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महेंद्र सिंह धोनी, "THE WARRIOR WHO MARCHES TO VICTORY"

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महेंद्र सिंह धोनी, "THE WARRIOR WHO MARCHES TO VICTORY"

दैनिक इंडिया न्यूज
ब्यूरो डेस्क

जीवन हमे कभी कभी कुछ ऐसा मिलता है जो बहुत ही अनमोल होता हैं जिसकी तुलना किसी से भी नही की जा सकती हैं।

वो शक्श कौन होगा यह बात हमारे जीवन के भविष्य के गर्भ में ही छुपी होती हैं।यह भी निर्भर करता है कि हम अपना जीवन किस तरह जीना चाहते है या जी रहे हैं।

ऐसे ही जहन में एक नाम आता है वो है महेंद्र सिंह धोनी। जिसने जीवन मे अपने पल-पल उतार चढ़ाव देखे पर कभी अपने जीवन के लक्ष्य को धूमिल नही होने दिया।एक सबसे बड़ी बात जो की बहुत कम लोगो मे होती है चाहे जैसा भी मुश्किल समय हो सदैव एक समान बने रहना।

यही स्वभाव हमारे एमएसडी में पाया जाता हैं।इसी वज़ह से धोनी को उनके जानने वाले अंप्रेडिक्टिबल भी कहते हैं।धोनी कभी किसी चीज को भविष्य के लिए नही सोचा करते है बल्कि जैसे कंडीशन होती है उसी के अनुसार अपने फैसले लिया करते हैं।यही बात उन्हें विशेष बनाती हैं।

अब बात करते है उनके क्रिकेट कैरियर की तो उनका यह कैरियर कितना शानदार रहा है ये किसी से नही छिपा है।

धोनी का अंतरराष्ट्रीय कैरियर ऐसा रहा है जो ज्यादातर शीर्ष पर भी जाता रहा।वह टीम का प्रतिनिधित्व करते तो ऐसा लगता था कि कोई वारियर अपने सेना को लेकर युद्ध मे विजय करने के लिए लालायित हो।उन्हें अपने हर खिलाड़ी की इतनी बारीक पहचान थी कि उन्होंने कई बार क्रिकेट के महान जानकारों को हैरत में डाल दिया अपने द्वारा लिए गए फैसलों से।

दुनिया में एक वो व्यक्ति होते है जो फैसला लेने से पहले सोचते है पर धोनी फैसला लेकर उसको सही साबित कर देने पर विश्वास रखते हैं।धोनी ने अपने कैरियर में कई बहुत ही कड़े फैसले लिए जिसकी वजह से उन्हें लोगो की आलोचना भी झेलनी पड़ी,पर उन्होंने उन पर विश्वास न करके देश को शानदार परिणाम दिए जिससे कई बार देशवासियों को खुशियों के पल मिले।जिनको आज भी हम याद करके भाव विभोर हो जाते हैं।सबसे बड़ा क्षण 2011 का विश्वकप था जिसने पूरे भारतवर्ष को इतना बड़ा खुशी का पल दिया।इसी के साथ धोनी पूरे विश्व पटल पर छा गए।

उनके क्रिकेट जगत के महत्वपूर्ण फॉरमेट से सन्यास लेने के बाद से उनके चाहने वालो को उनकी कमी खलती चली आयी हैं।पर यह भी सच है की बदलाव ही प्रकृति का नियम हैं।और यह बात धोनी बहुत अच्छी तरह से समझते थे उन्होंने यह समय ध्यान रखते हुए अपने क्रिकेट जीवन से सन्यास लिया और कहा जब पुराने जायेगें नही तब तक नई जनरेशन को कैसे मौका मिलेगा।

उन्होंने भारतीय टीम को बेहतर से बेहतरीन बनाने का एक बहुत ही शानदार कार्य किया हैं।

साभार
देवांशू शर्मा

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