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महाकुंभ 2025: योगी आदित्यनाथ ने इसे बताया आध्यात्मिक, सामाजिक और आर्थिक चमत्कार

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Dainik India News

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महाकुंभ 2025: योगी आदित्यनाथ ने इसे बताया आध्यात्मिक, सामाजिक और आर्थिक चमत्कार

मुख्यमंत्री ने बजट सत्र में महाकुंभ की ऐतिहासिक सफलता पर दी विस्तृत जानकारी

"लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवाद और विचारों की अभिव्यक्ति" – योगी आदित्यनाथ

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद में वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट पर चर्चा के दौरान महाकुंभ 2025 की भव्यता और उसके सामाजिक, आध्यात्मिक, और आर्थिक प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने इसे देश की सांस्कृतिक विरासत और सनातन धर्म की आस्था का जीवंत उदाहरण बताया।

महाकुंभ: एक वैश्विक आयोजन

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकुंभ का आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक ऐसा आयोजन है, जिसने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को विश्व पटल पर स्थापित किया। उन्होंने उल्लेख किया कि "महाकुंभ के महत्व को वही समझ सकता है, जिसने प्रयागराज में इसकी भव्यता को अनुभव किया हो।"

योगी आदित्यनाथ ने बताया कि इस बार महाकुंभ को पूरी दुनिया ने सराहा। "द वॉल स्ट्रीट जर्नल, बीबीसी लंदन, द न्यूयॉर्क टाइम्स, और द गार्जियन जैसी अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसियों ने इस आयोजन की सराहना की।" यूनेस्को के निदेशक टिम कर्टिस ने भी इसमें भाग लिया और कहा कि 2019 के कुंभ को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा मिला था, और 2025 का महाकुंभ इससे भी भव्य रहा।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

मुख्यमंत्री ने बताया कि महाकुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला एक बड़ा माध्यम भी रहा। उन्होंने कहा, "महाकुंभ-2025 से प्रदेश की अर्थव्यवस्था में 3.5 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि का अनुमान है।"

प्रयागराज के नाविक परिवारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक नाविक परिवार ने "महज 45 दिनों में 30 करोड़ रुपये कमाए, जिससे यह प्रमाणित होता है कि महाकुंभ आजीविका का भी प्रमुख स्रोत है।"

महाकुंभ के दौरान प्रशासनिक सफलता

महाकुंभ के दौरान 66.3 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया और इस दौरान एक भी आपराधिक घटना नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने इसे "सनातन धर्म के अनुशासन और सामाजिक व्यवस्था का उदाहरण" बताया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ ने "वसुधैव कुटुंबकम्" की भावना को साकार किया और जाति-पंथ से ऊपर उठकर एकता का संदेश दिया।

गंगा की स्वच्छता और नमामि गंगे अभियान

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में "नमामि गंगे परियोजना" को लागू करने से गंगा की स्वच्छता सुनिश्चित हुई। उन्होंने बताया कि "सीसामऊ में प्रतिदिन गिरने वाले 4 करोड़ लीटर सीवेज को रोका गया और अब वहां का सीवर प्वाइंट सेल्फी प्वाइंट में बदल चुका है।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि "सनातन धर्म के लिए मां गंगा आज भी पवित्र हैं। पश्चिमी विचारक हमें उपदेश देते हैं, लेकिन अपने पुराने कृत्यों को नहीं देखते।"

महाकुंभ ने दिया हिंदू एकता का संदेश

योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ को हिंदू एकता का प्रतीक बताया और आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि "महाकुंभ ने एक नया हिंदू विमर्श भी पैदा किया है – हे पश्चिमी आधुनिकता, जिसे तूने दूषित किया, वह अब भी हमारे लिए पवित्र है।"

साहित्यकार सुधीश पचौरी के एक लेख का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि "45 दिनों में एक से डेढ़ करोड़ श्रद्धालु प्रतिदिन आकर शांतिपूर्वक स्नान करते और लौटते थे। यह सनातन धर्म की सहिष्णुता और अनुशासन का प्रमाण है।"

अयोध्या और काशी की बढ़ती महिमा

मुख्यमंत्री ने बताया कि "श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। महाकुंभ और अन्य आध्यात्मिक स्थलों ने आस्था को आजीविका से जोड़ा है।"

उन्होंने कहा कि "अयोध्या में प्रतिदिन 5 से 15 लाख श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के दर्शन के लिए आ रहे थे। वहां के नागरिकों और संतों ने भी अपनी सुविधाओं की परवाह किए बिना श्रद्धालुओं की सेवा की।"

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