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**UPPCL का 3000 करोड़ का सिक्योरिटी घोटाला! पुरानी जमा राशि दोबारा बिल से काटने की ,साजिश

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Dainik India News

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**UPPCL का 3000 करोड़ का सिक्योरिटी घोटाला! पुरानी जमा राशि दोबारा बिल से काटने की ,साजिश

अविजित आनंद दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के बीच भारी आक्रोश और गुस्सा फैल गया है। केंद्र की आरडीएसएस योजना के नाम पर UPPCL ने लगभग 85 लाख स्मार्ट मीटर(83 लाख प्रीपेड मोड में) बिना पूछे, बिना सहमति* के पोस्टपेड कनेक्शनों पर थोप दिए। अब मई 2026 में अचानक यू-टर्न लेते हुए इन्हें पोस्टपेड में बदलने का अचानक आदेश जारी किया गया है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल पुरानी सिक्योरिटी डिपॉजिट की दोहरी वसूली है। यह राशि लागत डाटा पुस्तिका (Cost Data Book)-2026 के प्रावधान आने से पहले ही प्रीपेड बैलेंस में ट्रांसफर कर दी गई थी और अब 4 किस्तों में उपभोक्ताओं के बिल से दोबारा काटी जा रही है। पूरा घटनाक्रम और नियम कैसे बनाए गए?

  • 2024-25 से जबरन प्रीपेड कन्वर्शन लाखों पुराने पोस्टपेड कनेक्शनों को बिना सूचना या सहमति के प्रीपेड स्मार्ट मीटर में बदल दिया गया। उपभोक्ताओं की पुरानी सिक्योरिटी डिपॉजिट को राजस्व प्रबंधन प्रणाली (RMS) के जरिए ऑटोमैटिक प्रीपेड बैलेंस में ट्रांसफर कर दिया गया।
  • लागत डाटा पुस्तिका (Cost Data Book)-2026 बाद में जारी UPERC ने 31 दिसंबर 2025 को लागत डाटा पुस्तिका जारी की और ट्रांसफर को रेट्रोस्पेक्टिव तरीके से वैध ठहरा दिया।
  • भारतीय प्रशासनिक सेवाके अधिकारियों की भूमिका UPPCL के पूर्व प्रबंध निदेशक श्री पंकज कुमार (2002 बैच IAS) के कार्यकाल (मार्च 2021 से अप्रैल 2026 तक) में ही यह विवादास्पद नीति तेजी से लागू हुई।

राजस्व प्रबंधन प्रणाली (RMS) के जरिए पूरी प्रक्रिया बैकएंड से ऑटोमैटिक की गई जबरन कन्वर्शन सिक्योरिटी ट्रांसफर लागत डाटा पुस्तिका में रेट्रोस्पेक्टिव प्रावधान यूं टर्न अब दोबारा वसूली। उपभोक्ताओं की कितनी बड़ी धनराशि प्रभावित हुई?

तो पाठको‌के संज्ञान में लाना चाहते हैं कि प्रभावित उपभोक्ता — 83 लाख (ज्यादातर घरेलू) प्रति उपभोक्ता औसत सिक्योरिटी — ₹800 से ₹2,000

  • कुल अनुमानित धनराशि —₹1,500 करोड़ से ₹3,000 करोड़ तक UPPCL ने अब तक इस कुल राशि का कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है।

उपभोक्ताओं की मुख्य समस्याएँ दोहरी वसूली जो पैसा पहले प्रीपेड बैलेंस में दिया जा चुका था, अब वही राशि 4 किस्तों में दोबारा वसूली जा रही है। रेट्रोस्पेक्टिव नियम पहले ट्रांसफर कर लिया, बाद में नियम बनाकर वैध ठहराया

पारदर्शिता का घोर अभाव और RMS सिस्टम में गड़बड़ियाँ।

प्रीपेड मीटर की तकनीकी खामियाँ जैसे मीटर जम्प करना ,अचानक कटौती और गलत बिलिंग।इससे सरकार की छवि पर गहरा असर पड़ेगा प्रीपेड मीटर की इस जबरदस्ती ने आम जनता में सरकार के प्रति गहरा असंतोष पैदा कर दिया हैराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी 2027 विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा सत्ताधारी पार्टी के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकता है। निवर्तमान प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन पंकज कुमार के तानाशाही पूर्ण कार्यालय में लिए फैसलों के कारण यह नीति लागू हुई और सिक्योरिटी ट्रांसफर का सबसे बड़ा हिस्सा पूरा हुआ। इसलिए क्रियान्वयन की जवाबदेही बनती है अगर इसको दूसरी तरीके से देखा जाए तो यह अनुभवहीनता व‌ सरकार को बदनाम करने का एक प्रत्यक्ष प्रमाण है जिससे कि उत्तर प्रदेश सरकार की छवि को एक बहुत बड़ा झटका लगा और लाखों उपभोक्ताओं को इनके इस तानाशाही पूर्ण फैसले के कारण सड़कों पर उतरना पड़ा और ग्रामीण व शहरी इलाकों में महिलाओं द्वारा जो मीटर तोड़े गए वह उखाड़े गए जिसकी जवाबदेही प्रबंधन की है और उसे पर कार्रवाई जनता पर होगी इस वजह से इन सब की जिम्मेदारी मंत्री से लेकर इस नीति को बनाने वाले और लागू करने वाले सभी अधिकारियों पर होगी अभी भी देर नहीं हुई है यह मामला नीति-निर्माण और क्रियान्वयन में उपभोक्ता हितों की पूरी उपेक्षा का स्पष्ट उदाहरण है। UPPCL और सरकार को तुरंत पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए अन्यथा यह बड़े पैमाने का उपभोक्ता शोषण साबित होगा और इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों पर पडना‌ निश्चित है । 

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