्दों में व्यक्त किया जाता है। राखी का प्रत्येक सूत्र सैनिकों के त्याग, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण के प्रति नागरिक कृतज्ञता का प्रतीक बनकर सामने आया। समारोह में उपस्थित लोगों के लिए यह क्षण भारतीय परंपरा की उस मूल भावना का स्मरण भी था, जिसमें व्यक्तिगत संबंधों से आगे बढ़कर समाज और राष्ट्र के प्रति दायित्व को महत्व दिया जाता है।

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समारोह के दौरान देशभक्ति और भारतीय सांस्कृतिक चेतना का वातावरण बना रहा। छात्राओं द्वारा जवानों को राखी बांधने के दृश्य ने उपस्थित लोगों के बीच आत्मीयता और गौरव की अनुभूति को और प्रगाढ़ किया। इस अवसर पर दिया गया संदेश स्पष्ट था कि राष्ट्र की रक्षा केवल सीमाओं पर खड़े सैनिकों का दायित्व नहीं, बल्कि उनके प्रति सम्मान, विश्वास और कृतज्ञता व्यक्त करना भी नागरिक समाज की जिम्मेदारी है।

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अंततः भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयघोष के साथ समारोह का समापन हुआ। रक्षाबंधन के अवसर पर सैन्य परिसर में गूंजे ये उद्घोष उस भाव को अभिव्यक्त कर रहे थे, जिसमें भाई-बहन के पारंपरिक रिश्ते से आगे बढ़कर राष्ट्र और उसके प्रहरियों के बीच विश्वास, सम्मान और आत्मीयता का सूत्र जुड़ता दिखाई दिया।

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