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दो दिवसीय भव्य श्रीराम हनुमत महोत्सव का संपन्न गंगा आरती के साथ सम्पन्न

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Dainik India News

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दो दिवसीय भव्य श्रीराम हनुमत महोत्सव का संपन्न गंगा आरती के साथ सम्पन्न

भक्तों ने विशाल श्यामल प्रतिमा के साथ ली सेल्फी, पीपल पत्र पर लिखा 'जय श्रीराम

दैनिक इंडिया न्यूज़ ,लखनऊ, 27 अप्रैल।हनुमत सेवा समिति द्वारा आयोजित दो दिवसीय भव्य श्रीराम हनुमत महोत्सव का आयोजन 26 और 27 अप्रैल को अशोक मार्ग स्थित बलरामपुर गार्डन में सम्पन्न हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन छप्पन भोग अर्पित किए गए, सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, काव्य प्रस्तुतियां, हनुमान झांकी, भजन और बनारस की भव्य गंगा आरती प्रमुख आकर्षण रहे।

भक्तों ने पहली बार पीपल के पत्ते पर चंदन और रोली से 'जय श्रीराम' लिखकर श्रद्धापूर्वक हनुमान महाराज को अर्पित किया। मान्यता है कि इससे जीवन की समस्याओं का निवारण होता है। आयोजन स्थल पर फूलों से सुसज्जित राम दरबार और आठ फीट ऊंची श्यामल हनुमान प्रतिमा सेल्फी पॉइंट का केंद्र बनी।

लिम्का और गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कृष्ण कुमार चौरसिया के संग्रह — जिसमें 40,000 से अधिक हनुमान जी की प्रतिमाएं, सिक्के, पेंटिंग और पुस्तकें थीं — को भी भक्तों ने बड़े उत्साह से देखा।

रविवार को कार्यक्रम का शुभारंभ रजनी सिंह दल द्वारा सस्वर हनुमान चालीसा पाठ से हुआ। इसके पश्चात डॉ. आनन्द त्रिपाठी ने "हनुमतः चरित्र" पर व्याख्यान दिया और मधुर काव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि हनुमान जी ने मर्यादा में रहकर अपने दायित्वों का निर्वाह किया और नीति अनुरूप कार्य किए।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. महेन्द्र सिंह, पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार एवं मध्य प्रदेश के प्रभारी, तथा विशिष्ट अतिथि एमएलसी पवन सिंह व जितेंद्र प्रताप सिंह, अध्यक्ष संस्कृत भारती न्यास अवध प्रांत, उपस्थित रहे। शिक्षा, अध्यात्म, चिकित्सा, समाज सेवा एवं संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान के लिए कई विभूतियों को अलंकृत भी किया गया।

हनुमत भक्त स्मृतिशेष सुनील गोम्बर तथा पहलगाम में शहीद जनों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रयागराज के जितेन्द्र बजरंगी ने हनुमान भजन पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं भजन गायक ओमकार शंकधर ने 'संकट मोचन शरण तिहारी' सहित कई भजन प्रस्तुत कर भक्तों को भावविभोर कर दिया।
राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह ने कार्यक्रम में विशिष्ट उपस्थिति से इस भव्य दिव्य आलौकिक हनुमत आयोजन की प्रशंसा कर सनातन धर्म को रेखांकित किया।

महोत्सव का अंतिम सोपान विश्व प्रसिद्ध बनारस की गंगा आरती के आयोजन के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर दिव्य हनुमत भंडारा भी आयोजित किया गया, जिसकी जानकारी मीडिया प्रभारी संजय मेहरोत्रा ने दी।


हनुमान चालीसा की अद्भुत महिमा पर विस्तार

कार्यक्रम संपन्न होने के बाद प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि श्री हनुमान चालीसा मात्र एक भजन नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक साधना का ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि सरल शब्दों में रची गई यह चालीसा एक ओर गहन भक्ति से ओतप्रोत है तो दूसरी ओर इसमें ज्योतिषीय, वैदिक और वेदांत दर्शन के गूढ़ रहस्य भी छिपे हुए हैं।

श्री सिंह ने उद्धरण देते हुए कहा
'श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मन मुकुर सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु जो दायक फल चारि॥'
इस दोहे में ही स्पष्ट कर दिया गया है कि गुरु के चरणों की वंदना कर चित्त को निर्मल बनाकर भगवान राम के विमल यश का गान करना चाहिए। हनुमान चालीसा में गुरु महिमा, रामभक्ति और चरित्र निर्माण की अद्भुत साधना निहित है।

उन्होंने बताया कि चालीसा की हर चौपाई में जीवन के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन मिलता है — जैसे कि धर्म, भक्ति, साहस, सेवा, विवेक, और नीति।
'बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥'
यह चौपाई मानव जीवन की सबसे बड़ी समस्या — अज्ञान और दुख — के निवारण का सरल और प्रभावी उपाय प्रस्तुत करती है।

हनुमान चालीसा के फलश्रुति में भी स्पष्ट लिखा गया है —
'जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥'
अर्थात जो भी नियमित सौ बार इसका पाठ करेगा, उसके समस्त बंधन समाप्त होंगे और उसे महान सुख की प्राप्ति होगी।

उन्होंने आगे कहा कि श्री हनुमान चालीसा केवल भक्ति साधना नहीं, बल्कि एक 'जीवन मार्गदर्शिका' है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो हनुमान चालीसा के पाठ से ग्रहों के दोष, विशेषकर शनि के प्रभाव से मुक्ति मिलती है।
इसीलिए शास्त्रों में भी हनुमान जी को 'कलियुग के सबसे जागृत देवता' कहा गया है।

संक्षेप में, राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने हनुमान चालीसा के गूढ़ रहस्यों और दिव्यता को उद्घाटित करते हुए सभी श्रद्धालुओं से इसका नित्य पाठ कर जीवन को सफल बनाने का आह्वान किया।

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