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नन्हे दिवित मलिक का जन्मदिन — हरियाली और राष्ट्रप्रेम का संगम

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Dainik India News

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नन्हे दिवित मलिक का जन्मदिन — हरियाली और राष्ट्रप्रेम का संगम

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।आज के उस दौर में जब जन्मदिनों का अर्थ केवल रोशनी, केक और सजावट तक सीमित होता जा रहा है, वहीं आर.के. पुरम की गलियों में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने यह संदेश दिया कि सच्ची खुशी वही है जो समाज और प्रकृति के काम आए। चार वर्षीय नन्हे दिवित मलिक का जन्मदिन इस बार कुछ अलग था — इसमें गुब्बारों की जगह पौधे थे, शोर की जगह हरियाली की खुशबू थी, और तामझाम की जगह थी धरती माता के प्रति कर्तव्य का भाव।

इस अनोखे आयोजन की प्रेरणा बनीं दिवित की बहन पोलाक्षी मलिक, जिन्होंने अपने छोटे भाई के जन्मदिन को पर्यावरण की रक्षा के संकल्प से जोड़ दिया। उन्होंने अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों में पाँच सौ पौधे वितरित किए और सबको संदेश दिया — “प्रकृति का साथ दें, प्लास्टिक हटाएं और हरियाली अपनाएं।” यह छोटा-सा प्रयास केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि एक राष्ट्र की चेतना का प्रतीक बन गया। क्योंकि जो बच्चा आज पेड़ लगाना सीखता है, वही कल इस धरती को साँस देने वाली हरियाली का रक्षक बनता है।

पोलाक्षी मलिक पहले भी कई मौकों पर पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाती रही हैं — अर्थ डे, विश्व पर्यावरण दिवस और नवरात्र जैसे पावन अवसरों पर उन्होंने पौध वितरण और वृक्षारोपण कर लोगों को प्रकृति से जोड़ा। इस अवसर पर उन्होंने भावुक होकर कहा, “हम चाहते थे कि दिवित का जन्मदिन केवल एक उत्सव न रहे, बल्कि धरती मां के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर बने। केक तो हर साल कटता है, लेकिन पेड़ वह है जो वर्षों तक जीवन देता है।”

शाम ढलते समय जब बच्चे अपने हाथों में पौधे लेकर मुस्कुरा रहे थे, तो वह दृश्य किसी आशा के दीपक की तरह चमक रहा था। मानो नई पीढ़ी यह संदेश दे रही हो कि भारत की शक्ति केवल उसके विकास या तकनीक में नहीं, बल्कि उसकी मिट्टी, उसकी संस्कृति और उसकी हरियाली में बसती है।

यह नन्हा प्रयास भले ही आकार में छोटा लगे, पर इसका संदेश विशाल है — यदि हर भारतीय अपने किसी एक आनंद के क्षण को प्रकृति और राष्ट्र सेवा से जोड़ दे, तो भारत फिर से उसी स्वर्ण युग की ओर बढ़ सकता है जहाँ आकाश में केवल त्रिवर्ण की छटा और धरती पर केवल हरियाली की महक होगी।

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