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शिवजी की बात न मानते हुए देवी सती ने ली श्रीराम की परीक्षा, जानें फिर क्या हुआ?

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Dainik India News

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शिवजी की बात न मानते हुए देवी सती ने ली श्रीराम की परीक्षा, जानें फिर क्या हुआ?

दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ राष्ट्रीय सनातन महासंघ व समस्त सनातनी देव तुल्य जनमानस के आवाहन पर भारत पीठाधीश्वर श्री कृष्ण कुमार तिवारी जी महाराज प्रताप नगर स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में श्री राम कथा का भव्य आयोजन चल रहा है कथा के तृतीय संध्या में भरत पीठाधीश्वर ने श्रीरामचरित मानस के बालकांड में शिव और सती का एक प्रसंग है। शिव और सती, अगस्त ऋषि के आश्रम में रामकथा सुनने गए थे। सती को यह थोड़ा अजीब लगा कि श्रीराम शिव के आराध्य देव हैं। सती का ध्यान कथा में नहीं रहा और पूरा समय सोचने में बिता दिया कि शिव जो तीनों लोकों के स्वामी हैं, वे श्रीराम की कथा सुनने के लिए आए हैं।

कथा समाप्त हुई और शिव-सती लौटने लगे। उस समय रावण ने सीता का हरण किया था और श्रीराम, सीता के वियोग में दु:खी थे, जंगलों में घूम रहे थे। सती को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि शिव जिसे अपना आराध्य देव कहते हैं, वह एक स्त्री के वियोग में साधारण इंसान की तरह रो रहा है। सती ने शिवजी के सामने ये बात कही तो शिव ने समझाया कि यह सब श्रीराम की लीला है। भ्रम में मत पड़ो, लेकिन सती नहीं मानी और शिवजी की बात पर विश्वास नहीं किया। सती ने श्रीराम की परीक्षा लेने की बात कही तो शिवजी ने रोका, लेकिन सती पर शिवजी की बात का कोई असर नहीं हुआ। सती सीता का रूप धारण करके श्रीराम के सामने पहुंच गईं।
श्रीराम ने सीता के रूप में सती को पहचान लिया और पूछा कि हे माता, आप अकेली इस घने जंगल में क्या कर रही हैं? शिवजी कहां हैं? जब श्रीराम ने सती को पहचान लिया तो वे डर गईं और चुपचाप शिव के पास लौट आईं। कथा में आगे क्या होता है जानने के लिए महाराज जी के श्री मुख से कथा सुनने के लिए नर्मदेश्वर महादेव मंदिर आयें या दैनिक इंडिया न्यूज़ का शनिवार का विशेषांक देखें।

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