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ऑपरेशन सिंदूर: जब भारत ने दिखाया संकल्प और नेतृत्व ने दी प्रेरणा

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ऑपरेशन सिंदूर: जब भारत ने दिखाया संकल्प और नेतृत्व ने दी प्रेरणा

दैनिक इंडिया न्यूज, नई दिल्ली।22 अप्रैल को पहलगाम की धरती पर जो आतंक बरपा, वह केवल कश्मीर नहीं, पूरे भारत के हृदय को आहत कर गया। लेकिन इतिहास गवाह है—भारत ने हर हमले का उत्तर दृढ़ता, साहस और संगठन से दिया है। ऑपरेशन सिंदूर उसी परंपरा की एक नवीन मिसाल है। यह केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा से निकला हुआ वह आह्वान था, जिसमें प्रत्येक नागरिक, हर संस्था और हर नेता एकजुट होकर खड़ा हुआ।

सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई स्पष्ट संदेश है—भारत अब प्रतिक्षा नहीं, प्रतिक्रिया की नीति पर है। लेकिन इस प्रतिक्रिया की विशेषता यह है कि यह "नियत, गैर-उकसावे वाली, आनुपातिक और जिम्मेदार" है। यही भारत की परिपक्वता है।

इस पूरे घटनाक्रम में एक और नाम सामने आता है—राजनाथ सिंह, जिन्हें अब देश राजनीति के हनुमान कहकर सम्मानित कर रहा है। दैनिक इंडिया न्यूज़ के एडिटोरियल डेस्क में प्रकाशित जितेंद्र प्रताप सिंह और वेद प्रकाश का लेख राष्ट्रीय चर्चाओं में आया, जिसमें रक्षा मंत्री को संकटमोचन की भूमिका में चित्रित किया गया। जब-जब राष्ट्र संकट में होता है, राजनाथ सिंह की भूमिका अग्रणी होती है—चाहे वह निर्णय हो, संवाद हो या सैनिकों के मनोबल को नई ऊंचाई देना।

जब रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राष्ट्र को संबोधित किया, तो उसमें केवल शब्द नहीं, वह आस्था झलक रही थी जो हनुमान जी के सिंदूर से प्रेरित थी—पूर्ण समर्पण, वीरता और निष्कलंक देशभक्ति। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं कि यह ऑपरेशन जितना सीमा पार था, उतना ही प्रत्येक भारतीय के अंतर्मन में भी।

इसमें भी विशेष उल्लेखनीय रही सर्वदलीय एकता, जिसमें सभी राजनीतिक दलों ने अपने मतभेदों को एक ओर रख, देश की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर समर्थन दिया। ऐसे क्षणों में लोकतंत्र का असली चेहरा दिखाई देता है—मतभेदों में नहीं, एकता में।

दैनिक इंडिया न्यूज़ एडिटोरियल समूह द्वारा की गई तथ्यपरक शोध, संशोधन और प्रस्तुति ने यह प्रमाणित किया कि हमारे राष्ट्र के नेतृत्व के प्रति विश्वास केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि तथ्यों और कार्यों से पुष्ट है। हमारा विश्लेषण यह सिद्ध करता है कि "राजनीति के हनुमान" की संज्ञा कोई प्रचार नहीं, एक प्रमाणित सत्य है।

यह संपादकीय उन सभी वीर सैनिकों, दूरदर्शी नेतृत्व और जागरूक नागरिकों को समर्पित है, जो इस अभियान में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सहभागी हैं। भारत एकजुट है, भारत सजग है और भारत विजयी रहेगा।

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